शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

सर हमारा तो अभी बाकी है.

ग़ज़ल

हाथ काटे हैं ज़बां काटी है.

सर हमारा तो अभी बाकी है.

एक चिड़िया की तो हिम्मत देखो,

तोप पर बैठी गुनगनाती है.

लोग दातों में उँगलियाँ दाबें,

तीर उसके तो अपनी छाती है.

देख अपनी अदा पे मत इतरा,

अपना दिल भी ये ख़ुरापाती है.

दूर फेंका है शहर से उसने,

तेरी खुश्बू अभी तो आती है.

लोग कहते थे सच को मत कहना,

सच के कहने में जाँ ये जाती है.

सच को कहने की अपनी आदत है,

और आदत ये कहाँ जाती है.

अपने चाहने वालों और जलने वालों मे एक बड़ी खुशी बाँटना चाहता हूँ. ता.27-01-2010 के रोज गुजरात सरकार की आलाकमान आफिस गाँधीनगर से मोबाइल पर फोन आया. आप सुभाषजी हैं. मैने कहाँ जी हाँ उधर से आवाज़ आयी सी.एम. साहब के ओ.एस.डी. साहब बात करना चाहते हैं. मैनें कहा कराइए. फिर तफ्तीश हुई बड़ी मधुर आवाज़ में फिर पूछा गया आप सुभाषजी हैं. मैंने कहा जी. उन्होनें फ़र्माया सी.एम.सर का ओ.एस.डी बात कर रहा हूँ. सी.एम. सर ने आपके ब्लाग को देखा है आपको बधाई दी है.

गुजरात राज्य के अत्यंत व्यस्त दिनचर्या वाले मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्रमोदीजी हमारे ब्लाग को देखकर हमें सी.एम. ओफिस से बधाई दिला रहे हैं.

मैं इतना खुश की आँखें छलछला आयीं ज़ल्दी से खुद को सँभाला,मन में सोचा बहुत देर की महरबां आते आते. बात कुछ यूँ हुई हमने अपने ब्लाग पर स्वर्णिम गुजरात की उपलब्धियों पर एक स्लाइड शो तैयार कर लगाया है जो हमारी अहमदाबाद में हुई प्रिंसीपल ट्रेनिंग का एक हिस्सा था.

अहमदाबाद पत्नी को घटना का ज़िक्र किया तो उसने झट से कहा अरे तुम्हें किसी ने बेवकूफ बनाया होगा.

बेटे को कहा तो उसने अपनी बहिन को कहां सी.एम. सर मोदीजी ने ब्लाग के लिए पापा को बधाई दी वो और भी हँस दी कोई माना ही नहीं.

घर पर अहमदाबाद में सब हँसे तो सोचा पाठकों को भी बता दूँ वे भी हम पर हँस लें.

पर ये सच है. मैं अक्सर अपने राज्य के मुख्यमंत्री मोदीजी के ब्लाग हिन्दी गुजराती संस्कृत, मराठी,अँग्रेजी भाषा में लिखे ब्लाग http://www.narendramodi.in/ पर जा कर गुजरात के हालात का ज़ाइज़ा लिया करता हूँ और अपने वहाँ विचार व्यक्त करता हूँ. पर जब उनके ख़ास आफीसर द्वारा बधाई संदेश मिला तो थोड़ी शर्म भी महसूस हुई कि हमने जोहराज़बीनों की तस्वीरों पर जो ग़ज़लें कहीं मुख्यमंत्रीजी हमारी लीला पर क्या सोचते होंगे.

पर याद आया हमारे मुख्यमंत्रजी गुजराती ग़ज़ल के 100 वर्ष पुराने इतिहास को जानते हैं गुजराती ग़ज़ल एकेडमी उन्हीं की देन है, वैसे सब को पता है ग़ज़ल का मतलब है औरतों से गुफ़्तगू करना, इश्किया अशआर कहना. मैंने सोचा था आक्रमक ग़ज़लें तो बहुत कहीं इस चाहत के रंग को भी देखूँ.

पर जब देश के नंबर 1मुख्यमंत्री मानेजाने श्रीनरेन्द्रमोदीजी हमारे ब्लाग पर ही गये आ तो एक बार हम फिर से अपने पुराने तेवरों में लौट रहे हैं.

ग़मेजाना तो हम से बहुत हो गया,ग़मे दौरा का दुबारा हम रुख़ करते हैं. यहाँ कि तल्ख़ियाँ हमारी भाषा को तल्ख बनायेंगी हमें पता है लबों का सीरीपन यहां मुश्किल होगा. उपरोक्त ग़ज़ल और हमारी ताज़ा तस्वीर का हमारे चाहने वाले लुत्फ़ उठायें जलने वाले जलें आमीन.

डॉ. सुभाष भदौरिया, ता.05-02-10

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बधाई आपको.

    आपकी ग़ज़ल मुझे विशेष पसंद आई है. जानदार शेरो के लिए बधाई.

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  2. क चिड़िया की तो हिम्मत देखो,

    तोप पर बैठी गुनगनाती है.

    दूर फेंका है शहर से उसने,

    तेरी खुश्बू अभी तो आती है



    सुभाष जी ऐसे कद्दावर शेर कहना आपके बस की ही बात है...क्या खूब ग़ज़ल कही है भाई वाह...मोदी जी महान हैं जो ब्लॉग भी पढ़ते हैं...इतना वक्त कैसे निकाल लेते हैं ये शोध का विषय है...लिखते रहिये...आपका लिखा पढ़ कर हमेशा अच्छा लगता है...

    अभी तो आपकी छवि और ग़ज़ल को देख खुश हो रहे हैं...बाद में जलेंगे...की हा हुसैन हम ऐसे क्यूँ न हुए...

    नीरज

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  3. subhash ji badhayi.........chalo blogger biradri mein koi to huaa jise CM ne badhayi di..........sachmuch bahut hi garv aur khushi ki baat hai.

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  4. हम तो जल कर कबाब हो गए हाय :?)

    गजल बहुत पसंद आयी

    आभार

    वीनस केशरी

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  5. आपकी गजल बहुत सुन्दर है!
    यह चर्चा मंच में भी चर्चित है!
    http://charchamanch.blogspot.com/2010/02/blog-post_5547.html

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  6. 1-सुलभजी आपके रंग कर्मी ब्लॉग को देखा वहां विस्तृत टिप्पणी की है.आपकी बधाई क़बूल.
    2-नीरजजी आपने अपने ब्लाग ज्ञान का अतुल भंडार बना रक्खा हैं. खा़सकर ग़ज़लों के पंसन्ददीदा दीवान और उनकी जानकारी ब्लाग के पाठकों के मानसिक स्तर को ऊँचा उठायेगी जो आजा फँसाजा के खेल में लगे हैं उन्हें आपके ब्लाग पर जाकर कुछ पढ़ने ,सुनने की ज़रूरत है.आपको इन तमाम शख्सियत से आमोखा़स को वाकिफ़ कराने के लिए दिली मुबारकवाद देता हूँ.आप ग़ज़लों के इल्म के साथ व्यंग्य विधा पर भी अपना अच्छा दखल रखते हैं.आप बहुत ज़हीन पढ़ने लिखने वाले हमारे पाठकों में एक हैं.हम आपकी बातों को हमेंशा सज़ीदगी से लेते हैं.आपका ब्लाग पर आना सुकून देता है.
    3-वंदनाजी गुजरात सरकार में कार्यरत हूँ.हमने कई बार अपने ब्लाग द्वारा अपने राज्य के सी.एम. सर का खासकर उच्चशिक्षाविभाग में चल रही अनियमिताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है. सबसे बेहतर परिणाम के रूप में हमारे जैसे 25 सीनियर सरकारी अध्यापकों का सी.एम.सर द्वारा क्लास वन प्रिंसीपल के रूप में प्रमोशन. वो बहुत पढ़ने लिखने वाले व्यक्तिओं में से हैं.उन्होंने पढ़े गुजरात का अभियान चला रक्खा है इस पर कभी विस्तृत बात करूँगा. ब्लाग मेरे लिए मनोरंजन और दिल की भड़ास निकालने का साधन नहीं मैं इसका दिमागीय अत्याधुनिक हथियार के रूपमें इस्तेमाल करता हूँ.हुकूमत को अगर हमारा अंदाज पसन्द आये तो सचमुच गौरव की और खुशी की बात है.
    4.वीनस तुम बहुत ही होनहार,जिज्ञासु, ग़ज़ल के शिल्प एवं भाषा को समझने वाले हमारे पाठक हो.तुम्हारे ब्लाग पर लगे थर्मोकोल के माडल तुम्हारी रचना धर्मिता एवं सूझबूझ के परिचायक हैं. मुझे भाषा के बारे में जब भी आगाह करते हो अच्छा लगता है.लीक से हटकर चलने के ख़तरे हैं कदमों के साथ भाषा का लड़खड़ाना स्वाभाविक है.
    जान लेवा इन हालात में मुलायम भाषा नहीं सख्त तल्ख भाषा ही वक्त के काम आयेगी. आज बहुत दिनों के बाद तुम्हारा आना बहुत ही अच्छा लगा. शायद रूठ गये थे.तुममें बहुत संभावनायें छुपी हैं वीनस अपने को सँभालें रहना. आमीन.
    5.आदरणीय शास्त्रीजी हमने तो सोचा था हमारे इस दुनियाँ में न होने के बाद ही हमारी ग़ज़लों की चर्चा होगी.
    ग़ज़ल के ढ़ोगी गुरू आत्म मुग्ध हैं चेले चेलियों की संख्या बढ़ाने में लगे हैं.ग़ज़ल उनके लिए अर्थोउपार्जन और अपने अधकचरे ज्ञान का ठप्पा लगाने का ज़रिया हैं.नई नस्ल को अपने ज्ञान के आंतक से बाहर निकलने ही नहीं देते. चेल ग़ज़ल बाद में लिखते हैं गुरु महिमा का आलाप पहले.
    6- हमारा हाल ऐसा है कि कोई दोस्त जब चिड़कर अपनी भड़ास निकालने के लिए हमें गुरु कहता हैं हम समझ जाते हैं कहीं हमसे भारी ग़लती हुई तभी ये गाली हमें मिली.
    गुरु के मानी अब बदल गये हैं.गुरु का मतलब है जो जितना पाखंड करे,माया जाल रचे.शि्ष्यों का मानसिक, आर्थिक शोषड़ करे वही महान.हमारे गुरु भी ऐसे ही कपटी कामी,पक्षपाती रहे सो हमें इस शब्द से भारी चिंड़ है. एक बात और ये अपने शि्ष्यों को स्वता मार्ग चुनने का अवसर ही नहीं देते. इनके चेले भी मन में राम बगल में छुरी वाले वे अंदर से भारी नाराज़ पर ऊपर से खींसें निपोरते हैं.
    आपने हमारी ग़ज़ल की चर्चा कर हमें जो जीते जी इज़्ज़त बख्शी उसके लिए हम आपके आभारी हैं. आपके दिये लिंक को देख लिया श्रीमान धन्यवाद.

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