शुक्रवार, 1 अगस्त 2008

गुजरात में बम्ब विस्फोट से मरने वालों को 9लाख का पैकेज.

गुजरात में बम्ब विस्फोंटो से मरने वालों को नौ लाख रुपये का पैकेज.
हमारे अहमदाबाद शहर में ता.26-07-08 को बम्ब विस्फोटों में मरने वाले गरीब लोगों को राज्य सरकार ने पांच लाख केन्द्र सरकार ने चार लाख के पैकेज की घोषणा की. राज्य सरकार ने तुरंत चैक देकर अपने वादे को निभाया. टी.वी.पर पांच लाख का चैक देते विधानसभा अध्यक्ष श्री अशोक भट्टजी की तस्वीर देखकर हमारा मन पत्नीजी को पूछने को हुआ क्यों तुम्हारा क्या इरादा है पर उसके पहले ही वे बोल उठीं ये गरीब लोग इनके मुँह पर चैक क्यों नहीं मारते क्या अपने स्वजनों का मूल्य पैसा है वे काफी गंभीर थीं.मैंने कहा गरीबी बहुत बड़ी लाचारी है लोग क्या करें. दूसरी तरफ दिल्ली से आने वाले तस्ल्ली के साथ -साथ चार लाख की और घोषणा कर गये. उस दिन हम रास्ते में ही थे जिस समय ये शहर में आतिशबाज़ी चल रही थी. पर क्या करें हमारे जैसे लोगों के लिए कहीं जगह नहीं है. नेट के हमारे चाहने वाले हमारा विरह कैसे वर्दास्त करेंगे सो अभी हमें जल्दी नहीं कुछ काम निपटाने हैं.

और प्यारे आतंकवादियो तुम बड़ा शवाब कमा रहे हो गरीबों को मारकर उनकी जाने अनजाने में गरीबी भी दूर कर रहे हो. तुम्हारा जन्नत में रिजर्वेशन पक्का. यार अब हमारे शहर में जब बम्ब रखो हमें जरूर बताना हम खुद आ जायेंगे. बेटे की फीस भरने के लिए हमें बैंक से लोन लेनी पड़ती है साड़े ग्यारह परसेन्ट ब्याज हम भरते हैं. वो गुजरात नेशनल ला युनिवर्सिटी का छात्र है सालाना डेड़लाख का खर्च.पांच वर्ष का कोर्ष है उसकी फीस का बंदोवस्त हो जायेगा. पांच साल से शिक्षा कमिशनर कचेहरी के अधिकारियों ने हमारे इंक्रीमेंट रोक रक्खे हैं गुजरात हाईकोर्ट में फरवरी 2008 से पीटीशन कर रक्खी है तारीखों पर तारीखें पड़ रही हैं कोई अधिकारी हाजिर नहीं रहता कहा गया है कि हमारे कोन्फीडेंशल रिपोर्ट में हमारा स्वभाव अच्छा नहीं है तुरंत गुस्सा करते हैं स्वर्ण अच्छरों से लिखा है.इस पर अभी कोर्ट में बहस होनी हैं. कि हमारे स्वभाव और इंक्रीमेंट का क्या सबंध है. अभी हाल में ही पता चला कि हमारे प्रिंसीपल के प्रमोशन में से हमारा नाम निकालने की साज़िश रची गयी है हमने पांच रोज़ पहले फिर गुजरात हाईकोर्ट में गुहार लगायी है कि हमारे साथ न्याय हो.राज्य सरकार की उच्च शिक्षा योग्यताओं में हमारा नाम पहला है. हम 1983 के अपने हिन्दी विषय के गोल्ड मेडालिस्ट1990 उर्दू,हिन्दी,गुजराती भाषाओं की ग़ज़लों पर पीएच.डी..एन.सी.सी. की अतिरिक्त केप्टन रेन्क केन्द्र सरकार की योग्यतायें.सब के बावज़ूद यतीम हैं कोई हमारा राजनीति में मां-बाप नहीं सो सचिवालय के जादूगर अपना खेल कर रहे हैं. हाईकोर्ट के न्यायाधीश महोदय ने राज्य सरकार के आला अफ्सरों से जबाब तलब किया है ता.28-8-08 तक बतायें कि वे हमारे साथ क्या सलूक करने वाले हैं हमे प्रिंसीपल बनाने वाले हैं या अपने रिश्तेदारों को .
प्यारे आतंकवादियो मैं अपने बम्ब विस्फोट में मरने से पहले बेटे को बता जाऊंगा कि वह गुजरात नेशनल ला युनवर्सिटी में पाँच वर्ष के बाद लायर बन कर तु्म्हें मुक्त कराये.यह सोच कर कि अंकलों ने हमें नौलाख दिलाकर हमारी बहुत मदद की उनकी मेहरबानी से हमें 9 लाख मिले.जो हमारी पढ़ाई के काम आये. भले पापा की जान गयी. क्योंकि सरकारी सचिवालयों में बैठे बदमाश अधिकारी तुमसे ज्यादा खतरनाक हैं वे उच्च न्यायालयों को भी घोल के पी गये हैं. वे हमें किश्तों में मार रहे हैं तुम विस्फोटों में.
तो दूसरी तरफ मोल रिलायंस फ्रेश के नाम पर मार्केट के बड़े व्यापारियों ने धीरे धीरे गरीबों का सब्जी बेचना भी छीन लिया है. तुम हम फल सब्जी बेचने वालों की लारी के पास बम्ब रखकर हमें हलाक कर रहे हो ताकि लोग लारियों से सब्जी लेना भी बंद कर दें लगता है तुम सब मिलकर हम आम गरीब लोगों की ऐसी तैसी करने में लगे हो. वे हमें किस्तों मे मार रहे हैं तुम हमें हमें विस्फोटों में जैसे नाग नाथ वैसे सांपनाथ.

क्या तुम नहीं जानते गरीब और हम जैसे नौकरी पेशा लोग बच्चों को पढाने के लिए,घर चलाने के लिए कैसे जी रहे हैं घर ही नहीं हम ज़िन्दगी भी किश्तों पर जी रहे है और तुम हमें मार कर शूरमा बन रहे हो. मरता क्या न करता हम लोग वैसे ही बहुत परेशान हैं अगर हमारे सब्र का पैमाना छलक गया तो सरकारें भले कुछ न करें ये सताये हुए लोग एकजुट होकर तु्म्हें सिर्फ आग में जलायेंगे ही नहीं तुम्हारे उस शैतानी दिमाग का कीमा भी बनाकर खायेंगे जो तु्म्हें अस्पताल में विस्फोट करने की इज़ाज़त देता है.उनमें मैं सबसे पहले रहूंगा. कॉलेज मे पढ़ाने के साथ एन.सी.सी अधिकारी की भी जिम्मेदारी है. तुम्हारे अंबूस लगाने के तरीकों से वाकिफ़ हूँ.10 साल से रेग्यूलर सेना के कर्नल रेंक के अधिकारियों के साथ हूँ. तुम कोई बाहर के पेशेवर तीरंदाज नहीं हो सूरत के तुम्हारे मिसन की नाकामयाबी से यही राय बनती है. तुम शहर के ही टुच्चो हो तम्हें मस्ती चढ़ी हुयी है. तुम्हरा इलाज़ ज़रूरी है लोग करें.
बहुत पहले एन.सी.सी के एक केम्प में नागालेन्ड से आये केडेटस ने हमारे अहमदाबाद में केम्प कमांडर से आखिरी दिन कुत्ते के मांस की डिमांड की थी तो उन्होंने उनकी इच्छा पूरी करदी. वे पैरा कमांडो थे. कर्नल रेन्क के अधिकारी.श्रीलंका में कई आपरेशन कर चुके थे.हमारी एन.सी.सी की बटालियन में दो साल के लिये आये थे. केम्प में नागालेन्ड के कै़डेटस ने मुझे कुत्ते की डीस ऑफर की थी वे बड़े चाव से खा रहे थे. मैं शाकाहारी होने के कारण टाल गया था. पर तुम बदमाशो जो गरीब और निर्दोषों को मार रहे हो उससे मैं इतना क्षुब्ध हूँ कि कभी जो हाथ लग गये तो लोग शायद परहेज भी करें मैं तुम्हारे दिमाग का कीमा ज़रूर टेस्ट करूँगा.आमीन.

अब दूसरा सीन अहमदाबाद के बाद सूरत में बीस बम्ब पकड़े गये किसी एक के भी न फटने से लोगों ने सवाल किये तो पता चला कि सरकिट ठीकठाक नहीं थी. नौसिखियों ने एकाद का प्रेक्टीकल भी नहीं कर के देखा. ट्रेनिंग की गड़बड़, लोगों की चौकसी, या पुलिस का जादू इस पर रिसर्च की साफी संभावनायें नज़र आती हैं. आगे के नज़ारें भी काफी दिलचस्प हैं जरा देखिये बम्ब पेड़ो पर, पुलों पर, होर्डिंग पर लगे हुये थे लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी,विस्फोंट निरोधक दस्ते ने उन्हें निस्तेज किया, दूर खड़े लोगों ने हर्ष के मारे तालियाँ बजायी. एक वीर तो बम्ब लेकर पुलिस थाने ले दौड़ा टी.वी. वालों ने इन्टरव्यू लिया. कैस लग रहा था आपको, घर वालो की चिन्ता क्यों नहीं की वगैरह वगैरह.
दूसरे दिन तड़के हमारे मुख्यमंत्रीजी सूरतवासियों की खबर लेते हुए विस्फोट की सूचना देने वाले लोगो को 21 हजार,अहमदाबाद सूरत-मिसन का सुराग देने वालों को 51लाख के पुरस्कार की घोषणा की, उन्होंने कहा कि ये आतंकवादियों का गुजरात के साथ युद्ध है लोग सतर्कता बरतें. हमारी राय तो यह है कि जब मरने वालों को 5 लाख तो जो बम्ब रखने वाले या उन्हें मदद करने वालों को को पकड़कर ज़िन्दा जलाने वालों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिये. लोग आश लगा कर बैठे हैं. आमीन.
कमब्खतों ने सिविल अस्पताल में जो हाहाकार मचाया उससे तो यही राय बनती है. तो दूसरी तरफ दिल्ली से आश्वासन देनेवाले भला कब चूकते लगे हाथ वे भी चार लाख की खैरात कर गये. एक खास बात खास राज्यों को ही लक्ष में रखकर वारदातें हो रही हैं. खास कर दिल्ली के प्रति आतंकवादियों का सोफ्ट कोर्नर नज़र आ रहा है.मेरे मित्र ने बताया यार आंतकवादियों को दिल्ली की तिहाड़ जेल में दामाद की तरह ट्रीटमेन्ट मिल रही हैं सो वे सास,ससुर,साले सालियों,घरवालियों,सभी का ध्यान रख रहे हैं. मरना तो हम गुजरात वालों का हैं, सौतेलों सा बर्ताव किया जा रहा है.

हर आतंकी हमले के वाद घिसे पिटे बयान शुरू हो जाते है. विदेशी ताकतों का हाथ.
प्रधानमंत्री को दस्त लग गये आई.एस.आई का हाथ, रक्षा मंत्री को एडस हो गया आ.एस.आई. का हाथ,गृहमंत्री के घर पोता पैदा हुआ चमचे बधाई देने पहुँचे श्रीमानजी आप दादा बन गये वे आदतन बोले मुझे सब पता है इसमें आई.एस.आई. का हाथ है. माना आई.एस.आई का हाथ ही नहीं पांव भी हैं तो उसे तोड़ते क्यों नहीं, क्यों चाटने की तारीखें तय की जाती हैं. निबल की लुगाई पूरे गांव की भौजाई जैसा देशका हाल है कोई भी लुच्चा सरेआम छेड़लेता है मनमानी करलेता है सब गाल बजा कर रह जाते हैं.विदेशी ताकतों का हाथ लोग शांति बनायें रक्खें और तुम. पाक का गोला कश्मीर में गिरता है दिल्ली की पतलून गीली होजाती है. मैथलीशरण गुप्तजी ने जयद्रथ-वध में कितना सटिक लिखा है-

निज शत्रु का साहस कभी बढ़ने न देना चाहिए.
बदला समर में बैरियों से शीघ्र लेना चाहिए.

पापी जनो को दंड देना चाहिए सचमुच सदा.
वर वीर क्षत्रिय वंश का कर्तव्य है ये सर्वदा.

लोग देख रहे हैं कि हमारे देश के कर्णधार किस वंश के हैं सौदबाज़ी,दलाली में ये पूरे विश्व में नाम कमा रहें हैं. इनसे क्या उम्मीद रखी जा सकती है. अब तो लोग ही अपने होने का परिचय दें कि वे किस के वंशज हैं. ये शुरआत गुजरात से हो आमीन.

डॉ.सुभाष भदौरिया,ता.31-07-08 समय 09.25AM.











3 टिप्‍पणियां:

  1. दोनों सरकार मिलकर आतंकवादी को " नौ लात " का पैकेज क्यों नही देती ?

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  2. आप की पीड़ा साफ़ समझ में आ रही है...कोई भी देश का संवेदनशील नागरिक आप की प्रतिक्रिया से विचलित हुए बिना नहीं रह सकता...सच्चे और ईमानदार इंसान के साथ ऐसा सदियों से होता आया है, जैसा आप के साथ हो रहा है...आप कोई अपवाद नहीं हैं...सबको अपनी लदी अपने आप ही लड़नी होती है...किसी के भरोसे आप जंग नहीं जीत सकते...आखरी विजय आप की हो...ये ही दुआ है.
    नीरज

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  3. संजयजी एवं नीरजजी
    आपकी हौसला अफ़जाई के लिए कैसे शुक्रिया अदा करूँ.आप जैसे कद्रदान जब टिप्पणियाँ करते हैं तो जी उठते हैं. क्या बतायें लाख छिपाने के बाद भी ज़ख्म खुद बोलने लगते हैं स्वर्गीय हरजीत सिंह के शब्दों में ---
    क्या सुनायें कहानियाँ अपनी.
    पेड़ अपने हैं आँधियाँ अपनी.

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