बुधवार, 3 अक्तूबर 2012

लाज मौला मेरे अब तेरे हाथ है, आँधियों से दिये को बचाओ ज़रा.


ख्वाज़ा गरीब नवाज़ के दरबार में हाज़िरी देते प्रिंसीपल डॉ. सुभाष भदौरिया .
ग़ज़ल

दुश्मनो दुश्मनी तुम करो शौक़ से, दोस्तो दोस्ती तुम निभाओ ज़रा.
जंग मे सर सलामत है अब भी मेरा, चाहने वालो अब, मुस्कराओ ज़रा.

साज़िशें हर तरफ से अँधेरों की है, एक मिट्टी का दीपक जले है अभी,
लाज़ मौला मेरे अब तेरे हाथ है , आँधियों से दिये को बचाओ ज़रा.

रूखी सूखी हमने गुज़ारा किया, आँच ईमां को आने न दी है कभी,
मैं ख़तावार हूँ तो सज़ा दो मुझे, और हक़दार हूँ तो बुलाओ ज़रा.

मेरी परवाज़ गर जाननी हो तुम्हें, मुझको पिंजड़ा नहीं ,मुझको आकाश दो,
मैं गरुड़ हूँ भुंजग है भोजन मेरे, नाग, नागिन को, इतना बताओ ज़रा.

मैं समन्दर की तरह जो ख़ामोश हूँ, तेज़ आसार हैं कोई तूँफा के ये,
दुश्मनो एक ही मौज़ काफी मेरी ,हो सके तो अब ख़ुद को बचाओ ज़रा.


इन दिनों हमने गुजरात की राजधानी गाँधीनगर संयुक्त शिक्षा निदेशक के रूप से ता.03-09-2012 के रोज चार्ज संभाला कार्यालय में काम इतना था कि दिल की बात कहने का मौका ही नहीं मिला. 160 किमी. शहेरा कोलेज की प्रिंसीपली की ड्यूटी मुख्य है.

हमने गुजरात  उच्च शिक्षा विभाग की कमान संभालते ही जो परिवर्तन किये उससे  भृष्टाचारियों की नींद उड़ गयी है वे कोशिश कर रहे हैं कि भदौरिया साहव कायमी जोइन डायरेक्टर हो गये तो उनका क्या होगा. अब गुजरात उच्च शिक्षा विभाग के आदेश मेल से होंगे, नियुक्ति के आदेश हों या बदली के, रूबरू सोफ्टवेर के द्वारा किसी भी प्रिंसीपल को ख़ुद के रूबरू करेंगे.अब सब को अपने हेडक्वाटर पर रहना होगा.

 गुजरात राज्य की भाषा गुजराती कंप्यूटर पर लिखने में भदौरिया साहब को महारथ हांसिल है उनकी जन्मभूमि गुजरात है सो अब नोटिंग से लेकर पोस्टिंग सब खुद ही करेंगे. 
હવે હુક્મો હુક્મોની જેમ કરવામાં આવશે પ્રાધ્યાપક ભાઈ બહેન બધાની બદલિયો થશે. રહી બાત બ્લાગ લખવાની તો ઇશ્વરીય કૃપા છે ગુજરાતી ના ગઝલકાર મર્હૂમ મનોજ ખંડેરિયાએ સાચુ કહ્યુ છે.


ક્ષણોં ને તોડવાબેસું તો વરસોના વરસ લાગે.
બુકાની છોડવા બેસું તો વરસોના વરસ લાગે.

મને સદભાગ્ય કે શબ્દો મળ્યા તારા નગર જાવા,
ચરણ લઈ દોડવા બેસું તો વરસોના વરસ લાગે.


 हमारे साथ  खास बात ये हुई कि जोइन डायरेक्टर की रेग्युलर पोस्टिंग गाँधीनगर न होने से અબ तीन घर हो गये एक अहमदाबाद जहां परिवार रहता है एक शहेरा जहां अब हमारा सामान और यादें रहती हैं और हम गाँधीनगर होस्टेल में .आफिस में रोज सुब्ह 10 से रात्रि के आठ बजते हैं अब उम्र 50 की होने से दृष्टि पर असर पड़ा है रात्रि मे कार खुद चलाकर आने में शहीद होने का खतरा है. बेटा-बेटी अपने केरियर के अंतिम पड़ाव पर हैं सो हमें शहीद होने की इतनी ज़ल्दी नहीं. बाकी जीने में रखा क्या है.

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी के विकास मंत्र न खाता हूँ न खाने देता हूँ को भदौरियाजी सख्ती से अमल करेंगे. 

हमारी जंग अँधेरों के खिलाफ हैं हम रोशनी के तलबगार हैं और मुहाफ़िज़ भी. कुछ दिनो पहले हमने  पंचमहाल जिले के पावागढ़ वाली कालीमां के दर्शन और आशीर्वाद के लिए कोलेज के 200 छात्रों से साथ जाना हुआ. पावागढ़वाली मां ने आशीर्वाद दिया बेटा शिक्षा जगत में व्याप्त असुरों का नाश करो वे साधुरूपी अध्यापकों को सताते हैं. पीएच.डी. अंग्रिम, मध्यम, सभी इज़ाफों की रिकवरी ले रहे हैं. जब कि यू.जी.सी. रिसर्च करने के लिए अध्यापकों को प्रोत्साहित करती है और अनुदान भी देती है.

पर बाबूलोगों से अध्यापकों का उच्च वेतनमान सहन नहीं होता. बिचारे कोलेज के अध्यापक वेतन पर ही जीते है. टूशन पर गुजरात में प्रतिबंध हैं. भदौरिया साहब आये हैं उन्हें ज़िदगी पर गुजरात शिक्षा विभाग ने हैरान किया अब भी परेशान हैं जोइन डायरेक्टर बनने के बाद भी सिलेक्शन ग्रेड अटका हुआ हैं. लीलाधारियों की लीला है.

 सब कहते हैं गुजरात शिक्षा विभाग में करप्शन को प्रोत्साहित करने वाली एक टीम रात दिन लगी हुई हैं किसी भृष्ट एवं अक्षम अधिकारी को जोइन डायरेक्टर के पद पर लाया जाय तभी लेती देती के खेल चालु रह सकते हैं. 

भदौरिया साहब एन.सी.सी.से आये हैं एक गोली एक दुश्मन वाले हैं. आने के साथ  उन्होंने शिक्षा जगत के  कई नामी,गिरामी, के एन्काउन्टर कर डाले. आगे  अगर जोइन डायरेक्टर के पद पर रहे  तो गुजरात शिक्षा जगत में साफ सूफी निश्चित है.

 सो कई नामी गिरामी अब उनके एनकाउन्टर करने की कोशिश में हैं. पूरे गुजरात का शिक्षा विभाग खास कर सरकारी अध्यापक विद्यार्थी गण इस घटना पर नज़र रखे हुए है परिणाम क्या आता है.

उपरोक्त  हमारी तस्वीर अज़मेर शरीफ के बाबा के दरबार में हाज़िरी की है. पीर औलिया सब के होते हैं.
 हमारी लाज़ अब ग़रीब नवाज़ के हाथ है. देखना ये भी है कि गुजरात राज्य के सुप्रिम कमान्डर मोदीजी की सद्भभावना किस तरफ हैं. ये उनकी भी इम्तहान की घड़ी है. गुजरात में चुनाव से पूर्व निर्णय हो पाता है कि नहीं. आई.एस.अफ्सरों की फाइलों मे पहिए लगे होते हैं वे एक विभाग से दूसरे विभाग तक बड़ी स्पीड से जाती हैं. पर गरीब मास्टर की फाइल में  पहिए कहां सो मामला लटक भी सकता है.  चुनाव आचार संहिता गुजरात में  कभी भी लग सकती है. फिर राम बोलो भाई राम हो जायेगा. 

रही बात अपनी सो संतों को क्या सीकरी से काम चाहे राजधानी गाँधीनगर रहें कि पिछडे़ गाँव शहेरा. 

पर अँधेरों और रोशनी के बीच की इस जंग में जीत रोशनी को हो  सब ऐसी दुआ करें. हमारी अपने गुजरात के अध्यापकों, विद्यार्थीयों और नागरिकों से यही अपील है. जय जय गरवी गुजरात. 

हम एक बार फिर अपने दोस्तों दुश्मनों को अपने होने की शिनाख़्त दे रहे हैं कि हम अभी ज़िन्दा हैं और अपने पूरे तेवरों के साथ.

डॉ.सुभाष भदौरिया
संयुक्त  उच्च शिक्षा निदेशक (कार्यवाहक) गुजरात राज्य.
गाँधीनगर ता.03-10-2012 प्राता-7.30


3 टिप्‍पणियां:

  1. May god give you long life to fight against evils of society. If you give a call, you will not find you alone in this game. As a principal, I take note that fresh appointment as per new establishment could not have been possible unless you have not taken pain and work like a war. Let more good work come from you. All the best.

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  2. May god give u long life and more strength to fight with evils of society in this spirit. Recent appointment could not be possible unless ur work work with dedication was not there.

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  3. साहब, आपकी गज़ल पढकर खुश हुआ हूं. काफी दिनो के बाद ब्लोग पर मुलाकात हुइ. आपकी गज़लो का मैं पहलेसे ही मुग्द रहा हुं. आपको अनेक अनेक शुभकामनाए.

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