शनिवार, 12 जनवरी 2008

हम से मरवायेंगे आप बरसों,


ग़ज़ल
साहु सारे गिरफ़्तार होंगे.
चोर बस्ती के सरदार होंगे.

उँगलियाँ हमको जो कर रहे हैं,
वो अँगूठों के हक़दार होंगे .

हम से मरवायेंगे आप बरसों,
तब कहीं जा के हुशियार होंगे.

बहुत पहँचे हुए संत हैं हम,
मुफ़्त में यूँ न दीदार होंगे.

चिकनी चुपड़ी जो तुमसे कहेंगे,
खोखले उनके किरदार होगें.

प्यार से गर जो इनको लगाओ,
कल को पौधे ये फलदार होंगे.

कार में इश्क़ हम भी करेंगे,
सपने अपने भी साकार होंगे.

ता.12-01-08 समय-12-50

















2 टिप्‍पणियां:

  1. उँगलियाँ हमको जो कर रहे हैं,
    वो अँगूठों के हक़दार होंगे .

    हम से मरवायेंगे आप बरसों,
    तब कहीं जा के हुशियार होंगे
    Bhadauria JI
    Aap ki ghazalon pe kaleza chahiye aur hum men hai ye hi sidhdh karne ke liye comment kiya hai...bahut khoob.
    Aap ko long awaited promotion aur increment mile ye hi kaamna hai aur aap ka transfer Ahmedabad se bahar na ho...Saaf Sachcha bolne aur likhne wale se log jalte hain aur aap koi apvaad nahin.
    Neeraj

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  2. नीरजजी क्यों बदमाशियों को नवाज़ रहे हैं.
    हम चाहते है कोई भाषा विषय के नाम पर उलझे इस लिए ही ये प्रयोग कर रहे हैं.
    ग़ज़ल की तो हमने ऐसी तैसी कर डाली है.
    जब हमारी ऐसी तैसी हो रही है तो कुछ तो बौखलाहट होगी.आप जैसे कद्रदान कहीं बीमार न कर दें.खैर अब आगे हो सका तो ध्यान रखेंगे.
    बस मुहब्बत बनाये रखिए.आमीन.

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