शनिवार, 25 सितंबर 2010

उर्दू का सफाया कर डाला हिन्दी को घर से निकाले हैं.


ग़ज़ल
उर्दू का सफाया कर डाला, हिन्दी भी घर से निकाले हैं.
गुजरात में हम गुजराती को मुश्किल से अब तो सँभाले हैं.

सायकिल को वो बाँटे घूम-घूम, शहरों-शहरों, गाँवों-गाँवों,
अंदाज़ हमारे साहब के, देखो तो कैसे निराले हैं.

गाँधी का वो मंदिर बनवायें, अब गाँधीनगर में क्या कहने !
बापू के उसूलों में चलने में, पाँव में पड़ते छाले हैं.

हम जिनको मसीहा समझे थे, हम जिनपे भरोसा करते थे,
देते हैं दगा वे ही हमको हम लोग तो भोले भाले हैं.

अँग्रेज गये कब के लेकिन, औलाद यहाँ पर छोड़ गये,
ये देश उन्हीं की बपौती है, हम भी तो उनके हवाले हैं.


ता. 20-09-10 के रोज़ सरकारी आर्टस कोलेज मेघरज हिन्दी दिवस सप्ताह के आयोजन पर अपने वक्तव्य में एक छात्रा ने अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा जब राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय पक्षी आदि को नुकशान पहुँचाने वालों के लिए कानून में सज़ा का प्राविधान है तो फिर राष्ट्रभाषा को हिन्दी को क्षति पहुँचाने वालों को क्यों कोई सज़ा अभी तक निश्चित नहीं की गयी. हमारे गुजरात में 12 वी कक्षा से हिन्दी निष्काषित कर दी गयी है 10 वी कक्षा में वह मरजियात है. कोलेजों से भी वह धीरे धीरे गायब की जा रही है. राष्ट्रपिता गाँधीजी ने गुजरात में हिन्दी के लिए क्या नहीं किया आप सब जानते हैं. मैं यह सब सुनकर दंग रह गया.हमें हिन्दी दिवस सप्ताह के आयोजन पर बहैसियत हिन्दी विद्वान के रूप में हमारे मित्र एवं मेघरज सरकारी कोलेज के इंचार्ज प्रिंसीपल श्री उत्तम भाई गांगूर्डेने आयात किया था. कार्यक्रम में पुस्तक के द्वारा हमारा स्वागत हुआ महेमान परिचय के रूप में प्राचार्य उत्तम भाईने छात्र-छात्राओं से भरे सभा खंड में बताया भदौरियाजी हिन्दी गुजराती उर्दू के अच्छे विद्वान हैं वे नई तकनीक ख़ास कर इंटरनेट के माध्यम से मात्र देश में ही नहीं अपनी अंतर्राष्ट्रीय पहिचान रखते हैं. हिन्दी विषय में गोल्डमेडालिस्ट पीएच.डी.के साथ ही विद्रोही कवि के रूपमें जाने जाते हैं. ये सब सुनकर जहाँ छात्र-छात्रायें अध्यापक अध्यापिकायें हमें गौर से देख रहे वे हमारा बारीकी से निरीक्षण कर रहे थे उन्हें हम कहीं से विद्वान नहीं लग रहे थे. प्राचार्य उत्तम भाई उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा भदौरियाजी जब मुँह खोलेंगे तब पता चलेगा. वे इंटरनेट,प्रजेन्टेशन के माध्यम से जब करतब दिखायेंगे तब आप स्वयं जान जायेंगे कि वे क्या हस्ती है. मंच पर हम वैसे ही लजा रहे थे जैसे अज्ञात यौवना नायिका लजाती है जिसे अपने यौवन आने के पता नहीं चलता पर दीवाने घूरघूर कर विश्वास दिला के ही मानते हैं. वैसा ही हमारा हाल था.
हिन्दी दिवस पर सराकारी आर्टस कोलेज मेघरज के छात्र और छात्राओं ने हिन्दी में प्रस्तुत भजन,गीत, एक पात्रीय अभिनय से मनमोह लिया था. अब सब हमें सुनने को उत्सुक थे.
सो हमने माइक को अपने मुँह में खोसते हुए सर्वप्रथम तो आश्चर्य व्यक्त करते हुए सभा खंड में कहा कि हमें आज ही पता चला कि हम विद्वान है देखो भाई हम अपनी मूर्खता के लिए प्रसिद्ध हैं सो आप अगर हमें हिन्दी का विद्वान मानने चले तो निराशा होगी. सभाहाल में सभी जोर से हँस पड़े. हमने उन्हें हिन्दी साहित्य के कालों की यात्रा करायी .सूर तुलसी से होते हुए खुद पर आ गये. अपनी बग़ावती ग़ज़लें और रोमान्टिक ग़ज़लों से समा बाँध दिया.
फिर उन्हें गुजरात में हिन्दी की प्राचीन स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि मध्यकाल के ब्रजभाषा के महान कवि दयाराम गुजरात के थे. ब्रजभाषा में उनकी लिखी दयाराम सत्सई बिहारी सत्सई जितनी ख्याति तो नहीं पा सकी पर उसे प्राचीन हिन्दी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. गुजरात के कच्छ में तत्कालीन राजाओं द्वारा मध्यकाल की काव्य भाषा ब्रज की पाठशाला खोली गयी थी जिसमें अध्ययन करने के लिए हिन्दी प्रदेशों से जिज्ञासु आया करते थे. हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने में महात्मा गाँधीजी का योगदान सर्वविदित है.
पर ये सत्य है कि गुजरात से अब हिन्दी बहिष्कृत हो चली है. मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्रमोदीजी के विधान सभा क्षेत्र की श्री के.का. शास्त्री सरकारी आर्टस कोलेज में आज भी हिन्दी भाषा विषय के रूप में नहीं हैं. इस इलाके में अधिकतर हिन्दी भाषी एवं मुस्लिम हैं जो दूर से ही इस शानदार कोलेज को देख कर गुज़र जाते हैं पर उन्हें कोलेज में हिन्दी विषय न होने के कारण प्रवेश नहीं मिलता. मुख्यमंत्रीजी ने खुद इस कोलेज का शिलान्यास किया था और स्वयं ही प्रारम्भ. पर बिचारी हिन्दी मारी गयी हमारी ड्यूटी एन.सी.सी आफीसर के रूप में दोनो बार लगी थी मुख्यमंत्री मोदीजी को एन.सी.सी. केडेटस का एवं अपना बेहतरीन सैल्यूट देने के लिए गुजरात कोलेज द्वारा हमें नियुक्त किया गया था. हमने तभी प्रतिक्रिया स्वरूप अपनी पोस्ट लिखी थी जो ब्लाग पर आज भी मौज़ूद है. देखें-
हमने सरकारी आर्टस कोलेज मेघरज में प्रोजेक्टर द्वारा पर्दे पर कोलेज के छात्र-छात्राओं को इंटरनेट के माध्यम से मुख्यमंत्रीजी का ब्लाग दिखाया जो अन्य भाषाओं के साथ हिन्दी में पढ़ने की सुविधा देता है पर उन्हीं के कार्यक्षेत्र की कोलेज से हिन्दी का गाइब होना आश्चर्यजनक है. हिन्दी पहले राज्यकी स्कूलों में अनिवार्यभाषा के रूप में पढ़ाई जाती थी अब वैसा नहीं हैं. अब राज्य में स्कोप के द्वारा अँग्रेजी के इंजेक्शन लगाये जा रहे हैं. अँग्रेजी लेब खोली गयी हैं वहाँ मात्र अंग्रेजी की शिक्षा दी जा रही है. ताकि राज्य के गुजराती अँग्रेजी में सर उठाकर बात कर सकें. ये राज्य के दक्षिण के आला अफ्सरों का फार्मूला है वे राज्य प्रशासन को चकमा देते हुए अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं.
अब मात्र हिन्दी ही नहीं गुजराती भाषा को भी एक ओर धकेल दिया गया है उच्च शिक्षा विभाग के जोइन डायरेक्टर कक्षा के अधिकारी राज्य की प्रशासन भाषा गुजराती कंप्यूटर पर लिखने में असमर्थ हैं. ये बात हम अपने अनुभव से कह रहे हैं पिछले तीन साल से हमने शिक्षा कमिश्नर, शिक्षा सचिव,शिक्षा निर्देशक को गुजराती भाषा में मेल किये होंगे पर कभी गुजराती में जबाब नहीं मिला वही अँग्रेजी का छपा छपाया पाठ.योर एप्लीकेशन हैस सेन्ड प्रोपर डिपार्टमेंट फोर प्रोपर एक्सन.
प्रोपर एक्सन तो कभी नहीं हुआ रियेक्शन के रूप में हमने डांट खाई सो अलग.
हमारे मुख्यमंत्रीजी ने राज्य में कस्बों शहरों में खूब सायकिलें बाँटी स्कूल की छात्राओं की साइकिलों से टनटन की जगह स्वर्णिम स्वर्णिम की मधुर निकल रही है.
पर हमारी सरकारी कोलेज शहेरा की छात्र छात्रायें रो रहे हैं अभी तक कोलेज को जमीन नहीं मिली तीन साल से सरकारी कोलेज प्राइवेट स्कूलमें घिसट रही है. गुजरात राज्य की महसूल मंत्री आनंदी बहिन पटेल के पास फाइल चक्कर काट रही है अभी तक फैसला नहीं हुआ.कोलेज निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष-मार्च 2011 में दी गयी 8 करोड की ग्रांट का लेप्स होना तय है. शिक्षा कमिश्नर द्वारा कोलेज के लिए ज़रूरी शैक्षणिक स्टाफ अभी तक नहीं मिला एक सत्र बीतने आया.


उर्दू के प्रथम कवि वली गुजराती की सरज़मी गुजरात से उर्दू का सफाया तो बहुत पहले हो गया था हिन्दी भी मारी गयी, गुजराती आक्सीजन पर है.


मेघरज सरकारी आर्टस कोलेज की छात्रा के शब्द अभी भी दिमाग मे हथौड़े की तरह चोट करते हैं. राष्ट्रध्वज,राष्ट्रीय पक्षी को नुकशान पहुँचाने वालों को कानून में सज़ा का प्राविधान है तो फिर राष्ट्रभाषा को नुकशान पहुँचाने वालों को क्यों नहीं ?उपरोक्त ग़ज़ल उसी छात्रा के विचारों का सादर समर्पित है जिसने मुझ से ये पोस्ट लिखवाली ब्लाग पर लगा स्लाइडशो सरकारी आर्टस कोलेज मेघरज का हैं जहाँ हिन्दी दिवस पर हमें याद किया गया था.


हम एक बार फिर से अपने दोस्तो और दुश्मनों को अपनी शिनाख़्त दे रहे है कि हम तमाम विसंगतियो में आज भी ज़िन्दा हैं और अपने पूरे तेवरों के साथ.
प्रिंसीपल डॉ.सुभाष भदौरिया सरकारी आर्टस कोलेज शहेरा जिल्ला पंचमहाल. ता.2509-2010

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ख़ूब कहा भदौरिया जी !

    आज आपकी पोस्ट बाँच कर तृप्ति मिली..........

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