बुधवार, 27 अक्तूबर 2010

गाँधीजी ने मेरे सपने में ग़ज़ल कही.


गाँधीजी ने मेरे सपने में ग़ज़ल कही. .
ग़ज़ल
सच को सूली चढ़ाया गया.
झूठ सर पर बिठाया गया.

राष्ट्रभाषा को बनवास है,
तूते-इंगलिश चलाया गया.

गुर्जरी रो रही रात दिन,
अपने घर से उठाया गया.

ताक पर रख दिये सब उसूल,
मेरा मंदिर बनाया गया.

मैं समाधि में था चैन से,
ठोकरों से जगाया गया.

तख़्त और ताज़ के वास्ते ,
मेरा सिक्का चलाया गया.

आँख तो रो रही है मेरी,
जुल्म कैसा ये ढाया गया.

हिन्दी, उर्दू हो या गुर्जरी,
खूँन सबका बहाया गया.


कल रात मेरे सपने मैं देश के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधीजी आ गये उन्होंने ही ये ग़ज़ल मुझे सुनाई पर इससे पूर्व जो संवाद हुए यहाँ दृष्टव्य हैं.
राष्ट्रपिता गाँधीजी की निराश स्याह प्रतिमा ने मेरे सर पर हाथ रखते हुए कहा- जाग रहे हो बेटा मैंने कहा बापू आप यहाँ कैसे वे बोले बेटा तेरा ब्लाग पढ़ा ख़ास कर वो तेरी -
ग़ज़ल के शेर मुझे तेरे पास खींच लाये क्या लिखा है बेटा--
उर्दू का सफाया कर डाला हिन्दी को घर से निकाले हैं.
गुजरात में हम गुजराती को मुश्किल से अब तो सँभाले हैं.
गाँधी का वो मंदिर बनवायें अब गाँधीनगर में क्या कहने,
बापू के उसूलों पे चलने में पाँव में पड़ते छाले हैं.

बेटा जिस हिन्दी के लिए मैंने गुजरात विद्यापीठ की स्थापना की उसे देश में जन जन तक पहुँचाया वही हिन्दी भाषा अब गुजरात की स्कूलों से कक्षा 10 और कक्षा 12 से अनिवार्य भाषा के रूप में निष्काषित की जा चुकी है और तो और अपने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्रभाई के विधानसभा क्षेत्र की श्री के.का.शास्त्री आर्टस कॉलेज से भी गायब है. क्या कहूँ बेटा कुछ कहा नहीं जाता.
पर बापू मुख्यमंत्री मोदीजी का ब्लाग आपने नहीं पढ़ा वे तो हिन्दी गुजराती अँग्रेजी, संस्कृत एवं तमाम भारतीय भाषाओं में लिखते हैं,
बापू ने बीच में ही टोकते हुए कहा बेटा मोदीजी को हिन्दी गुजराती में ब्लाग लिखने की फुर्सत कहाँ ये तो दूसरे लिखते हैं वे तो सिर्फ गाइड करते हैं.
पर बापू वे बहुत ही उच्चकोटि की हिन्दी बोलते हैं. बापू बोले सही है बेटा पर
मैंने कहा बापू उनके राज में हिन्दी को ख़त्म कर के स्कोप के द्वारा हर गुजराती के अंग्रेजी ज्ञान को बढ़ाने की योजना है.जिससे हर गुजराती दुनियाँ में सर उठा सके.
बापू ने कहा ये सच नहीं है बेटा मेरी अँग्रेजी क्या कमजोर थी. गुजराती अपना सर राष्ट्रभाषा हिन्दी के माध्यम से उँचा रखते आये हैं गुजराती कवि दयाराम ही नहीं उर्दू के प्रथम कवि वली अहमदाबादी भी तो गुजरात के थे और तो और तेरी जन्मभूमि तो अहमदाबाद है तूने किस के सामने आज तक सर झुकाया दुख सहे पर टूटा नहीं मेरा दीकरा.
ये तो दक्षिण के आई.ए.एस.अफ्सरों का फार्मूला है वे गुजरात राज्य में अंग्रेजी लेब खुलवा कंप्यूटर बिचवाकर कमाई कर रहे हैं. अपने नरेन्द्रभाई उनके प्रभाव में हैं बेटा.
मैनें कहा पर बापू मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी आपका गाँधीनगर में करोड़ों के खर्च में महात्मा मंदिर बना रहे हैं अडवाणीजी ने अपने ब्लाग पर इसकी खूब प्रशंसा की है आप इस गांधीनगर में महात्मा मन्दिर Sri LK Advani's Blogलिंक पर देख लेना.
वे बोले बेटा इसी का तो दुख है अपने नरेन्द्रभाई मेरा गाँधीनगर मंदिर बनाते है और राष्ट्रभाषा हिन्दी को गुजरात से स्कूल से निकाल रहे हैं. फिर बापू ने मुझे उपरोक्त ग़ज़ल सुनाई और उसे तुरंत पोस्ट करने को कहा.मैं दंग रह गया. बापू को गुजरात की अभी भी चिन्ता है.
मैंने कहा बापू मैं आपको चाय भी नहीं पिला सकता. चाय की दुकान पर जाना पड़ेगा.
अध्यापक से क्लास वन प्रिंसीपल का प्रमोशन देकर मुख्यमंत्री मोदीजी ने ऐसे शहरा गाँव में पटका कि हमारा बुढ़ापा बिगड़ गया. हर शनिवार शहरा हाट में बकरा,मुर्गा हलाल होते हैं गोधरा से खरीददार आते हैं. पर बापू मैं ये सब नहीं खाता. गाँव में एक भी शाकाहारी होटल नहीं. कोलेज से आने के बाद एक टाइम खुद ही पकाता हूँ तब खाता हूँ. मेरी पत्नी और बेटी अहमदाबाद,बेटा गुजरात नेशनल लॉ युनिवर्सिटी गांधीनगर मैं शहरा में. पत्नी कहती है बेटी की सी.ए. की पढाई पाँच साल में अहमदाबाद पूरी हो जायेगी तब आपके साथ रहूँगी.
बापू बोले तभी तू बहुत दुबला हो गया बेटा पर तेरे चेहरे पे तेज बहुत है मैंने शर्माते हुए कहा बापू ये तो मैं बह्मचर्य का पालन करता हूँ उसका है.
वे बोले क्यों बेटा शनि रवी अहमदाबाद घर नहीं जाते तुम तो प्रिंसीपल हो छुट्टी मार सकते हो.मैंने कहा बापू नहीं जा सकता कोलेज में 600 विद्यार्थी 15 की जगह 8 अध्यापक हैं. शिक्षा कमिश्नर एवं शिक्षा सचिव मुख्यमंत्रीजी को कई गुजराती में मेल किये पर अभी तक कुछ नहीं हुआ. ज़रूरी अध्यापकों के बिना उनकी पढ़ाई बड़ी मुश्किल से हो रही है. वे दूसरी तरफ 30-10-2010 को एक साथे वांचे गुजरात का एलान कर रहे हैं हमारे कोलेज में आंतरिक परीरक्षा चल रही हैं. छात्र 6 महीने से अध्यापकों की मांग कर रहे हैं उनका कोर्स ज़रूरी अध्यापकों के अभाव में कैसे पूरा होगा .ये तो कोलेज का स्टाफ अच्छा है दो का काम एक कर रहा है.. कोलेज नई खुली है जमीन मिलनी बाकी है कोलेज में एक भी कंप्यूटर नहीं अनेक बार माँगा पर अभी तक नहीं मिला बापू बहुत टेंसन रहता है.कोलेज के छात्र हड़ताल करेंगे तब वे सुनेंगे.
बापू बोले पर शिक्षा सचिव हसमुख अडिया तो गुजराती आई.ए.एस. अफ्सर हैं वे नहीं सुनते.
मैंने कहा नहीं.
बापू हम बीस लोगों को 13 नवम्बर 2009 को अध्यापक से क्लास वन प्रिंसीपल का का शिक्षा सचिव अडियाजी ने प्रमोशन दिया पर एक बार भी उन्होंने मीटिंग नहीं ली. वे बोले शिक्षामंत्री रमणभाई भी कुछ नहीं करते.
मैनें कहा बापू उनका मत पूछो अहमदाबाद, राजकोट,जामनगर,जूनागढ, सभी कुमारी अध्यापिकाओं को प्रिंसीपल के रूप में दिये गये. फाइल पर शिक्षा सचिव, शिक्षामंत्री, और अंत में मुख्यमंत्री मोदीजी की सही के बाद कुमारियों की तो किस्मत चमकी पर हमारे जैसे शहीद हो गये.
हमें तो अहमदाबाद से निष्काषित कर हमारी एन.सी.सी. की राष्ट्रसेवा भी छीनली.

बापू बोले हे राम-हे राम नरेन्दभाई ने प्रमोशन की फाइल ध्यान से नहीं देखी तभी एक ही जगह 15 साल से कार्यरत कर्मचारियों को उसी जगह प्रमोशन देकर जी.ए.डी. के नियमों का सरे आम भंग हुआ. क्या हो रहा है मेरे गुजरात में हे ---राम हे ----राम
और तो और बापू गाँधीनगर सरकारी आर्टस कोलेज में एक कुमारी बहिन न तो पीएच.डी.हैं और न 15 साल का अनुभव फिर भी एक साल से इंचार्ज प्रिंसीपल के रूपमें कार्यरत हैं. बापू हमें पता नहीं था कि कुमारी की डिग्री पीएच.डी.की डिग्री से बड़ी है. हमारा अगली बार जब गुजरात में जन्म हो तो कुआँरी के रूप में. इस बार हे ---राम हमने कहां.
बापू मंद मंद मुस्कराते बोले बोले बेटा तभी तुम अपनी ग़जलो में कुमारियों के बहुत सुन्दर फोटो लगाते हो. मैंने शरमाते हुए कहा बापू ए तो परिवार से दूर हूँ न इसलिए सब याद आता है—वे बोले मैं तुम्हारी पीड़ा समझता हूँ बेटा .मैंने कहा पर मुख्यमंत्री मोदीजी नहीं समझते बापू वे कुमारियों की पीड़ा तो समझते हैं तभी उनको बड़े शहरों में रखा है और हमें बाल बच्चों से अलग कर दिया गया हे राम..
गाँधी बापू गंभीर हो गये फिर उन्होंने कहां कि बेटा तुम एक बकरी रख लो. मैने कहा बापू कोलेज के छात्र छात्रायें हँसेगे हमारे प्रिंसीपल भदौरिया साहब ने बकरी रखी और घर अहमदाबाद पत्नी और बेटा बेटी अलग बवाल करेंगे.
मैनें कहा बापू आप मुख्यमंत्री मोदीजी के सपने में जाओ उन्हें कुछ कहो- वे भड़क गये.
न बापा नरेन्द्रभाई की सिक्युरिटी बहुत सख्त कोई सपने में भी नहीं जा सकता. गार्ड मुझे सी.बी.आई.वाला समझ के भूल से एनकाउन्टर कर दें तो .
मैनें कहा बापू एनकाउन्टर स्पेशालिस्ट तो सारे जेल में हैं. अपने जेल मंत्री अमित भाई शाह भी जेल में हैं अभी खतरा नहीं है बापू. वे सब वाँचे गुजरात में व्यस्त हैं.
बापू गुजराती में बोले दीकरा तू मने नरेन्द्रभाई ना सपनामां मोकली क्यां फरी भेखड़े भरावे छे. तू मुझे फिर से शहीद करवाना चाहता है. मैं उनके सपने में नहीं जाने वाला.
गाँधी बापू बोले अच्छा बेटा अब मैं जाता हूँ बिहार जाना है.
मैने कहा बापू बिहार में क्यों जा रहे हैं वे बोले नितीश कुमार मेरा चेला है उसको मिलना है
मैंने कहा बापू धीमें बोलो मुख्यमंत्री मोदी जी को पता चला तो आपका गाँधीनगर में करोड़ों के खर्च से बन रहा मंदिर अटक जायेगा.
बापू बोले मेरा मंदिर अटक जाये चाहे गोडसे का बने मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. जब राष्ट्रभाषा हिन्दी को गुजरात से निकाल दिया गया तो मैं क्या करूं यहाँ रह के सब मेरा इस्तेमाल करते हैं पर मेरी बात कोई नहीं मानता.
वे दुखी हो कर चल दिये मैं उन्हें आवजो भी नहीं कह सका.
इतनें में शहेरा गाँव की मस्ज़िद से अजान की आवाज़ आयी और मेरी आँख खुल गयी सुब्ह कोलेज भी जल्दी जाना था कोलेज में अभी आंतरिक परीक्षा चल रहीं हैं.पर
जल्दी से सपने में बापू द्वारा कही गयी ग़ज़ल और बातचीत कागज़ पर उतार ली. जो आप सभी पाठकों की नज़र है.
डॉ.एस.बी. भदौरिया प्रिंसीपल
सरकारी आर्टस कोलेज शहेरा जिला पंचमहाल गुजरात
ता.27-10-2010 मोबा.97249 49570.





4 टिप्‍पणियां:

  1. मैं समाधि में था चैन से,
    ठोकरों से जगाया गया.

    सुभाष जी इस शेर के माध्यम से आपने गाँधी जी की सारी व्यथा व्यक्त कर दी है...कमाल की गज़ल कही है...लाजवाब.
    आपने राष्ट्र भाषा हिंदी के साथ साथ अपनी वेदना भी गाँधी जी के माध्यम से हम सब तक पहुंचाई है...मन दुखी हो गया है...ऐसा सब क्यूँ हो रहा है...मेरी गज़ल का एक शेर है शायद आपको पसंद आये:-
    सबूत लाख करो पेश बेगुनाही का
    शरीफ शख्स को मिलती सदा सज़ाएँ हैं

    कामना करता हूँ के इस बार दिवाली आप अपने परिवार जन के साथ खूब धूमधाम से मनाएं और शीघ्र ही अहमदाबाद स्थानातरित हो जाएँ.

    नीरज

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  2. क्या आपके द्वारा गाँधीजी की कही गई यह व्यथा या गाँधीजी के माध्यम से कही गई आपकी यंत्रणा को यहाँ का प्रशासन समझ सकता है? कतई नहीं। आधारिक संरचना का विकास करते-करते नंबर 1 पहुँचा प्रशासन अपनी संवेदनाएँ खो चूका है।

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  3. वाह ! आज की गजल में बहुत बडी बात की है सर आपने, अब तो हमारी मातृभाषा का भी हिन्दी जैसा हाल होनेवाला है । आपका आवाज गाँधीजी ने सूना लेकिन गाँधी के नगर में रहनेवाले शिक्षा विभाग अब तक आपकी वेदना समज नही सकता ।

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  4. kay bat hai sarji apne to har taraf dhoom machadi

    ashish

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