सोमवार, 25 जनवरी 2010

स्वर्णिम गुजरात दृष्टि एवं अभियान.

स्वर्णिम गुजरात दृष्टि एवं अभियान.
राज्य के प्रसिद्ध प्रशिक्षण केन्द्र स्पीपा अहमदाबाद में अपने प्रिंसीपल प्रशिक्षण में ता.18-01-10 से 22-01-10 के दरम्यान अपने पावरपोइन्ट प्रस्तुति में राज्य में हुए पिछले दस सालों भारी परिवतर्तनों को ध्यान में रखकर जो स्लाइड शो हमने ब्लाग पर लगाया है उसी स्लाइडशो को ध्यान में रखकर ये रिपोर्ट दृष्टव्य है.
हाल में गुजरात राज्य सरकार द्वारा दिये गये सरकारी अध्यापकों के प्रिंसीपल के रूप में प्रमोशन को ध्यान रखकर उच्चशिक्षा विभाग ने तमाम नव नियुक्त प्रिंसीपलों की खास प्रशासनिक ट्रेनिंग का आयोजन किया गया था.उसमें हम भी एक थे. गाँधीनगर से हमें भी तलब किया गया था सो हमें भी जाना पड़ा.आवास की बेहतरीन सुविधा लंच तो ऐसा कि क्या कहने जैसे किसी की शादी का भोज हो. जब से अहमदाबाद परिवार छूटा हमें खाने के लाले पड़ गये. पर पाँच दिन की चाँदनी फिर अधेंरी रात का हमें बोध रहा सो हमारा वैरागी मन भोजन की अपेक्षा ज्ञान पर ज्यादा केन्द्रित रहा. विद्वानों के व्याख्यान के साथ गुजरात सिविल सर्विस रूल, पेन्सन, ट्रेजरी के विशषज्ञों ने वो गुर सिखाये कि सरकार में हाथी निकल जाता है और चीटी फँस जाती है तुम लोग अध्यापक से प्रिंसीपल बने हो होश में रहना कहीं कोई गड़बड़ न हो जाये. मनोविज्ञान के मर्मज्ञ दस्तूरजी ने अधिक से अधिक अपने साथियों के मनोभावों को समझकर उन के दिमाग का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की सलाह दी.
राज्य की उच्चशिक्षा कमिश्नर श्रीमती जयन्ती रवी ने सभी नये नियुक्त प्रिंसीपलों को बधाई दी और कॉलेज का हालचाल पूछा तो सब रोने बैठ गये मैडम नयी कालेजों में फर्नीचर नहीं स्टाफ की की कमी है कुछ कीजिए उन्होंने मधुर आश्वासन दिये. हम चुप ही रहे बोलने का मज़ा हम चख चुके हैं. पिछले एक साल से अहमदाबाद से 150 किमी दूर परिवार से बिछुड़े हम ख़ानोबदोश ग़ज़लें लिखकर ग़म ग़लत कर रहे हैं. कहीं बोले तो किमी. बढ़ सकते हैं कम होने से रहे. कमिश्नर मैडम जितनी देखने में सुंदर और मृदु है उतनी ही सख्त. खास कर हमारे जैसों को चुन चुन कर उन्होनें बोर्डर दिखायी है.
कमिश्नर मैडम ने अपने अंतिम सार गर्भित उपदेश में कहा कि लोग तीन तरह के होते हैं
1-एक कमान्डो जो किसी भी काम को अपनी तमाम शक्ति करते हैं दूसरे होते हैं 2-डिमान्डो जो हमेशां कुछ न कुछ डिमान्ड करते रहते हैं और 3-तीसरे होते हैं ब्लेमांडो जो दूसरों पर हमेशा ब्लेम करते रहते हैं और कुछ काम नहीं करते. हमारे साथ दूसरे भी समझ गये चुप रहने में ही भलाई है.
अंत में सब को विविध विषयों पर अपनी पावर प्रजेन्टेशन देने को कहा गया. हमारे नंबर वन ग्रुप को स्वर्णिम गुजरात दृष्टि एवं अभियान मिला उसी को लेकर क्रमशा हम अपनी बात कहेंगे. राज्य के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्रमोदीजी के नेतृत्व में राज्य ने पिछले दस वर्षो में कई क्षेत्रों में जो ऊँची उड़ान भरी है उसे देखकर उनके राजनीतिक विरोधी भी दंग हैं.राज्य की स्थापना 1960 मे हुई थी उसे मई 2010 में स्वर्ण जयंती के उपलक्ष में राज्य में नित नई योजनाओं को कार्यान्वित किया जा रहा है.
खास कर उच्चशिक्षा के क्षेत्र में गुजरात में खुली 1-नेशनल लॉ युनिवर्सिटी मोदीजी का सपना मानी जाती है. कक्षा 12 के बाद मात्र पाँच वर्ष में सिर्फ कानून को ही पढ़कर राज्य के छात्र अपनी विधि कुशलता बढायें.राज्य को अच्छे न्यायविज्ञ मिलें.
बड़ी आश्चर्यजनक घटना में हमारे सुपुत्र राहुलसिंह भदौरिया (स्वीट यंगमेने स्लाइड में दिखाये गये) ने गुजरात नेशनल लॉ युनिवर्सिटी गाँधीनगर 2005 में अखिल भारतीय लॉ.परीक्षा पास कर प्रवेश लिया वे अब चौथे वर्ष में हैं हम सब की क्लास लेते हैं. वे अहमदाबाद में ही नहीं कभी कभी फोन पर भी हमारी क्लास ले लेते हैं हम धन्य हो जाते हैं. मेरा नाम करेगा रोशन जग में मेरा राज दुलारा. दोस्त हँसते हैं अब भदौरिया साहब को शिक्षा विभाग से केश लड़ने के लिए वकील नहीं रखने पड़ेंगे.
2-राज्य में 2007 में खुली पंड़ित दीन दयाल पेट्रोलियम युनि. 3-गुजरात फोरेन्सिक सायंस युनि.चिल्डन युनि. 4-सोमनाथ संस्कृत युनि. रक्षा युनि आदि उल्लेखनीय है.
स्लाइड में योगशिविर में दीप प्राक्टय करने वाली हमारे राज्य की शिक्षा कमिश्नर श्रीमती जयन्ती रवी हैं देखनें में पश्चिम और भारतीय संस्कृति का सुंदर समन्वय. आकर्षक व्यक्तित्व प्रशासन में उतनी ही कठोर कब किस अध्यापक का कहां ट्रांसफर कर अहमदाबाद से तडीपार कर दें जैसा हमारा इंचार्ज प्रिंसीपल बना कर किया सब मैडम से डरते हैं. हमें भी ट्रांसफर के बाद मैडम का डर लगने लगा है सो अहमदाबाद में घर होने के बावजूद ट्रेनिंग सेन्टर स्पीपा में ही रहे बाकी अहमदाबाद वाले रात में घर पर मौज करने जाते रहे और हम तन्हाई में किस्मत को रोते रहे.
मैडम ने अपने प्रयासों से सोये उच्चशिक्षा विभाग की नींद उड़ा दी है.
राज्य में खोले गये अंग्रेजी शिक्षा केन्द्र.
1- राज्य की स्कोप (SCOPE) सोसायटी फोर क्रियेशन ऑफ अपोर्च्युनिटी थ्रू प्रोफेसियन्सी इंगलिस से अँग्रेजी के ज्ञान मे वृद्धि कर के रोज़गार के अवसर मुहैय्या कराना इस योजना का लक्ष है. कमिश्नर मैडम के निर्देशन में राज्य की तमाम कोलेजों में 2- (DELE) डिज़ीटल लेंग्वेज लेब में कम्प्यूर के माध्यम सें अँग्रेजी की शिक्षा प्रदान की जा रही है. राज्य सरकार तमाम कोलेजों को लाखों की ग्रांट दे कर अंग्रेजी भाषा पर विशेष ध्यान दे रही है. इसके साथ अगर गुजराती हिन्दी को भी जोड़ लिया जाय तो सोने में सुहागा हो सकता है.3 (BISAG) के माध्यम से आन लाइन विविध विषयों के विद्वानों द्वारा कोलेज को विद्यार्थियों को उनके विषयों की जानकारी देना ही नही अपितु उनके प्रश्नों के समाधान भी करना ये प्रयोग राज्य के उच्च शिक्षा विभाग से काफी सफल रहा है. ज्ञान एवं कला की सप्तधाराओं द्वारा कोलेज के छात्रों की सुसुप्त कलाओं को मुखरित करना साथ ही उनके द्वारा लोक जागृति का अभियान. हमारी सरकारी विनयन कोलेज शहेरा ने स्वाइन फ्लू की प्रस्तुति कर क्षेत्र के लोगों में भय को दूर किया स्लाइड शो में दृष्ट्वय है. हमारे गुजरात के पंचमहाल आदिवासी जिले के लोकनृत्य की प्रस्तुति हमारे कॉलेज के छात्रों ने दी थी.
मात्र शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं राज्य के सुप्रिम कमान्डर मुख्यमंत्री मोदीजी की त्वरित निर्णय क्षमता के कारण उधोगपति टाटा ने गुजरात को अपना कार्यक्षेत्र बनाया.राज्य में नैनो के आने से अहमदाबाद का साणंद जैसा छोटा गांव विश्व के नक्शे पर आगया.
नैनो आयी खुशियाँ लायीं.
काम मिलेगा सब को भाई.
तो दूसरी तरफ अहमदाबाद में बढ़ती ट्राफिक समस्या का निदान करते हुए मुख्यमंत्री मोदीजी ने इसी वर्ष बहु प्रतीक्षित जनमार्ग सेवा की शुरूआत की. गुजरात सीमावर्ती प्रदेश होने के साथ राज्य की सुरक्षा को ध्यान में रखकर रक्षा अकेदमी खुली. जामनगर के सैनिक स्कूल की तरह मेहसाना पालनपुर के पास सैनिक स्कूल खोल गये.
हाथ हथियार जब उठायेंगे.
भेडिए बच के किधर जायेंगे.
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि गुजरात को स्वर्णिम बनाने में प्रशासन के साथ जन जन की भागीदारी है. मात्र शहरों की चकाचौध ही नहीं हमारे जैसे दूर गाँवों के फलक पर टिमटिमाते सितारे भी मात्र रोशनी ही नहीं उष्मा भी रखते हैं जिसका अहसास कम से कम गुजरात के लोग भी करें तो भी काफी हैं.
प्रिंसीपल डॉ.सुभाष भदौरिया
सरकारी विनयन कॉलेज शहेरा. जि.पंचमहाल गुजरात. ता.25-01-10

3 टिप्‍पणियां:

  1. आप लेख को सेंट्रल अलाइन क्यों रखे है? कृपया सुधार लें, ऐसे में पढ़ने में आनन्द नहीं आता.

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  2. गुजरात के पिछले पचास वर्षों में हुए कार्यकाल की झांकी देख दिल प्रसन्न हुआ...उस से भी ज्यादा ये पढ़ कर की आयुष्मान राहुल सिंह शीघ्र ही अपने पिता की सारी चिंताओं को हरने वाला है...इश्वर से उसके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ...
    नीरज

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  3. 1-संजयजी सेंट्रल अलाइन लेफ्ट अलाइन कर दी है. हिन्दी ब्लाग तकनीक में आप दक्ष हैं.आपका लेखन राष्ट्रप्रेम से जुड़ा हुआ है ऐसा आपके तमाम लेखों से ज्ञात होता है.आपके लेखन में वर्तमान केन्द्रीय प्रशासकों के प्रति आक्रोश मात्र आपका नहीं तमाम आम जन का है.बहुत ही छोटे आलेखों में आप केन्द्रीय मुद्दों को उठाते हैं और पाठको को विचार करने क लिए ही नहीं परिवर्तन के लिए भी प्रेरित करते हैं.साथ ही अपनी आभिजात्य गरिमा को कभी नहीं छोड़ते.
    आप का हमारे ब्लाग पर हार्दिक स्वागत है.आते जाते रहिए और अपनी बेहिचक राय देते रहिए श्रीमान.विषय या कथ्य को लेकर भी आपकी राय हमारे लिए बेशकीमती होगी.धन्यवाद સંજયભાઈ આવજો.
    2-नीरजजी गुजरात के विकास की झांकी आपको पंसद आयी साथ ही आयुष्मान राहुलसिहं के विकास की तो सच कहूँ मात्र शैक्षणिक धरातल पर ही नहीं आध्यात्मिक धरातल पर योग कुंडली जागरण लॉ के साथ साहित्य खासकर संस्कृत,हिन्दी अंग्रेजी साहित्य का अध्ययन अद्भुभुत है.
    तस्लीमा नसरीन की अंग्रेजी पुस्तकों को पढ़ने में उसकी अभिરુचि ग़जब की है.हमारा सबसे बड़ा आलोचक भी हैं.नीरजजी आजकल की पीढ़ी ज्ञान को लेकर बहुत जागृत है.आप हमारे ब्लाग की दुनियां में सच्चे शुभचिंतक एवं सह्दय रचनाकार हैं अबकी दुआयें उसे भी फलेंगी और हमें तो फल ही रही हैं.

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