रविवार, 7 अगस्त 2011

बिटिया का रचाना ब्याह अभी,बेटे की दुल्हनियां लानी है.

 गुजरात सरकार के चलो तहसील कार्यक्रम के अंतर्गत मंच पर मंत्रीश्री फकीर वाघेलाजी,मंत्रीश्री लीलाधर वाघेलाजी, शहेरा  के विधायक श्री जेठाभाईजी भरवाड,कलेक्टर श्री पंचमहाल श्रीमती मनीशा चंद्राजी,डी.डी.ओ.श्री,जिला पुलिस अधीक्षकश्री एवं अन्य अधिकारी गण श्रीमती एस.जे.दवे स्कूल के प्रांगण में .
मंत्रीश्री फकीर भाई वाघेलाजी,मंत्रीश्री लीलाधर वाघेलाजी,विधायक श्री जेठाभाई भरवाड.कलेक्टर श्रीमती मनीशा चंदाजी,डी.डी.ओश्री,जिला पुलिस अधीक्षक श्री एवं अन्य आला अफ्सर सरकारी आर्टस कोलेज शहेरा के हमारे प्रिंसीपल कक्ष में.

  डॉ.सुभाष भदौरिया यानि हम अपने सरकारी आर्टस कोलेज शहेरा के प्रिंसीपल कक्ष में विचार मग्न.

ग़ज़ल
बिटिया का रचाना ब्याह अभी, बेटे की दुल्हनियां लानी है.
अय मौत ज़रा मोहलत दे हमें, घर की भी किस्त चुकानी है.

हैं दोस्त परेशां सब अपने, करते हैं सभी अफ़्सोस बहुत,
जीवन की कहानी भी अपनी, ये क्या पुरदर्द कहानी है.

फूलों पे महरबां है वो तो, कलियों की सिफ़ारिश करता है,
काँटा वो समझता है हमको, करता अपनी मनमानी है.

तुम लाख बनाओ बाँध मगर तासीर को समझो नादानो,
ठहरा हुआ हमको मत मानो, पर्वत से ये बहता पानी है.

तीरों से बदन छलनी है मगर, हम जंग में आये हैं फिर से,
जीतेंगे किला इक दिन तेरा, दीवाने ने दिल से ठानी है.

तारीख 21-06-2011 के रोज़ गुजरात की उच्च शिक्षा कमिश्नरश्री ने सरकारी आर्टस कोलेज  गाँधीनगर की खाली प्रिंसीपल एवं एन.सी.सी ओफीसर की जगह का चार्ज देने की जगह गुजरात कोमर्स कोलेज अहमदाबाद का चार्ज दिया. जब कि मांग हमारी सरकारी आर्टस कोलेज गाँधीनगर की थी.आर्टस के प्रिंसीपल को कोमर्स का चार्ज देना ऐसा क्यों हुआ इस पर  रिसर्च करने वाले एक मित्र प्रिंसीपल ने हमें बताया कि गाँधीनगर की सरकारी आर्टस सायंस कोलेजें कुमारियों के लिए आरक्षित हैं वहां प्रिंसीपल बनने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के नियम 15 साल का अनुभव और पीएच.डी. की आवश्यकता नहीं है रेग्युलर प्रिंसीपल की जगह इंचार्ज से काम चलाया जा रहा है.पीएच.डी. की डिग्री से कुमारी की डिग्री  बड़ी होती है.
अब हम कुमारी की डिग्री कहां से लायें हे दीनानाथ तुमने हमें कुमार के रूप में क्यों अवतरित किया. मित्र ने कहा कि दीनानाथ की जगह गुजरात के नाथ का जाप करो सुब्ह शाम.शायद उन तक तुम्हारी पुकार पहुँच जाय.

 हमारे लिए आर्टस विभाग और हिन्दी विषय का  अध्यापक होने के कारण गुजरात कोमर्स कोलेज अहमदाबाद में क्या पढाऊँ की समस्या आ गयी. प्रिंसीपल को यू.जी.सी. के नियम के मुताबिक व्याख्यान भी लेने होते हैं.शिक्षा कमिश्नरश्री जयन्ती रवी मैडम ने ये क्यों नहीं सोचा. मैडम को हमें दुख देने में अलौकिक आनंद की प्राप्ति होती है वे चाहती हैं कि हम यूं ही तिल तिल कर घुटते रहें.
मैडम के डर से शहेरा ही रहना पड़ रहा है शनि रवी भी घर पे नहीं जाते हम.
  हमें गुजरात कोमर्स कोलेज में एन.सी.सी मिली तो राष्ट्रभाषा का पढ़ना पढाना छूट गया.
इस घटना का दिमाग के साथ साथ जिस्म पर ऐसा असर हुआ कि लंबी बीमारी ने घेर लिया डॉक्टर ने ब्लड रिपोर्ट से बताया कि रक्त कण कम हो गये हैं. लीवर फेल हो जाने का डर हैं. हार्ट और माइन्ड फेल तो हो ही चुका हमारा अब लीवर फेल होने का ख़तरा मड़रा रहा था ऐसा लगा कि मौत दस्तक दे रही है. राम बोलो भाई राम का कार्यक्रम निकट ही है. ऐसा हमें लगा.
 पर हमारा अभी कुछ जिम्मेदारियों को निभाना बाकी है सो मौत से रिक्वेस्ट की  बहिनजी मकान की सरकारी लोन का चुकाना शेष है फिर अभी बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने में लगे हैं उनका सेट होना बाकी है. कुछ रहम करो गरीब पर. मौत बहिनजी मान गयी.बोली ठीक है बाद में आऊँगी. तब तक तुम कुछ और ग़ज़लें लिख लो. उपरोक्त ग़ज़ल इसी पसमंजर की है जनाब..

सरकारी आर्टस कोलेज शहेरा के साथ 160 किमी.दूर अहमदाबाद की गुजरात कोमर्स कोलेज में भी जाना पड़ता हैं दोनों जगह अभी घुंघरू की तरह बज रहे हैं ,कभी इस पावं में कभी उस पांव में  उससे स्वर्णिम, स्वर्णिम की धुन निकल रही है. जय जय गरवी गुजरात, जय गरवी गुजरात.

  हमें एक जगह रखने की कार्यवाही 6 महीने से चल रही है .सरकारी प्रिंसीपल वर्ग एक के अधिकारी होने के नाते शिक्षा सचिव, राज्य कक्षा के शिक्षा मंत्री फिर केबिनेट कक्षा के शिक्षा मंत्री और अंत में राज्य के मुख्य मंत्री महोदय तक का सफ़र फाइल को तय करना पड़ता है तब जा के कहीं मोक्ष होता है.

आई.ए.एस,आई.पी.एस.अफ़्सरों की फाइल में पहिये लगे होते हैं उनकी फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग तक वायु की गति से भ्रमण करते हुए लक्ष तक पहुँच जाती हैं. पर गरीब प्रिंसीपल भदौरिया पहिए कहां से लगाये बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. बेटी.सी.ए.अहमदाबाद और बेटा गुजरात नेशनल लॉ युनिवर्सिटी पांच वर्ष का कोर्स करने के बाद दिल्ली यू.पी.एस.सी.की तैयारी करने चला गया है सो तनखाह दोनों की  पढाई में ही खर्च हो जाती हैं.  अभी तक हमारे ट्रांसफर की फाइल राज्य कक्षा की शिक्षा मंत्री श्री पास विश्राम कर रही है.उनसे मिल कर प्रार्थना तो की है. देखें क्या होता है.

 खैर हम तो निराश हो कर अपने गाँव शहेरा की सरकारी आर्टस कोलेज आ गये.
 शहेरा आये तो पता चला कि गुजरात राज्य के अभियान चलो तहसील के अंतर्गत  श्रीमती एस.जे दवे स्कूल जहां हमारी सरकारी आर्टस कोलेज जून 2008 से कार्यरत है वहां के प्रांगण में हमारे पंचमहाल जिले के प्रभारी मंत्रीश्री फकीर वाघेलाजी (केबिनेट मंत्री सामाजिक न्याय अधिकारिता एवं सांस्कृतिक विभाग) मंत्रीश्री लीलाधर वाघेलाजी (श्रम एवं रोजगार) शहेरा तहसील क्षेत्र के विधायकश्री भरवाड साहब के साथ साथ जिलाधीश महोदया श्रीमती मनीशा चंद्रा,जिला विकास अधिकारीश्री, जिला पुलिस अधीक्षकश्री एवं तमाम जिला प्रशासन के आला अफ्सर मंच पर मौजूद थे. मंत्रीश्री वाघेलाजी सभी अधिकारियों के पावर पोइन्ट प्रजेन्टेशन को देखने के साथ-साथ तुरंत बारीक समीक्षा भी कर देते थे.
 हमारे पंचमहाल जिले के प्रभारी मंत्रीश्री फकीर वाघेलाजी शहेरा तहसील के सरंपच गण  द्वारा प्रदर्शित पावर पोइंट प्रजेन्टेशन में उनके गांव में किये कार्यों के लेखा जोखा की जांच परख के साथ साथ अपने सुझाव भी गंभीरता से दे रहे थे
साथ ही तमाम की क्लास भी ले रहे थे. मज़ा आ गया. वाघेलाजी ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्रीश्री नरेन्द्रमोदीजी 18 घंटे काम करते हैं और हमसे 16 घंटे काम लेते हैं.
तहसील और जिले के तमाम अधिकारी कर्मचारी लोकसेवक भी अपनी टीम के साथ कार्य करें सभी सरपंच अपने गाँव में तमाम प्रशासकीय योजनाओं का कार्यान्वित करें.गावों के विकास करने से ही गुजरात का विकास संभव होगा.डॉ. बाबा साहब को याद करते हुए उन्होंने ये भी कहा कि अपनों की सेवा करने का मतलब साले बहनोई से न होकर उन दलित,दमित, अधिकारों से वंचित लोगों की सेवा करना हैं. वाघेलाजी ने ये भी बताया कि मैं पिछले 6 टर्म से हूँ कई मुख्य मंत्रियों के साथ कार्य करने का अवसर मिला है पर ऐसे मुख्य मंत्री के साथ न तो भूतो न भविष्यति. रात दिन मेरा गुजरात मेरा गुजरात के विकास की चिंता करते हैं. आप सभी ग्राम के लोग मिलजुल कर कार्य करें.राज्य प्रशासन अब लोगों के बीच खुद चल कर आ गया है लोगों को उस के पास जाने की ज़रूरत नहीं.
फकीर वाघेलाजी गुजरात सरकार के सीनियर और पावरफुल मिनिस्टर माने जाते हैं. किसी को भी खरी खरी कह देते हैं. उन्होंने मंच पर संबोधन करने वाले कई अधिकारियों, सरपंचो को अपने विषय पर ही बात करने के बीच बीच में निर्देश दिये सिर्फ आंकडों का खेल वे नहीं देखना चाहते थे असल में राज्य प्रशासन की योजनाओं का कार्यान्वयन हुआ है या नहीं वे उसकी फलश्रुति चाह रहे थे.
गुजरात के मुख्य मंत्रीश्री नरेन्द्रमोदीजी के नवीनतम अभियानों में से चलो तहसील,सबका साथ सबका विकास इसका नारा है.
ये एक गुजरात राज्य प्रशासन का विशिष्ट अभियान है. राजधानी गांधीनगर के सचिवालयों में बैठकर समस्यायों का निदान करने की जगह लोगों के पास तहसीलों में जाकर  ग्राम समस्याओं का तत्काल निपटारा करना इसका मुख्य हेतु है.

बीच में ब्रेक के दरम्यान हमने मंत्रीश्री फकीर वाघेलाजी एवं मंत्रीश्री लीलाधर वाघेलाजी को स्कूल में चल रही हमारी सरकारी आर्टस कोलेज शहेरा के प्रिंसीपल कार्यालय में आमंत्रित किया तो वे अंदर आ कर चकित रह गये. खास कर आफिस में लगे सी.सी.केमरे एवं तमाम आधुनिक टेक्नोलोजी को देखकर काफ़ी खुश हुए.

 हमने लगे हाथ उन्हें बता दिया कि सर कोलेज को 15 एकर जमीन मिले 6 महीने हो गये बिल्डिंग निर्माण कार्य जल्द शुरू हो ये आवश्यक है छात्र छात्राओं की संख्या 1000 को पार कर गयी है. उन्होंने विधायक श्रीजेठाभाई को निर्देश दिया कि जल्द शिक्षामंत्रीश्री रमणवोराजी का समय ले खातमुहूर्त की कार्यवाही की जाये.

मंत्रीजी कोलेज के रिजल्ट के बारे में जानकर बहुत खुश हुए कि इस वर्ष इस पिछड़े गांव में 80 में से 78 ग्रेज्युट हुए उनमें 9 प्रथम श्रेणी में खास कर छात्राओंने  विशेष बाज़ी मारी.

 मंत्रीश्री कोलेज के नये आये तमाम अध्यापक अध्यापिकाओं से मिले तो उनसे उनकी डिग्री विश्वविद्यालय के बारे में पूछा. अंत में विदा लेते समय बार बार आभार व्यक्त करते देख मैंने  उन्हें कहा सर ये सरकारी कोलेज है आपकी है. आपका स्वागत सत्कार हमारा कर्तव्य है.

वे हमारे प्रिंसीपल कार्यालय में तमाम टेकनोलोजी के साधन वायसेग से ओन लाइन लेक्चर की सुविधा, प्रोजेक्टर,कंप्यूटर,लेपटोप साउन्ड सिस्टम आदि के उपयोग से काफी प्रसन्न हुए.
साथ ही उन्होंने हम से ये भी पूछ लिया तुम पहले कहां थे मैंने कहा सर गुजरात कोलेज अहमदाबाद.वे सब समझ गये
मंत्रीजी फकीर वाघेलाजी के आते ही हमारे प्रिंसीपल कार्यालय में जिले के तमाम आला अफ्सर भी आ गये हम लोग सभी बहुत खुश थे जैसे सरकार हमारे आंगन में आ गयी हो.उन सभी के सत्कार में        जो भी बना किया.ऐसा लगा जैसे ख़ुदा ख़ुद बंदे को पूछ रहा हो तेरी रज़ा (अभिलाषा) क्या है.  हमारी रज़ा बस ज़ल्द से कोलेज के भवन का निर्माण हो सो हमने उनको बता दिया.

 हमारे पास सरकारी आर्टस कोलेज शेहेरा के साथ साथ 160 किमी.दूर अहमदाबाद की गुजरात कोमर्स कोलेज  अहमदाबाद का भी अतिरिक्त चार्ज होने के कारण दोनों जगहों का ध्यान रखना पड़ता है.
दोनों कोलेजों के ध्यान रखने में हम खुद का और  अपने परिवार का ध्यान नहीं रख पाते.काफी समय बीमारी के कारण हम कोई पोस्ट नहीं लिख सके ये हमारी मज़बूरी थी.  हमने ब्लाग पर अपनी दोनों कोलेजों की गतिविधियों खास कर प्रथम वर्ष बी.ए. बी.कोम.के छात्र छात्राओं के स्वागत का स्लाइड-शो लगाया है.
 हम यहां गुजरात कोमर्स कोलेज अहमदाबाद के छात्र-छात्राओं टीचिंग नोन टीचिंग स्टाफ सभी को याद कर रहे हैं उनको ज़्यादा तर फोन पर ही निर्देश देना पड़ता है. कोमर्स के प्राध्यापक श्री प्रवीण पटेल हमारी अनुपस्थिति में बेहतर काम कर रहे हैं हमारा कभी कभार वहां जाना होता है.
 क्योंकि हमारा दाना पानी अभी सरकारी आर्टस कोलेज शहेरा से चल रहा है सो यहां रहना ज़रूरी है क्योंकि पूरा  टीचिंग स्टाफ नया है जो हर साल बदलता रहता है फिक्स तनखाह पर जुलाई से अप्रेल तक अध्यापक आते हैं फिर वेकेशन में हम तन्हा रह जाते है. सरकारी कोलेजों का परमानेंट टीचिंग स्टाफ 10 साल से अहमदाबाद गाँधीनगर में मज़े करता है खास कर महिला अध्यापिकायें 15 साल से एक ही जगह पर कार्यरत हैं उच्चशिक्षा विभाग उन पर महरबां है हमें दो दो जगह रगेड़ने में उन्हें मज़ा आता है हे राम. सो तबीयत का बिगड़ना स्वाभाविक है. ख़ैर हम एक बार फिर अपने प्यारें  दोस्तों और चाहने वालों को अपने होने की शिनाख़्त दे रहे हैं. पर हम अभी अपने दुश्मनों को निराश कर रहे हैं वे कुछ धीरज रखें अभी हमारा इस लोक में दाना पानी शेष है हम ज़िन्दा हैं और अपने पूरे तेवरों के साथ.
डॉ.सुभाष भदौरिया प्रिंसीपल गुजरात शिक्षा सेवा वर्ग-1
सरकारी आर्टस कोलेज शहेरा एवं गुजरात कोमर्स कोलेज अहमदाबाद. ता.07-08-2011.ए






6 टिप्‍पणियां:

  1. बिटिया का रचाना ब्याह अभी, बेटे की दुल्हनियां लानी है.
    अय मौत ज़रा मोहलत दे हमें, घर की भी किस्त चुकानी है.

    इसी मे सारा दर्द सिमट आया है…………।

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  2. तुम लाख बनाओ बाँध मगर तासीर को समझो नादानो,
    ठहरा हुआ हमको मत मानो, पर्वत से ये बहता पानी है.

    बेहद खूबसूरत शेर....

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  3. 1-वंदनाजी दर्द का क्या कहूँ बकौले ग़ालिब
    मेरी किस्मत में ग़म गर इतने थे,
    दिल भी या रब कई दिये होते.
    आपका ब्लाग पर आना सुकून देता है आपके ब्लाग पर जाता हूँ वही संज़ीदगी आपके कलाम में मौज़ूद है् अछान्दस रचनाओ को पढ़ तो लेता हूँ उन पर कुछ कहने की ज़ुर्रत नहीं कर पाता फितरत ही कुछ ऐसी है आप कुछ छन्द बद्ध लिखेंगी तो ज़रूर अपनी टिप्पणी दर्ज़ करूँगा.
    2- डॉ.मिस शरदन जा के जी आप को जो शेर पंसन्द आया उसके लिए आप का शुक्रगुज़ार हूँ.आपके ब्लाग पर आदतन जा कर देखा तो क्या दिलकश तस्वीरें लगा रखी हैं आपने ज़ुहराजबीनों की.
    अच्छी सूरत भी क्या बुरा शै है,
    जिसने डाली बुरी नज़र डाली.
    बहुत कम शब्दों में तस्वीरों के माध्यम से बुहत कुछ कहना कोई आप से सीखे.बयान ज़ारी रखिये.
    हमारी अंजुमन तो दर्द की है यहाँ वाह नहीं आह वाले आते हैं भूले भटके पर आप तो मुसल्सल इस दर्दगाह की ख़बर ले रहीं हैं बकौले शकील बदायूनी-
    मुझे मेरे हाल पे छोड़ दे,तेरा क्या भरोसा है चारागर,
    ये तेरी नवाज़िशे-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे.

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  4. Dear Dr Subhash,

    Nice to hear that u are fit and back to duty. You have capacity to prove how the pen can be mightier than sword.
    All the best for future.
    Dr Kamal chhaya


    2011/8/9 mpshahartssciencecollege surendranagar
    ડો.ભદોરિયા સાહેબ,

    તમારી તબિયત હવે સારી હશે."ચલો તાલુકે "કાર્યક્રમની વિગતો જાણી.સારા ડોક્ટરોને બતાવી સલાહ લેશો.ગઝલમાં તમારી પીડાની અભિવ્યક્તિ તમારા સ્વભાવ મુજબની થઇ છે.

    કુશળતા ઈચ્છતો .

    ડો.એસ.યુ.વોરા
    Dear principal Dr.Chhaya I am agree with you.
    But those are effected party They should change their self. About fucture I can only say
    जब दिल नहीं तो दिल के हवाले ही जायेंगे.
    सूरज अगर गया तो उजाले भी जायेंगे.

    2-आदरणीय प्रिंसीपल डॉ.वोरा साहेब सुरेन्द्रनगर आप की अमूल्य टिप्पणी ज़रूर हमारे काम आयेगी.
    अँधेरों के इस दौर दौर में कहीं कहीं ही दिये टिमटिमा रहे हैं
    राजधानी की रोशनी तो महज छलावा है.
    आप हिन्दी के प्राध्यापक एवं विद्वान है दुश्यन्तकुमार के शब्दों मे कहूँ तो-
    ये रोशनी भी हकीकत में एक छल लोगो.
    जैसे पानी में झलकता हुआ महल लोगो.
    दरख्त हैं तो परिन्दे नज़र नहीं आते,
    जो मुस्तहक़ हैं वही हक़ से बेदखल लोगो.
    आपकी टिप्पणी ब्लाग पर पोस्ट की है आप टिप्पणी बोक्स में भी अपनी राय दें. धन्यवाद सर.

    उत्तर देंहटाएं
  5. સાહેબ
    મજામાં હશો ? તમારી દિલની વેદના અનુભવી.સાહિત્ય મનનો બોજ હળવો કરવામાં મદદરૂપ બને છે . જેટલુ દર્દ વધુ તેટલી ગજલ વધુ સારી.
    હતી એકસરખી જ હાલત અમારી
    મળી ઘર વગરની મને એક બારી
    ભણેલી-ગણેલી મળે લાગણીઓ
    ન સમજી શકે કૈં અભણ આંખ મારી.
    રહસ્યો ખબર છે બધાં ઘરની છતનાં
    નથી કોઈ આકાશની જાણકારી.
    મેં તારી ગલીના ગુનાઓ કર્યા નહીં
    નહીંતર સજાઓ હતી સારી-સારી.
    થયા શું અનુભવ, ટકોરા જ કહેશે
    તને ક્યાં ખબર, બારણાની ખુમારી ?

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  6. શૈલેષ ભાઈ મજા તો ક્યાંથી હોય સાહેબ મારા પણ ખરેખર આજે કોઈ ગુજરાતી અને સરકારી કોલેજના પ્રોફેસર મિત્રે સરેઆમ મારી ખબર પૂછી મને આનંદમા લાઈ દીધો.

    પાછી ગુજરાતી માં સરસ અને પુરદર્દ ગઝલ પણ વંચાઈ
    શું વાત બાપૂ

    હતી એક સરખીજ હાલત અમારી.
    મળી ઘર વગરની મને એક બારી.
    રહસ્યો ખબર છે બધાં ઘરની છતનાં,
    નથી કોઈ આકાશની જાણકારી.
    બધા શેરો ખૂબજ દાદ માગે તેવા છે.
    આપ ઇતિહાસના વિદ્વાન, એન.સી.સી. ઓફીસર, સારા આયોજક બધી વિશેષતાઓ સાથે સારા અને દિલદાર અને જાનિસાર મિત્ર છો.
    આમ ખુલેઆમ મૈત્રીનું એકરાર મારી સાથે કોઈ પણ ભય વગર,ચિંતા વગર ખૂબજ ગમ્યુ.
    હાલમાં શહેરામાં છું મિત્રોની મહક પણ ક્યાથી આવે કારણ કે અમદાબાદ થી કોઈ બસ કે ટ્રેન પણ અહિથી પસાર થતી નથી.
    Again I welcome you my blog dear.thanks for your comment.

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