गुरुवार, 8 नवंबर 2007

फिर से फ़ौजों को दोबारा भेजो .




उपरोक्त तस्वीर पाकिस्तान के सेनापति की है.
ग़ज़ल

हाय ! अपनो पे सितम ढाये है .
कत्ल करके वो मुस्कराये है.

अपनी कुर्षी की फ़िक्र है उसको,
मुल्क को ख़तरा है बताये है .

घर जलाने का शौक़ है उसको,
अब तो अपना भी घर जलाये है.

जिसकी ख़ैरात पर वो ज़िन्दा है,
उसके पीछे तो दुम हिलाये है .

लाठियाँ बेबसों पे बरसे हैं ,
खूँन आँखों में छलकजाये है.

फिर से फ़ौजों को दोबारा भेजो,
सरहदों से सदा ये आये है .


. सुभाष भदौरिया,अहमदाबाद ता.9-11-07 समय-12.20 AM






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