ग़ज़ल
जानेमन यूँ ना दिल को दुखाया करो.
ख़्वाब में ही सही आप आया करो.
रूठ लो, रूठ लो, हक़ दिया ये तु्म्हें,
जब मनाये तो फिर मान जाया करो.
मेरे दिल की भी बतियाँ सुनो गौर से,
और अपने भी दिल की सुनाया करो.
राज़दां हैं तुम्हारे यकीं तो करो,
राज़ अपने ना हमसे छुपाया करो.
शौक़ से जान ले लो कोई ग़म नहीं,
अपनी नज़रों से यूँ ना गिराया करो.
आईना आप भी देखिये तो कभी,
आईना हमको ही ना दिखाया करो.
डॉ. सुभाष भदौरिया गुजरात. ता. 16-12-2017

आदरनीय सुभाष जी -- पहली बार आपके ब्लॉग पर आकर आपकी भावपूर्ण तीन गजलें पढ़ी | बहुत अच्छा लिख रहे है आप | सादर शुभकामना |
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