मंगलवार, 29 जुलाई 2008

तुझको बिल में ये घुस के मारेंगे.

मेरे अहमदाबाद शहर के लोगो मैं केप्टन सुभाष भदौरिया जिसने तुम्हारे कॉलेज के बच्चो कों पिछले 10 सालसे एन.सी.सी. में फौजी ट्रेनिंग दी, हम सब भारतीय हैं का पाठ पढ़ाया. आतंकी हमले के बाद जिस दिलेरी के साथ तुम्हें सड़कों पर अपने काम काज पर जाते देखा है. जैसे कुछ भी न हुआ हो. मैं तुम्हें सैल्यूट करता हूँ और तुमने जो अपने लाड़ले खोये हैं उनके ग़म से मैं भी उतना ही रंजूर हूँ जितना की तुम. तुम्हें हर लम्हा सावधान रहना है और अपनी हिफ़ाज़त खुद करनी है. ये ग़ज़ल तुम्हारी हिम्मत और हौसलों के नाम है. साथ ही उन गद्दारों के जो खाते यहाँ की हैं और बजाते अपने बापों की हैं.
ग़ज़ल
किससे डरते हैं अहमदाबादी.
शान से मरते अहमदाबादी.

एक एक का जबाब सौ-सौ से,
गर बिगड़ते हैं अहमदाबादी.

तूने सोचा था डर के बैठेंगे,
हँस निकलते हैं अहमदाबादी.

आन पर अपनी अगर आजायें,
कर गुज़रते हैं अहमदाबादी .

तेरी मर्ज़ी बिगाड़ ले जितना,
फिर संवरते हैं अहमदाबादी.

तुझको बिल में ये घुस के मारेंगे,
कब ठहरते हैं अहमदाबादी.

डॉ.सुभाष भदौरिया,.ता.29-07-08 समय-11.20AM



9 टिप्‍पणियां:

  1. Subhash Ji.
    Bahut acha likha hain inko sabak to ab sikhana padega inhe raste par lana hoga.

    Is balak ki lekhni bhi kuch kehna chahti hain aaye or apan aashirwaad de.
    Kamal Mudgal
    http://sharehindipoetrygazal.blogspot.com/

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  2. निराशा को आशा में बदलनें की आप की कोशिश काबिले तारीफ है।बहुत अच्छी रचना है।

    तेरी मर्ज़ी बिगाड़ ले जितना,
    फिर संवरते हैं अहमदाबादी.

    तुझको बिल में ये घुस के मारेंगे,
    कब ठहरते हैं अहमदाबादी.

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  3. निराशा को आशा में बदलनें की आप की कोशिश काबिले तारीफ है।बहुत अच्छी रचना है।

    तेरी मर्ज़ी बिगाड़ ले जितना,
    फिर संवरते हैं अहमदाबादी.

    तुझको बिल में ये घुस के मारेंगे,
    कब ठहरते हैं अहमदाबादी.

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  4. कमलजी,परमजीतजी,राजभाटियाजी,आप महानुभावों का मैं आभारी हूँ कि इस विपदा की घड़ी में आप हम से वाबस्ता हैं.तो दूसरी तरफ वे लोग हैं जो
    गुजरात को कैसे मुज़रिम करार दिया जाये इस बहस में लगे हुए हैं.इनमें वे नादान भी हैं जिस शाख पर बैठे हैं उसी को काट रहे रहैं हैं.

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  5. पोस्ट की तारीफ़ कैसे करू....."तुझको बिल में ये घुस के मारेंगे, कब ठहरते हैं अहमदाबादी."
    अच्छी रचना है।

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  6. bhai saab sharm aati hai ki bharat ka nagrik hoo. baaten baadi-baadi karane se kuch nahi hota hai .roz marane se to aacha hai ek din mar jao.napunsak rashtra ka naagrik hu me . is liye sharminda hoo.

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  7. HINDUSTANI hone pe hamko NaaZ bahut hai,
    Watan pe Nichawer hone ka Armaan bahut hai.

    TIRANGE ko Dekhker milta bahut Sukoon hai,
    Dunia main is TIRANGE ke Qadrdaan bahut hain.

    Hamare zarre zarre main basa yanhi ka Lahoo hai,
    Yeh hamare Hindustani hone ki Pehchan bahut hai.

    Her tarhan ke Mousam yanhi mile hain,
    Yeh Kudrat ke humper INAAM bahut hain.

    - JAYRAJSINH

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