शुक्रवार, 24 मई 2013

उसने तो बिछुड़ते दम, रो-रो के कहा मुझसे.




ग़ज़ल

आहों में बसा रखना, आँखों  में छुपा रखना.
तस्वीर तेरी हरदम, सीने से लगा रखना.

उसने तो बिछुड़ते दम, रो-रो के कहा मुझसे,
होटों पे हमेशा तुम, मिलने की दुआ रखना.

दे- दे के लहू अपना, तपते हुए सहरा में,
यादों का तेरा बिरवा, हर वक्त हरा रखना.

किस वक्त वो आ जाये, किस मोड़ वो मिल जाये,
उम्मीद का दरवाजा हर वक्त, खुला रखना.

शुहरत भी तुम्हीं ले लो, दौलत भी तुम्हीं ले, लो,
हिस्से में मेरे लेकिन महबूबे-वफ़ा रखना.

डॉ. सुभाष भदौरिया.


4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति .आभार . कुपोषण और आमिर खान -बाँट रहे अधूरा ज्ञान
    साथ ही जानिए संपत्ति के अधिकार का इतिहास संपत्ति का अधिकार -3महिलाओं के लिए अनोखी शुरुआत आज ही जुड़ेंWOMAN ABOUT MAN

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  2. वाह वाह क्या बात है नायाब

    उसने तो बिछुड़ते दम, रो-रो के कहा मुझसे,
    होटों पे हमेशा तुम, मिलने की दुआ रखना.

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  3. किस वक्त वो आ जाये, किस मोड़ वो मिल जाये,
    उम्मीद का दरवाजा हर वक्त, खुला रखना.
    बहुत शानदार गज़ल का एक कामयाब शेर

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