शनिवार, 17 जून 2017

चूजों की हिफ़ाज़त का जिम्मा नागों को अगर दोगे लोगो.

ग़ज़ल
चूजों की हिफ़ाज़त का जिम्मा नागों को अगर दोगे लोगो.
सामान तबाही का अपने तुम ख़ुद ही कर लोगे लोगो.

रावण चहुँ ओर यहाँ पर हैं सीता का रूदन भी ज़ारी है,
तुम ही हो राम तुम्हीं लक्ष्मन, कब इन की ख़बर लोगे लोगो.

हाथों को धरे यूँ माथे पे तुम जंग को हारोगे कब तक,
जब ज़ुल्म से आँख मिलाओगे ,दावा है सँवर लोगे लोगो.

पश्चिम से  तो लपटें उट्ठे हैं, पूरब से भी  ख़तरा है तुमको,
सोये जो रहे ग़र ऐसे ही,पत्तों से बिखर लोगे लोगो.

देखे हो तमाशा साहिल पे, मौजों का इल्म नहीं तुमको,
पानी जो तुम्हारे सर से गया, तुम ही ख़ुद ही सुधर लोगे लोगो.

डॉ. सुभाष भदौरिया गुजरात ता. 17-06-2017



सोमवार, 5 जून 2017

सेल्फी अपनी वो तो खिचाते रहे.

ग़ज़ल
सरहदों पे तो हम सर कटाते रहे.
सेल्फी अपनी वो तो खिचाते रहे.

कितने ख़ुदग़र्ज़ थे देशवासी मेरे,
चौकों छक्कों पे ताली बजाते रहे.

बात गन की ज़रूरी थी जिस वक्त में,
बात मन की वो अपनी सुनाते रहे.

आज भी अपने दुश्मन तो बेख़ौफ़ हैं ,
शाह आते रहे शाह जाते रहे.

कर्ज़ था मुल्क की हम पे मिट्टी का कुछ,
हम लहू दे के उसको चुकाते रहे.

दर बदर हो गये हम तो कुछ ग़म नहीं.
आईना आँधियों को दिखाते  रहे.

डॉ.सुभाष भदौरिया  गुजरात ता.05-06-2017



गुरुवार, 1 जून 2017

धूप में जल रहे हैं कदम दोस्तो.

ग़ज़ल
धूप में जल रहे हैं कदम दोस्तो.
साथ में सिर्फ अपने हैं ग़म दोस्तो.

साथ में आजकल वो कहां हैं मेरे ?
साथ खाई थी जिसने कसम दोस्तो.

वक़्त आया तो हमको पता ये चला,
हमको कितने थे झूटे भरम दोस्तो.

ग़ैर तो ग़ैर उनका गिला क्या करें,
अपनों के भी बहुत हैं करम दोस्तों.

याद फिर उसकी आयी बहुत देर तक,
आँख फिर हो गयी अपनी नम दोस्तों.

मोम के वो नहीं जो पिघल जायेंगे,
अपने पत्थर के हैं इक सनम दोस्तों.


डॉ.सुभाष भदौरिया गुजरात ता.01-06-2017

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

बेवफ़ा कहके बुलाया तो बुरा मान गये.




ग़ज़ल

बेवफ़ा कहके बुलाया तो बुरा मान गये.
आईना उनको दिखाया तो बुरा मान गये.

कब तलक रहते अँधेरों में,  बताओ तुम ही,
हमने एक दीप जलाया,  तो बुरा मान गये.

तुम नहीं और सही , और नहीं , और सही.
फैसला हमने सुनाया तो बुरा मान गये.

चैन अपना वो चुरायें, तो कोई बात नहीं,
चैन हमने जो चुराया, तो बुरा मान गये.

दिल दुखाने का उन्हें शौक, बहुत था अब तक,
दिल को हमने जो दुखाया, तो बुरा मान गये.

वो घुमाते हैं बहुत सबको अपनी बातों में,
हमने जो उनको घुमाया तो बुरा मान गये.

डॉ. सुभाष भदौरिया गुजरात ता. 17-03-2017

जाने क्या ऐसी कशिश है तुझ गुलफ़ाम के साथ.

ग़ज़ल

जाने क्या ऐसी कशिश है तुझ गुलफ़ाम के साथ.
लोग लेते हैं मेरा नाम   तेरे नाम के साथ .


तुम कहीं और चले जाओ, अब दुनियां से मेरी,
ज़हर भी भेजना था, अपने इस पैग़ाम के साथ.


मुझको मरने का नहीं ग़म, ये ख़्वाहिश है मेरी,
क़त्ल हो जाऊँ तेरे हाथ से आराम के साथ .


मुझसे तन्हाइयों का नर्क कहां कटता है,
रोज़ आता हूँ नज़र एक नये ज़ाम के साथ.


ग़म जो दो चार गर, होते तो सुनाते तुमको,
सैकड़ों ग़म है सीने में ,इस बदनाम के साथ.


डॉ. सुभाष भदौरिया गुजरात ता.17-03-2017


रविवार, 8 जनवरी 2017

हर रोज़ का ये तेरा ये रोना भी नहीं होता.


ग़ज़ल

हर रोज़ का ये तेरा ये रोना भी नहीं होता.
आँखों को तो अश्को से भिगोना भी नहीं होता.

अब दर्द के बिस्तर पे, लग जाय हैं ये आँखें ,
फूलों का सभी को तो, बिछौना भी नहीं होता.

तुम हमको समझ लेते, हम तुमको समझ लेते,
इक दूजे को दोनों का खोना भी नहीं होता.

बच्चों की तरह दिल ये, अब खुद ही बहल जाये,
हाथों में तो  हर इक के, खिलौना भी नहीं होता.

सूरत से अगर तेरी सीरत का पता चलता,
जीवन में ग़मों का ये ढोना भी नहीं होता.

डॉ. सुभाष भदौरिया ता.08-01-2017 गुजरात






बुधवार, 28 दिसंबर 2016

वादा करके वो ज़ालिम मुकर जायेगा.


ग़ज़ल

वादा करके वो ज़ालिम मुकर जायेगा.
राह तक तक के हर दिन गुज़र जायेगा.

तू भी पछतायेगा देख मेरी तरह,
ये नशा इश्क़ का जब उतर जायेगा.

और भी उसकी गुस्ताख़ियां बढ़ गयीं,
हमने सोचा था इक दिन सुधर जायेगा.

अपनी ख़ुश्बू पे इतरा न ओ संगेदिल,
आँधियां गर चलीं तो बिखर जायेगा.

अपना दिल भी पहाड़ों की मानिंद है,
ना इधर जायेगा ना उधर जायेगा.

नाज़ हमने उठाये तेरे आज तक,
हम ना होंगे तो फिर तू किधर जायेगा.

शौक़ से दौड़ ले अपने चारों तरफ,
ठेस दिल को लगेगी ठहर जायेगा.

डॉ. सुभाष भदौरिया  गुजरात  ता. 28/11/2016


मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

तमाशे पे तमाशा कर रहे हैं.

ग़ज़ल
तमाशे पे तमाशा कर रहे हैं.
खुलाशे पे खुलाशा कर रहे हैं.

लगी है मीडिया ठुमके लगाने,
क़लम को भी रक्कासा कर रहे हैं.

मिले हैं चूहों से ये पिंजड़े वाले,
सभी फँसने की आशा कर रहे हैं.

हमारी ऐसी तैसी  हो रही है,
वो झांसे पे हैं झांसा कर रहे हैं.

चढ़ा सूली गरीबों को वो देखो,
ठुकासे पे ठुकासा कर रहे हैं.

वतन की अब बची सांसे कहां हैं,
फ़कत अब वो पचासा कर रहे हैं.

डॉ. सुभाष भदौरिया ता.20-12-2016 गुजरात




मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

लगी है नोटबंदी जब से मैख़ाने नहीं जाते.


ग़ज़ल

इबादत घर ही कर लेते हैं बुतख़ाने नहीं जाते.
लगी है नोटबंदी जब से मैख़ाने नहीं जाते.

तवाइफ़ की भी आँखें थक गयी हैं राह तक-तक के,
अभी कोठे पे दिल को लोग बहलाने नहीं जाते.

मुहब्बत अब घरों बैठी बहुत मायूस रहती है,
अभी आशिक़ कहीं भी इश्क़ फ़र्माने नहीं जाते.

हमारी शक्ल पे हैं बज रहे कितने न पूछो अब .
हमीं ख़ुद आईने में ख़ुद को पहिचाने नहीं जाते.

सजायें चेहरे पे मुस्कान, लाखों कोशिशें कर लें,
मगर उजड़े हुए दिल के ये वीराने नहीं जाते.

तअल्लुक़ तर्क भी कर लें, तेरी गलियों को भी छोड़े,
मगर अय दोस्त छुटपन के ये याराने नहीं जाते.

डॉ.सुभाष भदौरिया ता.13-12-2016 गुजरात

सोमवार, 21 नवंबर 2016

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है.



देश के प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्रमोदीजी के देशहित में नोटबंधी  करने के कारण उनके दुश्मनों की  तादाद में भारी इज़ाफ़ा हो गया हैं. हमने देश के कई प्रधान मंत्रियों को खोया है जिनके रक्षक भक्षक हुए हैं पर अब हम दुबारा नहीं खोना चाहते.

इसलिए  ता.२०-११-२०१६ को  मोदीजी की दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की प्रार्थना करने मेरा और साथी अध्यापक श्री विनोदसर, श्री सुनीलसर, श्री जादवसर, श्री केतनसर गुजरात के पावागढ़ पर्वत पर विराजमान कालीमाँ के यहाँ जाना हुआ और माँ से प्रार्थना की कि मोदीजी इसी तरह आगे देशहित में कठोर निर्णय लेते रहें आप उनकी रक्षा करें.

ता.08-11-2016 की रात्रि से ५०० और  १००० हजार नोट बंदी की  उसके पश्चात उन्होंने खुद अपने वक्तव्य में ये तस्लीम किया कि मैंने किन लोगों से दुश्मनी मोल ले ली है मैंने जिनकी वर्षो के कालेधन की कमाई नष्ट कर दी है वे मुझे ज़िन्दा नहीं छोड़ेंगे. उनको जो करना हैं करें मैं देश और गरीबों के हित में जो करना है करूँगा. उन्होंने भावुक हो कर ये भी कहा मैंने देश के लिए घर कुटुंब छोड़ा है.

ये सच है कि उनके इस फैसले से आम लोगों को भारी तकलीफ़ हुई है और कईयों की बेंक में कतारों में खड़े रहने से जाने गयीं जिसका उल्लेख मैंने अपनी पूर्व पोस्टों में किया है.

पर ये भी सच है कि इससे कालेधन के कुबेरों, सीमापार और सीमा के अँदर के शत्रुओं की कमर टूट गयी है वे बौखलाये हुए हैं. वे किसी भी हद जक जायेंगे. इनमें नामी गिरामी पक्ष विपक्ष के सभी असुर जन शामिल हैं. वे आम लोगों को उकसा के कुछ भी करा सकते हैं. सर्वोच्च अदालत ने भी देश की सरकार को आगाह किया है.
ये सच है नोटबंदी की योजना के अमलीकरण में त्रुटियां हुई है ये जग ज़ाहिर है पर इसके इरादे में गरीब विरोधी खोट नज़र नहीं आती.

ता.०८-११-२०१६ की रात्रि के एक निर्णायक  फैसले ने सब आम खास को जमीन पर ला दिया.  अब लोगों में फिज़ूल खर्ची बंद हो गयी है. जो मां बाप बच्चों को देते थे उन्हें बच्चों से लेने के दिन आये. बैंकों की जगह बच्चों की गुल्लकों ने देश के घर चलाये. नौकरों ने अपने मालिकों को छूटे देकर फ़र्ज निभाया. बोस को सहयोगियों ने मदद की.

मुझे एक मेडीकल वाले मित्रने इकलौती 500 की नोट बदलकर लाइन में शहीद होने से बचा लिया. जो लाइन में लगकर मरें है वे देश के कर्तव्यनिष्ठ नागरिक थे उनके परिवार को  मुआवज़ा दिया जाना चाहिए.

मैंने और मेंरे साथी अध्यापक मित्रों ने मात्र पावागढ़वाली मां से देश के प्रधानमंत्री मोदीजी के लिए प्रा्रार्थना ही नहीं की आज का उनकी कुशलता के लिए अपने इष्टदेव का व्रत भी रखा है.

मेरी ता. 18-11-2016 को सादी की साल गिरह थी परिवार अहमदाबाद में और ता. २०-११-२०१६ रविवार छुट्टीका दिन होने के बावज़ूद मैं अहमदाबाद नहीं गया. पावागढ़ से रास्ते में लौटने पर  पत्नी का मैसेज मिला आपका मोबा. क्यों बंद है

मैंने उन्हें उसका कारण बताया कि मैं अपने देश के हित में निर्णय लेने वाले माननीय प्रधान मंत्री के कुशलता की पार्थना करने साथी अध्यापक मित्रों के साथ पावागढ़ गया था. इसके पहले वो मुझ पर शंका करें या कुछ कहें मैंने उन्हें कहा कि आपकी कसम. वो शान्त हो गयीं मोदीजी का जादू ही कुछ ऐसा है वो मुझे उनका विरोधी समझती हैं पर जिसका विरोध होता है उसका आकर्षण भी उतना भी गाढ़ होता है.

 मैंने उनसे ये भी कहा कि सोमवार को उपवास भी  रखूँगा आप भी रखना और बेटी को भी  औऱ बेटे को भी बताना. उन्होंने हँसकर कहा आप दल बदलू हो. आप उनकी बुराई भी करते हो और प्रार्थना भी करते हो. फिर उन्होंने सी.ए. बिटिया से वात करा दी और मैंने उससे देश के प्रधानमंत्री की नोटबंदी से उनकी जान को बढ़े ख़तरे से बचाने के लिए आज सोमवार को व्रत रखने को कहा तो उसने खुश होकर कहा हां मैं रखूँगी चार्टड एकाउन्ट होने के नाते अर्थव्यवस्था में व्याप्त धांधली का उसे पता है.
      
अंत में अपने चाहने वालों से अनुरोध करता हूँ कि मैं अपने जीवन काल में आदरणीय इन्दिरा गांधीजी के बाद एक शक्तिशाली प्रधानमंत्री को देख रहा हूँ. ऐसी हस्तियाँ हर रोज़ पैदा नहीं होतीं. डॉ.इक़बाल के शब्दों में कहूँ तो

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है.
बड़ी मुश्किल में होता है चमन में दीदावर पैदा.

हम भले किसी भी जाति और धर्म से तालुक्क रखते हों  हमें देश के प्रधानमंत्री की दीर्घायु के लिए अपने इष्टदेव से प्रार्थना करें व्रत- रोज़ा रखें जिससे देश के दुश्मन किसी तरह कामयाब न हों.
प्रार्थना के साथ साथ देश के किसी भी कोने में  देश विरोधी  एवं आपसी भाईचारे को बिगाड़ने के रचे जा रहे षडयंत्र से उस क्षेत्र के प्राधिकारी को अवगत करें. ये हम सभी भी दायित्व है मात्र राज्य या केन्द्र सरकार का ही नहीं.

मैंने प्रधानमंत्री मोदीजी के नोटबंदीपर किये सर्जीकल  स्ट्राइर पर आज एक दिन का उपवास  भी रखा है जिस दिन वे कालेधन के स्त्रोत प्रोपर्टी और सोने पर भी स्ट्राइक करेंगे तब पूरे 9  दिन का व्रत रखूंगा जैसा मैं मां दुर्गा के नवरात्रि पर हर साल रखता हूँ. लोग उनके इस स्ट्राइक का बेसब्री से इंतज़ार कर रहें हैं वे देरी न करें अभी आम लोग परेशान हुए हैं और नाराज़ है पर जैसे ही बिल्डर प्रोपर्टी जमीन माफियां पर टूटेंगे लोग शान्त हो जायेंगे और अपने  सब दुख भूल जायेंगे. 

प्रिंसीपल डॉ.सुभाष भदौरिया ता.२१-११-२०१६