मंगलवार, 9 जून 2009

मोदीजी सरकारी कोलेजों को बचाओ.

मोदीजी सरकारी कोलेजों को बचाओ.
गुजरात राज्य की तमाम सरकारी कोलेजें रेग्युलर प्रिंसीपल के अभाव में दम तोड़ रही हैं. राज्य की 150 साल पुरानी सरकारी आर्टस एवं सायंस कोलेज अहमदाबाद में दिल्ली से आयी नेक टीम के लिखित सुझाव के बावज़ूद अभी तक रेग्युलर प्रिंसीपल की नियु्क्ति नहीं की गयी. राज्य की तमाम सरकारी आर्टस कोमर्स सायंस कोलेजो में पिछले 10 साल से रेग्युलर प्रिंसीपल नहीं हैं. शिक्षा सचिव अडियाजी और गुजरात राज्य सेवा आयोग के बीच पिछले एक साल से प्रिंसीपल की फाइल ले क्वेरी दे क्वेरी का खेल चल रहा हैं. राज्य सेवा आयोग के चेयरमेन रेग्युलर प्रिंसीपल की बहाली दें फिर फाइल पर मु्ख्यमंत्रीजी सही करें तब गरीब मास्टरों और विद्यार्थियों के भाग जगें.
आई.ए.एस., आई.पी.एस. रेवन्यु डिपार्टमेंट की फाइलों में पहिए लगे होते हैं वे एक विभाग से दूसरे विभाग तक सुपरफास्ट गति से सीधे मुख्यमंत्रीजी के टेबल तक पहुँचजाती हैं और फिर आर्डर हो जाते है.गुजरात में राज्य के तमाम विभागों में केन्द्र के इलेक्शन के पहले रातों रात प्रमोसन दिये गये थे.

पर विचारे सरकारी अध्यापक पिछले 15 साल से राह देखते रिटायर हो गये. हमें अभी पन्द्रह साल बाकी हैं. राज्य के मुख्यमंत्री जिस विधान सभा मणीनगर अहमदाबाद का प्रतिनिधित्व करते हैं उस इलाके की के.का.शास्त्री सरकारी कोलेज में ही रेग्युलर प्रिंसीपल नहीं इंचार्ज से काम खीचा जा रहा है.शिक्षा मंत्रीश्री रमण वोराजी अपने विधान सभाक्षेत्र में हर साल नई कोलेज खुलवा तो रहे है पर वहाँ न तो रेग्युलर प्रिंसीपल ही हैं न अध्यापक. पिछले साल खुली नई 13 कोलेजों में फर्नीचर इत्यादि की कोई ग्रांट अभी तक नहीं मिली. हम जिस पंचमहाल जिले की सरकारी कोलेज शहरा में हैं वहाँ आज तक टेबल कुर्षी, विद्यार्थियों को बैठने की बैंच कुछ भी नहीं .जिस स्कूल में सरकारी कोलेज खोली गयी उसी से भीख मांगकर काम चला रहे हैं. गाँव के विद्यार्थी बडे़ संयमी है जमीन पर बैठ कर पढ़ लेते हैं. क्या करें सब को लिख लिख कर थक गये. सभी स्वर्णिम गुजरात गा रहे हैं.पिछली साल पंचमहाल जिले के पिछड़े इलाके में खुली हमारी सरकारी कोलेज शहरा का 84 प्रतिशत रिज्लट आया है 07 प्रथम श्रेणी में एक छात्रा 73 प्रतिशत. हम वहां इंचार्ज प्रिंसीपल के रूप में अहमदाबाद से फेंके गये थे.जोइन डायेरक्टर श्री.एच सी पटेल को बताया तो कांग्रेच्युलेशन दिया हमने कहा सर कोलेज में विद्यार्थियों को बैठने के लिए 100 बेंच की ग्रांट दे दो. कांग्रेच्युलेशन से क्या होगा.

शिक्षा कमिश्नर को कई बार मेल कर और लेखित बताया पर कोई सुनता कहाँ है.
कोलेज में अभी फिक्स पेमेंट वाले अध्यापकों की नियुक्ति होनी बाकी है.15 जून से शिक्षा कार्य कैसे शुरू होगा. शिक्षा विभाग कुंभकर्ण की नींद में सो रहा है. पर राज्य के मुख्यमंत्री नरेन्द्रमोदीजी जागते हैं. लगायें दो पिछाडी़ डंडे सोनेवालों को.
पर शिक्षा सचिव अडियाजी मुख्यमंत्री नरेन्द्रमोदीजी के बहुत ही करीबी माने जाते हैं. भले आदमी हैं पर उनके विभाग में सब भले नहीं हैं वे जानकर प्रमोशन की फाइल को लटका रहे हैं. मैने खुद उन्हें एक बार मिलकर जल्द रेग्युलर प्रिंसीपल के प्रमोशन देने की विनती की थी.
अभी प्रिंसीपल की फाइल राज्य सेवा आयोग के कक्ष में विश्राम कर रही है. मुख्यमंत्रीमोदीजी उस फाइल को स्वयं मगायें तभी समस्या हल हो सकती है.
प्रमोशन लिस्ट में 15 साल से पीएच.डी. गोल्ड मेडालिस्ट अध्यापकों को मैनें कहा हम सब लोग सुब्हशाम ॐ नमो नम: का जाप करें तब हमारी पुकार मुख्यमंत्री नरेन्द्रमोदीजी को सुनाई देगी. एक मित्र ने कहा तुम पिछले एक साल से जाप कर तो रहे हो तुम्हारे पांच साल से इंक्रीमेंट छूटे तुम तो पूरे राज्य में शिक्षा विभाग में हाई क्वाली फाइड हो. एम.ए गोल्डमेडालिस्ट गुजरात युनिवर्सिटी,1990 के पीएच.डी. एन.सी.सी.आफीसर सड़ रहे हो न गांव में. मेरे पास जबाब नही था.

बिचारे सरकारी अध्यापक क्या करें प्रमोशन की फाइल में कहां से पहिए लगायें तमाम सरकारी विभाग के कर्मचारियो को नया वेतनमान मिल चुका है. सरकारी कोलेजों के गेज़ेटेड अध्यापकों को ये कह कर टाल दिया गया. तुम्हें प्राइवेट अध्यापकों से साथ यू.जी.सी. स्केल दिया जायेगा तब मिलेगा. बिचारे मास्टरजी नये वेतन मान के मिलने की आश लगाये हैं बैठे हैं अभी फाइल शिक्षा सचिव अडियाजी और फाइनांस सचिव के बीच घूम रही है.
इलेक्शन के समय बिचारे मास्टरों को आचार संहिता के नाम पर धीरज रखने को कहा गया था. सब धीरज रखे हुए हैं गुजरात के सभी विभागों में नया वेतनमान मिल चुका है विचारे सरकारी गैर सरकारी अध्यापक इंतजार कर रहे हैं मुख्यमंत्री मोदीजी जाने कब दुखी मास्टरों की सुनेंगे.
हमारा दोस्त बताता है यार हमारी मास्टर की जाति बकरी की तरह होती है जो चाहता है हमारी टांग पकड़ कर दुह लेता है जो चाहता है हमारी सवारी कर लेता है.
हम में में कर के रह जाते हैं. ये सब किताबी बातें है शिक्षक साधारण नहीं होता उसकी गोद में प्रलय और निर्माण पलते हैं. पलते होंगे हम आजकल जिस जगह शहरा गांव के मुहल्ले में 700 रुपये के किराये के मकान में रहते हैं वो एक स्टोर रूम है उसमें कोई खिड़की नहीं, सामने सुअर और सुअर के बाल गोपाल पल रहे हैं. जब कभी अहमदाबाद बोपल अपने मकान में आना होता हैं सुअर सुअरियों की कमी खलने लगती है. जय हो शिक्षा सचिव अडियाजी की,जय हो गुजरात राज्य सेवा आयोग के चेयरमेन की जो फाइल पर कुंडली मार कर बैठे है. जय हो मुख्यमंत्री नरेन्द्रमोदीजी की जो ये सब दोनो मुट्ठी बाँध कर देख रहे हैं रहे हैं किसी का इलाज नहीं कर रहे और दरबारी स्वर्णिम गुजरात गा रहे हैं भले हमारी ऐसी तैसी हो रही हो उन्हें क्या.
डॉ. सुभाष भदौरिया इंचार्ज प्रिंसीपल
सरकारी कोलेज शहेरा. जिल्ला. पंचमहाल.गुजरात ता.08-06-2009






















2 टिप्‍पणियां:

  1. bada gambhir mamla sahi samay par sahi tareeke se uthaya aapne
    badhaai aapko !

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  2. Bhadauria Ji, kisi shayar ne kaha hai;

    yahan ta umra pyase hi phiroge
    ye basti hai miyan andhey kuon ki.

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