शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

हम मौत के सौदागर ही सही तुम कौन से सौदागर बोलो ?


ग़ज़ल
हम मौत के सौदागर ही सही, तुम कौन से सौदागर बोलो ?
अर्जुन का था वो कौन गुरू ? हिम्मत हो ज़रा तो मुँह खोलो.

दामन पे हमारे दागों को तुम रोज़ गिनाया करते हो,
भोपाल के मुर्दों को भी कभी सुप्रिम की तराजू पे तौलो.

शोहराब व इशरत के ग़म में रो-रो के बहाये हो नदियाँ,
कश्मीर की सीमा पे निशदिन मरते हैं कभी उन पे रो-लो.

गिरवी ये वतन रक्खा किसने ? डसती है सभी को मँहगाई,
सोये हो ज़रा आँखें खोलो, फ़ुर्सत हो ज़रा तो मुँह धोलो.

गुजरात हड़पने की ख़ातिर तुम क्या क्या खेल दिखाये हो,
दिल्ली भी खिसकने वाली है कुछ होश करो हे बड़बोलो.

ये ग़ज़ल उपरोक्त तस्वीरों एवं ताज़ा वक्त के हालात से वाबस्ता हैं. गुजरात की प्रगति
जिन की आँखों में खलती है. गुजरात को अछूत मान जो मदद के लिए दान की राशि लौटा अपने को मसीहा मान वोटों का खेल खेल रहे हैं बिहार के गरीब तमाम तबके के लोग उनका जल्द ही हिसाब करने वाले हैं. सी.बी.आई. की सारी प्रतिभा इन दिनों गुजरात पर केन्द्रित है. पहले मुंबई में एक साध्वी पर केन्द्रित थी और सरहद पार से एक आक्रमक दस्ते ने काम तमाम कर दिया सहना लोगों को पड़ा. केन्द्र की ये प्रतिभा गुजरात में क्या गुल खिलाती है बस इसका ही लोगों को इंतज़ार है.
हाल में हमारे राज्य के मुख्यमंत्री श्रीनरेन्द्रमोदीजी ने आई.ए.एस ( I.A.S.) अफ़्सरों एवं खुदकी केबिनेट मंत्रियों की लगाम कसते हुए मुख्यमंत्री फेलोशिप योजनामें 14 फेलो का चयन उनकी कार्यक्षेत्रमें प्रतिभा एवं अनुभव के आधार पर किया है . ये नवनियुक्त अपने निर्धारित विभाग में विद्यमान क्षतियों, सुझावों की सीधी रिपोर्ट सी.एम.सर को करेंगे. इससे मंत्रियों ही नहीं सीनियर आई.ए.एस.अफ्सरों की भी पोल खुलने वाली है कि वे अपने विभागों के रमणीय दृश्य दिखाकर मुख्यमंत्रीजी को अँधरे में रखे हुए हैं. हमारे शिक्षा विभाग का बुरा हाल है. हम जहाँ कार्यरत हैं उस जून 2008 में खुली सरकारी विनयन कोलेज शहेरा में जिला कलेक्टरश्री द्वारा 15 एकर जमीन की सिफारिश के बावजूद फाइल महसूल मंत्री श्रीमती आनंदी बहिन पटेल के विभाग में अटकी हुई है. कोलेज में संख्या 600 के करीब हो गयी है कालेज जिस स्कूल में चल रही है वहाँ समाना मुश्किल हो रहा है. जमीन की बात जाने दो तो भी हमारी लिखित माँग के बावज़ूद कालेज के लिए ज़रूरी टीचिंग स्टाफ अभी तक नही मिला है करार आधारित 7 अध्यापक अभी तक नियुक्त हुए हैं 7 की और ज़रूरत है. कोलेज में 2008 में मंजूर महेकम 8 को यथावत रक्खा गया है हमने समय पर ज़रूरी दर्खास्त शिक्षा कमिश्नरश्री की कचहेरी की थी. मेल के द्वारा शिक्षा कमिश्नर,शिक्षा नायब सचिव, शिक्षा सचिव को की थी. कालेज में राज्य की तमाम सरकारी कोलेजों से ऊँचा रिजल्ट आया है कुल 30 फर्स्ट क्लास गुजरात युनिवर्सिटी की परीक्षा में आये हैं. हमारे पास कोलेज में एक भी कंप्यूटर नहीं एक मात्र कमिश्र्नर कचेहरी द्वारा प्रदत्त लेप टाप पर काम करना पड़ता है क्लर्क से लेकर प्रिंसीपली सब उसी पर होती है.
हमारे शिक्षा विभाग के आला अफ्सर मेल ,ब्लाग की दुनियां से अभी अनविज्ञ हैं सिर्फ मक्खन पालिश में उन्हें महारथ हांसिल है. हम जिस राज्य की सबसे बड़ी गुजरात युनिवर्सिटी से जुड़े हैं उसकी वेबसाइट पर विद्यार्थियों के लिए ज़रूरी विविध विषयों का सिलेबस अपडेट नहीं पाँच साल पुराना लगा रक्खा है. कुलपति परिमल त्रिवेदीजी को कौन कहे गुजरात के शिक्षा मंत्रीश्री रमणवोराजी कह सकते हैं पर वे गुजरात युनिवर्सिटी के वेब साइट देखें जब ना. कृपया इस लिंक पर सत्यता की खराई करें.
http://www.gujaratuniversity.org.in/web/WebSyllabus.asp

उपरोक्त दृष्टातों से हमारे पाठक जान ही गये होंगे कि मुख्यमंत्री मोदीजी ने आई.ए.एस. अफ्सरों एवं मत्रियों पर फेलो रखकर लगाम क्यों कसी.अधिकारियों ने दबे स्वर में इसे वाच डॉग की करामात से नवाज़ा है.
मैं राज्य के मुख्यमंत्रीजी की इस शोध और उसे कार्यान्वित करने की पहल का स्वागत करता हूँ वे नवी प्रतिभाओं को राज्य के विकास में अपना योगदान देने के लिए आमंत्रित ही नहीं करते इन तमाम फेलों को राज्य के क्लास वन अधिकारी का दर्जा 35000 रुपये प्रतिमास गाड़ी बंगला,चेम्बर प्रदानकर ज़रूरी इज़्ज़त भी दे रहे हैं ये प्रयोग हालमें एक वर्ष के लिए है. देखे इस लिंक पर.http://www.gujaratcmfellowship.org/
डॉ. सुभाष भदौरिया प्रिंसीपल सरकारी विनयन कोलेज शहेरा. जिल्ला पंचमहाल. ता.09-07-10

4 टिप्‍पणियां:

  1. गुजरात हड़पने की ख़ातिर तुम क्या क्या खेल दिखाये हो,
    दिल्ली भी खिसकने वाली है कुछ होश करो हे बड़बोलो.

    बहुत खूब !! सटीक और तीखी चोट ... सेक्युलरिज्म के नाम पर भारत को उल्लू बनाने वालों और अपना उल्लू सीधा करने वालों के लिए ... लकड़ी की हांडी बार बार आग पर नहीं चढती ,...

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  2. पद्मसिंहजी आपका ब्लाग देखा बहुत आशाजनक लिखते हैं आप.
    क्रांति सुनहरा कल लायेगी.
    संघर्षों का फल लायेगी.

    या लेकिन मैने हार न मानी.
    आपकी कविता में भाषा विषय और छन्द की रवानी विद्यमान है श्रीमान. खास कर माँ कह एक कहानी. राजा था या रानी.
    ये छन्द आपको स्वता सिद्ध है. गद्य पर भी आपकी अच्छी पकड़ है.
    साथ ही दृष्टिवान तो हैं ही आप यूँ ही लिखते रहिए.
    उनकी लकड़ी की हाँडी अब गुजरात में चढ़नेवाली नहीं सो क्या करें बिचारे नक्सलवाद और मंहगाई का हल तो ढ़ढ़ने से रहे हर काम में अड़बंगा लगाना उनकी फ़ितरत बन गई है गुजरात के लोग तो समढ ही गये देश के दूसरे लोग भी रफ़्ता रफ़्ता समझेंगी ही.

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  3. आदरणीय डॉ. सुभाष भदौरिया जी
    नमस्कार !
    संयोग ही कहिए कि मैं आपके ब्लॉग तक पहुंच गया । … और यह संयोग मेरे लिए ईश्वरीय वरदान जैसा है ।
    वाह साहब , क्या लिखते हैं !
    छंद पर आपकी पकड़ देखते ही बनती है ।
    कमेंट मैं अवश्य ताज़ा पोस्ट पर दे रहा हूं , लेकिन आपकी बहुत सारी ग़ज़लें पढ़ी हैं अभी । फॉलोअर भी बना हूं , अतः बार बार आने का सिलसिला बना रहेगा अब ।
    प्रस्तुत रचना कमाल की है …
    शोहराब व इशरत के ग़म में रो-रो के बहाये हो नदियां,
    कश्मीर की सीमा पे निशदिन मरते हैं कभी उन पे रो'लो


    गुजरात हड़पने की ख़ातिर तुम क्या क्या खेल दिखाये हो,
    दिल्ली भी खिसकने वाली है कुछ होश करो हे बड़बोलो

    आमीन !

    … और पिछली ग़ज़ल का मतला … क्या अंदाज़ ! क्या तेवर !

    कभी इसने मारली तो कभी उसने मारली
    लुच्चों ने मेरे मुल्क की चड्डी उतार ली


    सच कहूं तो आपकी लेखनी का भक्त हो गया हूं ।
    शस्वरं पर आपका भी हार्दिक स्वागत है ,आप जैसे गुणी की प्रतिक्रिया मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है । अवश्य पधारिएगा …
    शुभकामनाओं सहित …
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

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  4. बहुत सार्थक लिखते हैं आप, और लगातार गुणवत्ता बनाए हुए हैं। इसी बात ने आप की लेखनी में वो जज़्बा दिया है माँ सरस्वती की कृपा से - जिसे आग कहें या पानी, ताक़त है वो लासानी!

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