गुरुवार, 19 नवंबर 2009

सरकारी अध्यापकों का दुख दूर करते मुख्यमंत्री नरेन्द्रमोदीजी.

सरकारी अध्यापकों के दुख दूर करते मुख्यमंत्री नरेन्द्रमोदीजी
कृपया फोटो पर क्लिक कर स्पष्ट लिखा देखें.राज्य के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्रमोदीजी ने ता.13-11-09 के रोज सरकारी कोलेजों में वर्षो से रिक्त प्रिंसीपल के पदों पर 25 सरकारी अध्यापकों को प्रमोशन देकर निहाल कर दिया. गरीब का नंबर 19वां था. मोदीजी की लोकप्रिय हिन्दी,गुजराती,संस्कृत,अंग्रेजी भाषा में कार्यरत साइट नरेन्द्रमोदी डोट कोम http://narendramodi.in/homeकी साइट पर जाकर उनके योगमें लीन छवि को उठाकर मोदीजी आँखे खोलिए शिक्षकों के दुख देखिए http://subhashbhadauria.blogspot.com/2009/09/blog-post.html अपने को खतरे में डालते हुए पोस्ट लिखी थी. साथ ही मैं निरंतर उनकी साइट पर जाकर राज्य के एवं अपने दुख दर्द से अवगत कराता रहा.
ये मुख्यमंत्री मोदीजी को वो साइट है जहाँ राज्य का कोई भी पीड़ित नागरिक कर्मचारी अपनी फरियाद उन तक सीधे पहुँचा सकता है. देर भले हो पर सत्यता की खराई के बाद कार्यवाही निश्चिति है. मैंने देश के हाईटेक नंबर 1 मुख्यमंत्री माने जाने वाले नरेन्द्रमोदीजी की इसी साइट पर बार बार उन्हें स्वयं को होने वाले अन्याय से अवगत कराया. बहुत ज़ल्द परिणाम सामने आये. गेहूं के साथ बथुओं को भी पानी लगा कई बैठे बैठे तर गये. जो तमाशबीन थे उनकी लाटरी लगी. बड़े महानगर उनके हाथ आये बागियों को दूर दराज़ के गाँव से संतोष करना पड़ा. जय हो शिक्षा विभाग की हमारा भी मोक्ष हो गया. घर से बाहर अब हमें भी नेक निगाहों से देखा जायेगा. क्योंकि हम देश के नंबर वन हाईटेक मुख्यमंत्री द्वारा नंबर वन प्रमोटिड अधिकारी जो हो गये. जब वे देश के प्रधान मंत्री होगें तब हम कहेंगे यार हमारा प्रमोशन उन्हीं के हाथों हुआ था. ऐसा होगा देश की अस्मिता और गौरव को कायम रखने के लिए वे देश की ज़रूरत बन जायेंगे. क्योंकि गुड्डे गुड़ियों से देश चलने वाला नहीं हैं. सनद रहे कि ये बात कभी हमने कही थी लोग नोट करें. ये हम जैसे ऊँचे फ़कीरों की दुआ है हमारी बात सीधे ऊपर तक जाती है. बकौले मीरतक़ी मीर.
सारे आलम पे मैं हूँ छाया हुआ.
मुस्तनद है मेरा फ़र्माया हुआ.
ता.13-11-09 को देर शाम हमारे इंटेलीजेंस सूत्रों ने खबर दी भदौरियाजी कांग्रेच्युलेशन तुम इंचार्ज प्रिंसीपल से क्लास वन प्रिंसीपल हो गये. सी.एम. सर ने तुम्हारी प्रिंसीपल की प्रमोशन फाइल पर हस्ताक्षर कर दिये.25 लोगों में तुम्हारा 19वां नाम है. सरकारी कालेजो में क्लास टू अध्यापकों को क्लास वन का प्रमोशन देने से पहले लंबी प्रकिया राज्य सेवा आयोग, गुजरात राज्य प्रशाशन, चीफ सेक्रेटरी, शिक्षामंत्रीश्री और अंत में मुख्यमंत्रीजी के दस्तख़त के बाद नसीब जगते हैं. हमारे जैसे 25 अध्यापकों के सोये नसीब जागे.
अहमदाबाद में रहने वाली हमारी पत्नी और गुजरात नेशनल युनिवर्सिटी गाँधीनगर में पढ़ने वाले बेटे ने पिछले एक महीने से घर की बेहद खस्ता हालत का वास्ता देकर हमारी चोंच को बाँध रखा था. सो हम चुप थे. हम गुजरात उच्च शिक्षा विभाग के बारे में कुछ भी न लिखें .
उन्हें डर था कि अभी तो मात्र अहमदाबाद से निश्काषित कर मात्र दूर दराज़ के गाँव में फेंका गया कहीं नौकरी से निकाला गया तो क्या होगा. घर कैसे चलेगा हम भी मज़बूरन ख़ामोश रहे. रोजी रोटी का ग़म भी क्या ग़म होता है.
परिवार को प्रमोशन की खबर देने पर सब चकित थे. पत्नीजी ने अहमदाबाद से कहा चश्मा लगाकर देखो प्रमोशन लिस्ट में तुम्हारा नाम है भी या नहीं मेरे खिलाफ होने वाली साज़िश से वे वाकिफ़ थी.
बेटे गुजरात नेशनल लॉ युनिवर्सिटी गाँधीनगर चौथे वर्ष में सो उसने तुरंत सबूत मांगा where is Order ? I said it is in my hend.. He said send me fax copy it. He said read it properly. मैनें सो एन्ड सो नोटीफिकेशन के तहत अपने उन्नीसवें नंबर की बात की उसका फर्स्ट रियेक्शन पापा सच्चाई की आखिर जीत होती है. यू प्रूव इट. पत्नीने रियेक्ट किया बहुत लंबी अँधेरी रात थी. बीस साल के बाद तुम्हारी स्वीकृत हुई.
मुझे गुजराती ग़ज़लकार बेफाम साहब याद आये.
પ્રભૂ તારી કસૌટી ની પ્રથા સારી નથી હોતી.
જે સારા હોય છે એની દશા સારી નથી હોતી.
पिछले कई वर्षो से फाइल चल रही थी. आखिर अहमदाबाद गाँधीनगर, राजकोट. जामनगर,जूनागढ. जैसी प्रसिद्ध सरकारी कोलेजों में वर्षों के बाद 15साल सीनियर एवं पीएच.डी अध्यापकों की प्रमोशन देकर नवाज़िश की गई. हमें पिछले साल खुली कोलेज में रखा गया अभी जमीन मिलनी बाकी है कालेज स्कूल में धड़ाधड़ चल रही है.
गोधरा के पास शहेरा गाँव में जहाँ पिछले 1 वर्ष से परिवार से ज़लावतन. अहमदाबाद की गुजरात आर्टस सायंस कोलेज की एन.सी.सी. हमारी छुट गयी ये इसका दर्द जब आर्डर रिटन आथोरिटी शिक्षा विभाग के नायब सचिव मेकवान साहब को बताया तो वे समझ गये एन.सी.सी. केडेटस का सेल्युट नहीं मिलता तुम्हें मैंने कहा सर सरकारी कोलेज शहेरा पिछली साल ही खुली है एन.सी.सी. तो गई पर वहां अभी तिजोरी का कार्डिक्स नंबर नही मिला मेरी प्रिंसीपल की तनखाह इस महीने कहाँ होगी. परिवार अहमदाबाद रहता हैं मैं 150 कि.मी. दूर शहरा गाँव में उन्होंने कहां मैं देखूँगा. मैने कहा अभी तक अध्यापक की तनखाह गुजरात आर्टस सायंस कोलेज में पड़ रही थी. अब क्या होगा और कल 18-11-09 के रोज गुजरात आर्टस सायंस कोलेज की हेड क्लर्क श्रीमती चंद्रिका बहिन ने पहले प्रिंसीपल की मुबारक बाद दी. फिर गुजराती में कहा आपनी साहेब 13-11-09. सुधी अमदाबाद मां पगार थशे 14-11-09 थी प्रिंसीपल थई गया. मैं समझ गया. प्रिंसीपल क्लास वन बनने के साथ इस महीने तनखाह के लाले पड़ेगे.
खैर अतं में मैं एक बार फिर से राज्य के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्रमोदीजी,शिक्षामंत्री श्री रमणवोराजी, शिक्षा सचिव श्री हसमुख अडियाजी, राज्यकी शिक्षा कमिश्नर श्रीमती जयन्ती रवी( I.A.S.) और अपने नायब सचिव विक्टर मेकबान साहब का आभारी हूँ जिनकी कृपा से क्लास मैं टू से क्लास वन हो गया. अब कैसे बताऊं कि एन.सी.सी.में जब 95 मे कामटी नागपुर तीन महीने कोर्स किया था तब ही क्लास वन का रेंक केन्द्र ने अता किया था. शहेरा कोलेज में एन.सी.सी. न होने से एक वर्ष से युनिफोर्म, केडेटस के सेल्युट आल इंडिया ट्रेकिंग सब छुट गये बस एक ब्लागिंग बाकी है. पत्नी और बेटे कहते हैं आप ब्लाग लिखना छोड़ दो अहमदाबाद घर का इंटरनेट कनेक्सन उन्होंने कटा रखा है उन्हें लगता है कि मेरी उंगली करने की आदत से सब बेड़ा गरक हुआ है. पर हम क्या करें कोई हमें उंगली करे तभी हम अँगूठा करते हैं.
और अब तो हम पर क्लास वन की मुहर लगाकर मुख्यमंत्री मोदीजी ने ज़र्रे से आफ़ताब कर दिया. सब कह रहे हैं करेले और नीम चढ़ा देखना हो तो भदौरिया को देखो.
दुश्मन रो रहे हैं हाय हम लुट गये कितनी साज़िश की पर मोदीजी के आगे किसी की न चली. भदौरिया का प्रमोशन दे दिया. सब ये भी सोच रहे हैं गुजरात आर्टस सांयस कोलेज अहमदाबाद क्यों खाली रखी गई.क्या डॉ.भदौरिया की अहमदाबाद वापिसी होगी.आसार तो उन्हीं के लग रहे हैं एन.सी.सी की उनकी सेवायें गुजरात कोलेज मशाल मिशन. गुजरात कोलेज की साफसूफी का काम उन्हें न दे दिया जाय.
और हम हैं कि शहरा गांव में प्रमोशन का आनंद ले रहे हैं दोस्त कहते हैं तुम्हें गांव की शुद्ध हवा बहुत रास आ गई हैं.
शहेरा में स्वर्णिम रथ के प्रवेश करने पर किये जाने वाले हमारे सांस्कृतिक कार्यक्रम से लोगों और अधिकारियों नें हमें जाना. खास कर स्वाइन फ्लू पर की गई नाटिका खूब सराही गई. इस लिंक पर देखें.
http://subhashbhadauria.blogspot.com/2009/09/blog-post_04.html
अंत में इन काव्य पंक्तियों के साथ- अपनी पोस्ट को विराम देने की अनुमति चाहते हुए-
पीली ऋतु के हाथ में पत्ता हरा देते रहो.
अपने होने का यहाँ कुछ कुछ पता देते रहो.
हम एक बार फिर अपने दोस्तों और दुश्मनों को अपनी इस पोस्ट से शिनाख्त दे रहे हैं कि हम अभी ज़िन्दा हैं और पूरी रौशनी के साथ. ब्लाग की दुनियां में चाहने वाले हमें महसूस करे उसी शिद्दत के साथ जैसे पहले करते थे. हम अपने पुराने तेवरों के साथ ज़ल्द दुबारा लौटेंगे. क्योंकि अँधेरों के खिलाफ़ हमारी जंग अभी ख़त्म नहीं हुई ये तो सिर्फ़ आग़ाज़ है. आमीन.
प्रिंसीपल डॉ.एस.बी.भदौरिया
गुजरात राज्य प्रशासनिक शिक्षा सेवा वर्ग-1
सरकारी विनयन कोलेज शहेरा, ता.19-11-09

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत-बहुत बधाई प्रिंसिपल साहब गजटेड आफ़ीसर क्लास-I। आगे भी खूब तरक्की करें।

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  2. शुक्लाजी हमारा गांव तहसील विधूना के पास है.हमारे पूर्वज रिज़्क की तलाश में गुजरात आगये. आपने बधाई दी तो लगा भाई ने भाई को पहिचान लिया.धन्यवाद

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  3. डॉ भदौरिया !
    बरसों की लड़ाई के बाद आप की जीत के लिए हार्दिक शुभकामनायें !
    चिटठा चर्चा पर अनूप जी ने आपके बारे में लिखा है , यह भी अच्छा लगा ! मेरे विचार में आपको समझने वाले बहुत कम लोग हैं ! आशा करता हूँ भाई जी , अब आपके लेखन में आक्रोश कम और प्यार अधिक मिलेगा !

    सादर आपका

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  4. भदौरिया जी,बहुत-बहुत बधाई !
    अरे आप तो बहुत नज़दीक के निकले . हम भी बिधूना तहसील के कस्बा कंचौसी के हैं .

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  5. बधाई हो. चर्चा से सीधे यहीं आ गये हम बधाई देने.

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  6. बहुत-बहुत बधाई प्रिंसिपल साहब गजटेड आफ़ीसर क्लास-I

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  7. 1-सतीश हमारी उलटवासियों के बड़े गूढ़ अर्थ होते हैं.संत लोगों की जब कुंडली जागृति हो जाती थी तो वे ऐसी ही मारक भाषा का इस्तेमाल करते थे हमारे ग़म तो ख़त्म हुए पर लोगों के ग़म से परेशान होते हैं उनके कारण अगर आक्रोश फूटे तो हमारी जिम्मेदारी नहीं. खैर आप की सलाह चित्त पर लाने की भरसक कोशिश की जायेगी.ये सलाह आप ब्लाग जगत के चील कौवों को भी दे हम अपने आप सुधर लेंगे.

    2-प्रियंकरजी आप हम वतन हैं. वतन की यादों के कहने.
    खेत खलिहान का, पोखर का सफर याद आया.
    आज टूटा हुआ वो गांव का घर याद आया.
    3-मोहतरमा वंदनाजी आप दश्त से दर्द के दरिया का सफ़र अनूपजी जैसे सूफी संत के कहने पर कर बैठीं. यहां अरण्य के शेरों से भी ख़तरनाक हमारे शेर होते हैं.ये इलाका नाज़ुक दिल वालों के लिए वर्ज़ित है.
    आपने हमें बधाई के काबिल समझा इस नवाज़िश पर क्या कहूँ बकौले ग़ालिब.
    वो आये हमारे घर ख़ुदा की नेमत है
    कभी हम घर को देखते हैं कभी खुद को.
    आप एक अच्छी सोच की मलिका हैं. आपके शब्द बोलतें हैं आपके ब्लाग को पढ़कर यही राय बनती है.
    3-प्रवीणजी प्रायमरी के मास्टर साहब आप की बधाई क़बूल. वैसे प्रिंसीपल की विशेषतायें जो रागदरबारी उपन्यास में श्रीलाल शुक्लजी ने गिनवायीं हैं और आप जैसा अपने तज़ुर्बे से समझ रहें होंगे हम वैसे नहीं.ये क्लास- वन हमने हमारे दुस्मनों के घावों पे नमक लगाने के लिए ही लिखा है हमारी असलियत तब पता चलेगी जब यार लोग रेंकेगें तो हम भी हमारे भाइयों के साथ लोट लगायेंगे- क्लास वनी एक तरफ धरी रह जायेगी.

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  8. प्रिंसिपलगजटेड-आफ़ीसर क्लास-I बनने पर आपको बहुत-बहुत बधाई ।
    आप ऐसे ही ब्लोग लिखते रहिए, खुदा आपसे छुटी हर खुशी आपको पुन: उपलब्ध करे।

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