गुरुवार, १ अक्तूबर २००९

चूजों की हिफाज़त का जिम्मा सांपों को अगर दोगे लोगे.

video

ग़ज़ल
चूजों की हिफाज़त का ज़िम्मा सांपों को अगर दोगे लोगो.
सामान तबाही का अपने तुम खुद ही कर लोगे लोगो.

उड़ते हैं हवाओं में वे तो हालात ज़मी के क्या जाने ?
सरहद से उठेगी जब आँधी पत्तों से बिखर लोगे लोगो.

करते हो किनारों पे मस्ती मौज़ो का इल्म नहीं तुमको,
पानी जो तुम्हारे सर से गया तुम खुद ही सुधर लोगे लोगो.

तुम चाँद को रोते हो अकसर पानी ही नहीं, खड्डे भी वहां,
सब राज़ अयां हो जायेंगे जब उससे गुज़र लोगे लोगो,

फिरते हो बहुत सहमे सहमे नज़रों को झुकाये रहते हो,
जब ज़ुल्म से आँख मिलाओगे दावा है निखर लोगे लोगो.

बरसों का तज़ुर्बा है अपना तुम भी तो इसे अज़मा देखो,
जूझोगे अँधेरों से जब जब कुछ और संवर लोगे लोगो.


रावण चहुँ ओर यहाँ पर हैं सीता का रुदन भी ज़ारी है,
तुम ही हो राम तुम्हीं लक्ष्मन कब इनकी ख़बर लोगे लोगो.
डॉ.सुभाष भदौरिया. ता. 01-10-०९

ये ग़ज़ल उपरोक्त वीडियो देख कर लिखी थी। ये तमाशा किस लिए किया जा रहा है न तो चूजे का पता न सांप को। पार्श्व में आती चीत्कार की आवाज़े बहुत कुछ कहती हैं। इस वीडियो के साथ ये ग़ज़ल दुबारा पेश है। वीडयो पर क्लिक कर इस अमानुषी खेल को ज़रूर देखें.

सोमवार, २८ सितम्बर २००९

घर छोड़ के ना जाओ सैंयां हम लोग पड़ें तोहरे पैंयां.

ग़ज़ल
अय ब्लागे-चमन देखो तो सही ये कैसे ज़माने आये हैं.
ये कल के लेंड़ हगे हमको ब्लागिंग समझाने आये हैं.

चड्डी को उतारे फिरते थे अपने जो मुहल्ले के छोरे,
आया जो बुढ़ापा अब अपना आँखें वो दिखाने आये हैं.

सब मिल के करें ऐसी-तैसी वे सहन करें बोलो कब तक ?
बाणी को लगाकर वे ताला अब मौन सिखाने आये हैं.

घर छोड़ के ना जाओ सैंयां, हम लोग पड़े तोहरे पैंया,
होटों पे सभी के अब देखो कैसे ये तराने आये हैं.

आँखों में बचाकर के रखना अश्कों की बरसातें लोगो,
बातों में अंगारे लेकर के कुछ आग लगाने आये हैं.

मैंदा को कभी हम ना छोड़ें, धड़ भी तो लड़े गिरते गिरते,
पुरखों से हमारे पास यही हाथों में ख़ज़ाने आये हैं।

डॉ.सुभाष भदौरिया।ता.२८-०९-०९

आज ज्यों ही ब्लागबाणी को खोला और जो देखा वो बहुत ही पीड़ा दायक था.
कल ही तो अपने कॉलेज के छात्रों को ब्लागबाणी हिन्दी ब्लाग का सबसे बड़ा एग्रीगेटर इंटरनेट के माध्यम से बताया था. इस पर तुरंत हिन्दी ब्लाग जगत की गतविधियों का पता चलता है. अब उसके निधन की सूचना देना बहुत ही दुष्कर होगा. जो लोग पंसद और ना पंसद का झमेला ले के बैठे हैं उनसे इतना ही कहना है कि,
वक्त सौ मुंसिफ़ों का मुंसिफ़ है वक्त आयेगा इंतज़ार करो.
ब्लागबाणी के कर्ता धर्ता मानसिक शांति के लिए इसे बंद कर रहे हैं जब कि ऐसा नहीं होगा. ब्लाग जगत के भूत प्रेत, चुड़ैल, पिशाच उन्हें स्वप्न में भी दिखायी देंगे. वे और व्यग्र हो जायेंगे शयनकक्ष में भी दुष्ट आत्माओं का प्रवेश हो जायेगा सावधान.
बेहतर है हमारे जैसै ओझाओं की सेवा लें और इन तमाम व्याधाओं से मुक्त हों. आज आसुरी शक्तिओं पर विजय का दिन था और उन्हें वैराग्य सूझा.
हिन्दी कवि की पंक्तियां याद आगयी –
जिसकी पूँछ उठा के देखा मादा निकला.
किसी ने थोड़ा क्या उकसाया कि छोड कर मैदान चल दिये. जाओ जब देश जैसै तैसे चल रहा है तो ब्लॉग लीला भी ज़ारी रहेगी. आमीन.







सोमवार, १४ सितम्बर २००९

हम तो रिसर्च कर रहे हैं आटा दाल पे.

ग़ज़ल
वो तो उलझ के रह गये गोरी की चाल पे.
हम तो रिसर्च कर रहे हैं आटा दाल पे.

सूखे पड़े थे कोई उन्हें पूछता न था,
बारिश हुई तो आ गये नाले उछाल पे.

अँधों को रोशनी से कोई वास्ता नहीं,
पाबन्दी वो लगा रहे जलती मशाल पे.

मँहगी हुई है ज़िन्दगी सस्ती है मौत क्यों ?
बगलें वो झांकनें लगे मेरे सवाल पे.

नंगों को क्या हया वो तो नाचे हैं रात दिन,
ताली बजा रहे हैं सब उनके कमाल पे.

दुश्मन से कब करोगे तबाही का फैसला ?
ख़ामोश हो गये हैं वे मेरे ख़याल पे।
उपरोक्त तस्वीर हमारी है सब कहते हैं हमारे अहमदाबाद से दूर ट्रांसफर कर एक गाँव में निष्काषित किये जाने के बाद हमारे चेहरे का नूर चला गया।बाख़ुदा हमारे मिजाज़ की तुर्षियां अभी भी वैसी हैं जैसी पहले थीं।बस कभी बेटी की याद जब आती है तो आँख भर आती है और सब ख़ैरयित है खाना तो फकीरों की तरह कहीं न कहीं मिल ही जाता है पीना एन.सी.सी. के कमान्डरों के साथ ही छुट गया कर्नल बोबो का अपने हाथ से अफ्सर्स की पार्टी में जाम भरना और अभी तक याद है। कर्नल शक्तावत की पीने की ट्रेनिंग देना मेरी फेर विदाइ पार्टी में तो तुम्हें पीने ही होगी यार धीरे धीरे पिया करो। मेरा डरते डरते कहना सर वो घर में घुसने नहीं देगी उनका पूछना .कौन सर मेरी बाइफ। सर पड़ौसी इकट्टे होंगे। उनका कहना केंप में रुक जाओ घर जाओ ही मत। मेरा कहना ठीक है सर।। यहां तो प्रिंसीपली का लेबल सिगरेट भी पियो तो चुपके से । पत्नी से दूर रहने का भी आनंद भी कुछ और है वहां तो पानी भी पूछ कर पीना पड़ता है दुश्मनों ने भी क्या इनायतें की हैं आगे भी ज़ारी रहें इसी उम्मीद के साथ
डॉ. सुभाष भदौरिया. ता.14-09-09

शुक्रवार, ४ सितम्बर २००९

स्वर्णिम रथ का शहेरा में आगमन

स्वाइन फ्लू का नाट्यमंचन सावधान साहेबान।
मंचस्थ महानुभावो में संसदीय सचिव गाँधीनगर श्री जयद्रथसिंहजी परमार उनके दायें शहेरा विधान सभा के लोकप्रिय एम.एल.ए.श्री जेठाभाई भरवाड तथा बायें पंचमहाल जिले के डी.एस.पी.साहब विद्यार्थियों की नाट्य प्रस्तुति निहारते और पार्श्व में स्वर्णिम गुजरात के शिल्पी मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की छवि पर्दे पर सब पर नज़र रखे हुए। तस्वीर पर क्लिक कर स्पष्ट चित्र देखें.
सरकारी आर्टस कॉलेज शहेरा के छात्र-छात्राओं ने अपनी स्वाइन फ्लू की नाट्यकृति द्वारा ता.24-08-09 श्रीमती एस.जे दवे स्कूल के प्रांगण में हजारों नागरिकों का मन मोह लिया. ता.24-08-09 के रोज़ स्वर्णिम गुजरात संकल्प रथ के स्वागत में सुब्ह 11 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम में कॉलेज की धमाके दार प्रस्तुति एच1 एन 1 के रूपमें वांणद मनीष और पठान शफ़ीक ने मात्र बच्चों और बूढ़ों को डराया तो दूसरी तरफ स्वाइन सुअर का रोल अदा करने वाले छात्र भी बच्चों को लोट पोट कर रहे थे. दूसरी तरफ कॉलेज के इंचार्ज प्रिंसीपल डॉ. सुभाष भदौरिया निर्देशक के रूप में पार्श्व से संचालन कर विशिष्ट ध्वनियों एवं आवाज़ के उतार चढ़ाव से जानकारी से साथ सावधानी बरतने को हजारों लोगों को आकृषित कर रहे थे. डॉक्टर का किरदार अदा कर रहे द्वितीय वर्ष बी.ए. के छात्र पठान परवेज़ और प्रथम वर्ष की छात्रा सबरवाला समीना ने असली डॉक्टरों को मात दे दी. हजारों स्त्री पुरुषों बच्चों को समझाते हुए वे कह रहे थे.
भाइयो स्वाइन फ्लू से डरने की ज़रूरत नहीं हैं उससे सावाधान रहें गंदगी न करें, कचरा इधर उधर न डालें खास कर स्वाइन सुअर को अपनी वस्ती से दूर रखें. स्वाइन फ्लू के वाइरस में सुअरों और इंसानों मे पाया जाने वाला जेनेटिक मटीरियल भी होता होता है. हाथ साबू से धोयें क्योंकि रोग ग्रस्त व्यक्ति के स्पर्श से इसके वाइरस आप तक नाक और मुँह के ज़रिये कब पहुँच जायेंगे आपको पता भी नहीं चलेगा.दूर से सलाम करलें हाथ मिलाने की अभी ज़रूरत नहीं हैं. डॉ.समीना देशी घरगथ्थु इलाज़ तुलसी के साथ अदरक की चाय. हल्दी मिला दूध हरे शाक भाजी,प्रवाही पदार्थों के प्रयोग पर ज़ोर दे रही थीं. लोग उनकी बातें बड़े ध्यान से सुन रहे थे. चेहरे पे मास्क डॉक्टरी लिबास और गंभीर आवाज़ का उतार चढ़ाव.
दूसरी तरफ डॉक्टर परवेज़ लक्षणों पर रोशनी डालते हुए सबको चौकन्ना रहनेकी सलाह दे रहे थे.एच.1 एन1 स्वाइन फ्लू इनफ्लुएंजा के वाइरस अति शूक्ष्म होने के कारण श्वसन तंत्र नाक और गले के माध्यम से फेफड़ों को क्षतिग्रस्त कर प्राण घातक बन जाते हैं. मरीज की नाक से पानी बहना, तेज जुकाम गले में खराश डायरिया, बारम्बार उबकाई का आना कफ और सांस लेने में भारी तकलीफ. समय पर इलाज के साथ सावधानी भी ज़रूरी. क्योंकि इसके अति शूक्ष्म वाइरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को अपनी चपेट में बहुत जल्द लेते हैं.
थ्रीलीयर सर्जीकल मास्क से अधिक सुरक्षित एन 95 मास्क का प्रयोग मरीज और देखभाल करने वाले को इस्तेमाल करना चाहिए.
अभी तो उन्होंने अपना अस्पताल सँभाला ही था कि मरीज के रूप में लाटी टेकते बूढे का रोल करते आ गये द्वितीय वर्ष के छात्र सुखदेव खांसते छींकते, कराहते जैसे अब बचने वाले नहीं हैं और डॉक्टर परवेज़ ने उन्हें टेमी फ्लू देते हुए तुरंत अस्पताल में भर्ती करनेकी सलाह दी साथ रीयल टाइम पी.सी.आर. टेस्ट कराने को कहा रिपोर्ट 24 में आने के बाद ही पोज़ीटिव स्वाइन फ्लू का पता चलेगा. तो दूसरी तरफ डॉ.समीना अपने पेसेन्ट को डांटते हुए कह रहीँ थी पेट में दर्द हो रहा बाहर का चक्खा मिट्ठा बंद करों. लो ये दवा और जाओ अपने घर.
इतने में स्टेज पर कुछ छात्र और छात्रायें स्टेज पे कचरा जूठन फेंक कर इतराती हुईं चला गयीं. बस फिर क्या था सुअर को रोल अदा करे रहे प्रथम वर्ष के दो छात्र घुटनों के भर तेज चाल चलते हुए जूठन और कचरे को छितरा का खाने लगे उन्होंने साल से अपने मुँह ढक रखे थे. स्कूली बच्चों पेट पकड़ कर हँस रहे थे.
पर फिर एक बार एच1 और एन1 वाइरस का पात्र अदा करने वाले द्वितीय वर्ष के छात्र वांणद मनीष और पठान शफीक ने सुअरों को जूठन खाते देख कर भयानक ठहाका लगाया. उनके मास्क और नकाब साथ ही लंबे डील डौल और भारी आवाज़ ने एक बार फिर दर्शकों को भयभीत कर दिया. एच1 वाइरस मनीष पास ही बैठे स्कूली बच्चे को पकड़ लिया, बच्चा तो दूसरे एन. वाइरस शफीक पठान ने एक पास ही बैठे कमजोर बूढे को धर पकड़ा वे स्टेज के साथ साथ संकेतो से कम उम्रं के बच्चे, बूढे. और गर्भवती महिलाओं को अपना शिकार बता रहे थे. साथ ही ये भी कह रहे थे मेक्सिको, पूना, बंगलौर, अहमदाबाद और अब पंचमहाल का गाँव शहेरा यहां तो लोग कम भुंड ज्यादा गंदगी के ढेर हा हा हा. पूरे गुजरात के पंचमहाल जिले को चट कर जायेंगे. नती गंदगी हा हा. लोगों के डर को दूर करते हुए फिर डॉक्टर परवेज़ और डॉक्टर समीना ने कहा भाइयो डरो मत आज संकल्प लो गंदगी नहीं करोगे, सफाई रखोगे अपने मुख्यमंत्री नरेन्द्रमोदी का मंत्र याद रखो स्वाइन फ्लू की असली दवा. आपणुं गुजरात निर्मण गुजरात. हमारा गुजरात निर्मल गुजरात. जय जय गरवी गुजरात. इस प्रकार आधे घंटे तक लोग स्वाइन फ्लू से के नाट्यकृति में जकडॉ के रह गये. शहेरा क्षेत्र के लोकप्रिय एम.एल.श्री जेठाभाई भरवाड ने दूर दूर गुजरात संकल्प रथ यात्रा का अभिवादन करने एवं गुजरात के निर्माण में संकल्प करने आये पंचमहाल जिले के निवासियों को स्वाइन
फ्लू से जागृत करने के लिए सरकारी आर्टस कॉलेज शहेरा के इंचार्ज प्रिंसीपल डॉ.भदौरिया और कॉलेज के छात्र छात्राओं को एक सुंदर प्रासंगिक अछूती कृति को प्रस्तुत करने के लिए बधाई दी. स्वर्णिम गुजरात संकल्प ज्योतिरथ कार्यक्रम के अध्यक्ष संसदीय सचिवश्री जयद्रथसिंह परमार(अन्न एवं नागरिक पूर्ति विभाग) जून 2008 में खुली पंचमहाल जिले की प्रथम सरकारी कोलेज में प्रथम वर्ष बी.ए.में गुजरात युनिवर्सिटी में प्रथम श्रेणी में आने वाले आठ छात्र छात्राओं को प्रमाण पत्र देकर आशीर्वाद दिये. शहेरा जैसे पिछले मुस्लिम बाहुल्य पिछडे.गांव में आज़ादी के बाद उच्चशिक्षा के लिए प्रथम सरकारी कोलेज को अपने दीर्घ परिश्रम से खुलवाने वाले शहेरा विधानसभा के क्षेत्र के एम.एल.ए,श्री जेठाभाई भरवाड साहब अपने लगाये पेड़ं की बढ़ती शाखाओं को देख कर बहुत खुश हुए खास कर जब कार्यक्रम के उदघोषक ने कहा कॉलेज में आठ प्रथम श्रेणी आने वाले समूह में पांच छात्राओं ने बाजी मारी है मुख्यमंत्रीमोदीजी ठीक ही कहते हैं दीकरी ने साचवों ए तमने साचवशे अर्थात बेटी की सही देखभाल करो पढ़ाओ लिखों वो तुम्हें बुढ़ापे में सँभालेगी देखो उनके अंक.

1 -चावडा हंसाबेन 72% लाकर अपने गाँव और बुज़र्गों का नाम रोशन किया. 2-देवराजानी वनीता 67, 3-देवराजानी ममता 66,
4-देवराजानी जिज्ञा 64, 5-राठौड़ शीतल 65, 6-अंसारी बुरहान, 7-67 मारवाडी पंकज 64, 8-चावडा रणजीत 64 प्रतिशत अंक प्राप्त किये. सरकारी कॉलेज शहेरा का तमाम बुनियादी सुविधाओं के न होने के पश्चात समग्र कोलेज का प्रथम वर्ष बी.ए. के 84 प्रतिशत परिणाम पर इंचार्ज प्रिंसीपल डॉक्टर भदौरिया को फिर से मंचस्थ महानुभावों ने सराहा. छात्र हमसे कह रहे थे जमा दिया सर कॉलेज को जमीन ,फर्नीचर सब मिल जायेगा. अब आप चिंता छोड़ो पिछले साल की तरह आपको गाँव की प्राथमिक स्कूलों से हमें परीक्षा दिलवाने के लिए बेंच नहीं मांगनी पड़ेगी, पिछली साल तो सर जिस स्कूल में कोलेज चल रही थी वहां क्लास 10 की सुब्ह शाम 12 की परीक्षा होने से कोलेज के स्टाफ सभी को 200 मीटर से बाहर कर दिया गया था. मैनें कहा आज रात को फिर से हमें दूसरा शो करना रात्रि में हमारी कॉलेज का लोकनृत्य रंग जमायेगा .पर रात्रि में प्राथमिक स्कूल की चपल बालाओं लोकनृत्य के वो करतब दिखाये हम दंग रह गये हैं. प्राथमिक स्कूलों का राजस्थानी और डांगी नृत्य कॉलेज के लोक नृत्य और अडियाद पी.टी.सी कोलेज के गरबे पर भारी पड़ गया. छोटे छोटे बच्चे बच्चियां जिस फुर्ती से पिरामिड बनाते हवा मे जंप करते मैं तो उनकी कला पर मुग्ध था. हमारा सुब्ह वाहवाही का ख़ुमार शाम के ढलते ही उतर गया. मैं इसके लिए उनके प्राइमरी गुरुओं को ढेर सारी बधाई देकर धन्य समझता हूँ.

इंचार्ज प्रिंसीपल सरकारी विनयन कॉलेज शहेरा जिला पंचमहाल. ता.04-09-09

गुरुवार, ३ सितम्बर २००९

सौ दिन के करिश्मे का कुछ होश करो साहब ?

ग़ज़ल
ये कैसा उजाला है, ये कैसी दिवाली है.
सब्जी भी हुई गायब, खाली मेरी थाली है.

हमने तो कटोरी में डुबकी को लगा देखा,
है दाल बहुत मँहगी और जेब भी खाली है.

सौ-दिन के करिश्मे का कुछ होश करो साहब,
सूरत तो बहुत भोली, पर चाल निराली है.

लोगों की लुगाई ने, घर ऐसे सँभाला है,
शक्कर न मिली गुड़ की,फिर चाय बनाली है.

कानों में कोई जैसे, तेजाब उड़ेले हो,
मँहगाई ने लोगों की अब नींद चुराली है.

गालों पे तुम्हारे तो सुर्ख़ी है बहुत सुर्ख़ी,
ख़ूँ पी के गरीबों का जो प्यास बुझाली है.

हालात ने हाथों को है बाँध रखा अब तक,
हैं तीर भी तरकश में और दिल भी बबाली है.

आवाज़ पे मारे हैं, हम तीर निशाने पे
पुरखों से मिली थाती हमने तो सँभाली है.

तुम अपने सरों की अब परवाह करो लुच्चो,
पगड़ी जो मेरी तुमने सड़को पे उछाली है.


डॉ.सुभाष भदौरिया. ता.03-09-09

बुधवार, २ सितम्बर २००९

मोदीजी आँखें खोलिए,राज्य के शिक्षकों के दुख देखिए.

मोदीजी आँखें खोलिए, राज्य के शिक्षकों के दुख देखिए.
ता. 5 सितम्बर गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री श्रीनरेन्द्रमोदीजी ओनलाइन डी.टी.एच. के माध्यम से राज्य के तमाम शिक्षकों, छात्र-छात्राओं को संबोधन करने वाले हैं. शिक्षकों का सम्मान भी किया जायेगा. छात्र प्रश्नोत्तरी भी करेंगे. सभी स्वर्णिम स्वर्णिम गायेंगे. जब की उच्च शिक्षा विभाग की हकीकत घोर अंधकारमय हैं. केन्द्रीय एच.आर.डी. डिपार्टमेन्ट के मंत्री श्री कपिल सिब्बलजीhttp://www.education.nic.in/ministerpage.asp ने गुजरात के उच्चशिक्षा विभाग में फैले भृष्टाचार की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी भी गठित कर दी है ऐसा राज्य के दैनिक पत्र कह रहे हैं. हमने अपनी पिछली कई पोस्टों में कुछ सच्चाइयों को उजागर किया था. स्वयं मुख्यमंत्रीजी को मेल कर उच्चशिक्षा विभाग में चल रहे भृष्टाचार के खिलाफ आँखें लाल करने की विनती की थी पर उन्होंने आँखे लाल करने की बात तो दूर रही आँखें खोली भी नहीं. कम से कम अब तो शिक्षक दिन के पूर्व खोललें तो गरीब शिक्षको का मोक्ष हो सकता है.
राज्य के सरकारी गैर सरकारी कोलेजों में पढाने वाले हजारों शिक्षकों को छठा वेतनमान अभी तक नहीं दिया गया. राज्य के तमाम विभागों में छठा वेतनमान दिया जा चुका है. शिक्षामंत्री रमणवोराजी ने पन्द्रह अगस्त से पहले देने की घोषणा भी की थी पर अभी तक फाइल शिक्षा सचिव अडियाजी और वित्त सचिव के बीच घूम रही है. राज्य की कॉलेजों के शिक्षक शिक्षिकायें रो रहे हैं दाल अस्सी रुपये किलो होगयी सब्जी के दाम,बच्चों की फीस सब बढ़ गयी पर तनखाह ज्यों की त्यों.
सरकारी कोलेजों का सबसे बुरा हाल है रेग्युलर प्रिंसीपल ही नहीं. सरकारी अध्यापकों को 15 साल से प्रमोशन न देने के कारण कोलेजों को इंचार्ज प्रिंसापल से घसीटा जा रहा है. 25 सरकारी अध्यापकों की प्रमोशन लिस्ट को गुजरात राज्य सेवा आयोग ने दो मास पूर्व मंजूरी दे दी फिर भी अभी तक कोई प्रमोशन के आदेश नही हुए.मुख्यमंत्रीजी फाइल पर सही करें तब नियुक्तियां हो. शिक्षक दिन से पूर्व मुख्यमंत्रीजी सही कर राज्य की सरकारी कोलेजों में रेग्युलर प्रिंसीपल के आदेश कर सकते हैं जिससे सरकारी कोलेजों का स्तर सुधरे. हमारा लिस्ट में 18 वां नाम है. प्रमोशन के आर्डर की राह देखते देखते अध्यापकों की आँखें पथरा गई. हमें मित्रों ने सलाह दी चढ़ौती चढ़ावो, मन्नत मानो ऐसे ही रेग्युलर प्रिंसीपल बनना चाहते हो. अब हम कहां से चढ़ौती चढ़ायें, मन्नत मानें. हमारे पांच साल से इंक्रीमेंट शिक्षा कमिश्नर श्रीमती जयन्ती रवीने अटका रखे हैं. राज्य के शिक्षा विभाग में सर्वोच्च योग्यतायें 1990 से पीएच.डी. एम.ए. गोल्डमेडालिस्ट गुजरात युनिवर्सिटी 18 साल का अनुभव, एन.सी.सी की 10 वर्ष सेवा केप्टन रेंक पूरे केरियर में एक मेमो भीनहीं. फिर भी पांच साल से आर्थिक मानसिक परेशान किया जा रहा है. कारण राज्य के उच्च शिक्षा विभाग में फैले भृषटाचार के बारे में हम क्यों लिखते है
शिक्षा कमिश्नर श्रीमती जयन्ती रवी से जब भी मिलो कहती हैं तुमने मुख्यमंत्री को शिकायत की है जाओ उन्हीं के पास. दूसरी तरफ मुख्यमंत्रीजी द्वारा खोली गई गुजरात नेशनल लॉ युनिवर्सिटी गाँधीनगर में हमारे सुपुत्र 4 थे साल में पढ़ रहे है एक लाख हर साल फीस भरनी पढ़ती है. सो हमारे इकलौते एकाउन्टमें 1000 रुपये से ज़्यादा होते ही नहीं कभी कुछ हो गया तो क्रियाकर्म के खर्च की जिम्मेदारी मित्रों को उठानी होगी.
फिर हमारी आत्मा मुख्यमंत्रीजी के आसपास भटकेगी. पर उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला क्योंकि उनके साथ तो हमेशा कई आत्मायें फिरती रहती है गोधरा के बाद तो पूरी पलटन ही है. वे योगी हैं सो सब दूर रहते हैं.
गुजरात आर्टस एवं सायंस कोलेज अहमदाबाद से शिक्षा कमिश्नर श्रीमती जयन्ती रवी ने निष्काषित कर 150 किमी.शहेरा गाँव में इंचार्ज प्रिंसीपल का चार्ज देकर फेंक दिया. किसी भी राज्य में एन.सी.सी की युनिट चलाने वाले अध्यापक को एन.सी.सी. बिना की कॉलेज में ट्रांसफर नहीं किया जाता. पिछले पाँच साल से सिलेक्शन ग्रेड के इंक्रीमेंट रोककर हैरान किया जा रहा है 98-99 से साल के सी.आर.में हमारे इंचार्ज प्रिंसीपल आर. ज़ेड सैयद ने लिख दिया था सूझ नहीं है वे रिटायर्ड होकर अमरीका चले गये हमारी मिट्टीपलीद हो रही है. उच्चशिक्षा कमिश्नर की कचहरी में लीगल एडवाइज़र के रूपमें कार्यरत बहुत ही जूनियर राज्यशास्त्र के अध्यापक श्री डी.डी. पटेल सरकारी आर्टस कोलेज गाँधीनगर में पढ़ाने की जगह फाइल पर गलत सलाह देकर राज्य सरकार के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा केश करवाते हैं. गुजरात हाईकोर्ट में खुद एफीडेविट न कर ओडिट आफीसर एच.सी. पटेल से करवाते हैं. हमारे केश में उन्होंने 98-99 के सी.आर में सूझ नहीं है कारण देकर सिलेक्शन ग्रेड पांच साल देरी से देने की सलाह दी.
जब हमें कोई सूझ नहीं है तो फिर शिक्षा कमिश्नर श्रीमती जयन्ती रवी(I.A.S.) हमें इंचार्ज प्रिंसीपल का चार्ज देकर सरकारी कोलेज शहेरा क्यों भेजा. हमने इसकी लिखित शिकायत राज्य के शिक्षा सचिव श्री हसमुख अडिया को की, राज्य के मुख्यमंत्रीजो पचासों बार मेल से बताया हे दया निधान आँखें खोलो . राज्य के तमाम विभागों छटा वेतनमान का फिक्सेसन ओनलाइन किया गया परंतु सरकारी कोलेज के अध्यापकों की डी.पी.सी. कमेटी चेयरमेन डॉ.आर.यु.पुरोहित, ओडिट आफीसर एच.सी.पटेल सरकारी अध्यापकों के भाग्य निर्माता हैं.
पुरोहित जी बहुत ही जूनियर अध्यापक होने के बावजूद किस जादू से उच्चशिक्षा कमिश्नर कचेहरी में जोइन डायरेक्टर बने बैठे हैं ,ओडिट आफीसर एच.सी.पटेल सरकारी कोलेजों के इंचार्ज जोइन डायरेक्टर का चार्ज संभाले हुए हैं. गाँधीनगर सरकारी आर्टस कोलेज में राज्य शास्त्र पढ़ाने की जगह डी.डी. पटेल उच्चशिक्षा कमिश्नर कचेहरी में लीगल एडवाइज़र बन ज़्यादा से ज़्यादा के सरकार के खिलाफ क्यों केश करवाते हैं. मुख्यमंत्री नरेन्द्रमोदीजी आँखें खोलें तो पता चले. उपरोक्त मुख्य मंत्रीजी की तस्वीर हमेंउनकी साइड
http://narendramodi.in/login/register
पर मिली. राज्य के तमाम नागरिकों को उन्होंने हिन्दी गुजराती,अंग्रेजी, संस्कृत. मराठी भाषा में अपनी फरियाद करने की छूट दी है. हम राज्य के अन्य पीड़ित नर नारियों को इस साइड पर जाकर अपनी वेदना व्यक्त करने का सुझाव दे रहे हैं. सच को कहने के ज़ोख़म हमने उठाये हैं अहमदाबाद अपने परिवार से बिछुड़े साल हो रहा है उसका दुख नहीं दुख तो इस बात का है कि उन्होंने गुजरात कोलेज अहमदाबाद की एन.सी.सी. से अलग कर के राष्ट्र सेवा का आखिरी अवसर भी छीन लिया. हैरत तो इस बात की है कि ये देश के नंबर वन मुख्यमंत्री माने जाने वाले नरेन्द्रमोदीजी के राज्यमें उच्च शिक्षा विभाग में ये सब चल रहा है और वे आँखें बंद कर ध्यान मग्न हैं. न जाने उनकी आँखें कब खुलेगी, कब उनका ध्यान भंग होगा.
इंचार्ज प्रिंसीपल डॉ.सुभाष भदौरिया सरकारी आर्टस कॉलेज शहेरा ता.02-09-09

मंगलवार, २५ अगस्त २००९

जिन्ना जिनको हैं प्यारे बहुत वे लोग यहाँ क्या करते हैं ?

ग़ज़ल
सरदार हमें प्यारे हैं बहुत, जो उनको हाथ लगायेंगे.
गुजरात के बेटे गुस्ताख़ी उनकी कैसे सह पायेंगे.

ज़िन्ना जिनको हैं प्यारे बहुत, वे लोग यहाँ क्या करते हैं ?
खायेंगे कहीं का और ढोंगी, फिर गीत कहीं के गायेंगे.

दामाद की मानिंद छोड कभी, आये थे पार दरिन्दों को,
मंज़र वो देखे हैं जिनने, वे कैसे उन्हें भुलायेंगे.

बादल ने ढका है सूरज को, वो अस्त समझते हैं हमको,
हम वक्त के आने पर उनसे, उनका थूका चटवायेंगे.

थाली से हुई सब्जी गायब, सब दाल को तरसे हैं अब तो,
दिल्ली में बैठ सभी जोकर, अम्मा के पांव दबायेंगे.

ख़ामोश अभी हैं तो हमको, बुज़दिल न समझलेना लोगो,
बिगड़े जो कभी हम अहले वतन फिर सबकी बाट लगायेंगे.

ये ग़ज़ल उपरोक्त तस्वीर और ताज़ा हालात से वाब्सिता है जलने वालों से कह दो ज़हर खालें. डॉ.सुभाष भदौरिया.ता.25-08-09

रविवार, ९ अगस्त २००९

मोदीजी शिक्षा जगत के भृष्टाचारियों से हमें बचाओ.
गुजरात राज्य के शिक्षा विभाग में व्याप्त भृष्टाचार की उस समय पोल खुल गयी जब राज्य के शिक्षा इन्सपेक्टर एच.आर.पोला अंग्रेजी माध्यम की स्कूल में दो छात्राओं को एडमीशन दिलाने में रिश्वत लेते धर लिये गये. सारा आपरेशन पेरेन्ट ने खुद किया. उन्होनें शिक्षा इन्सपेक्टर की ओडियो वीडियो बना अहमदाबाद के अंग्रेजी दैनिक अहमदाबाद मिरर में छपा दी. राज्य कि शिक्षा सचिव अडियाजी ने शिक्षा इंन्सपेक्टर एच.आर. पोला को डिग्रेड करते हुए राज्य के दूर दराज के इलाके में फेंक कर एन्टी करप्सन ब्यूरो को जांच दे दी. आप इसे इस लिंकपर क्लिक कर देखें. http://www.ahmedabadmirror.com/index.aspx?Page=article&sectname=News%20-%20Latest&sectid=2&contentid=2009071420090714032944906bea3a4c6
राज्य के उच्च शिक्षा विभाग की भी ओडियो वीडियो ज़ल्द आने वाली है. राज्य की प्राया सभी सरकारी कॉलेजो में रेग्युलर प्रिंसीपल न होने से अध्यापक अध्यापिकाओं का आर्थिक शारीरिक शोषण किया जाता है. राज्य की तमाम सरकारी कॉलेजों के 200 अध्यापकों को पिछले पाँच 10 साल से अटके सीनियर सिलेक्शन ग्रेड ता.19-02-09 को गुजरात कोलेज अहमदाबाद में बैठी डी.पी.सी कमेटी डा.आर.यु. पुरोहित चेयरमेन ओडिट आफीसर एच.सी. पटेल ने मंजूर किये. इसमें काफी लेन-देन हुआ.
एक दृष्टांत काफी है. गुजरात आर्टस सायंस कोलेज अहमदाबाद की अंग्रेजी की अध्यापिका डॉ. तृप्ति बहन वोरा का 2000 से अटका सिलेक्शन ग्रेड मंजूर कर 4,50,000 (चारलाख पचास हजार) की एरियर्स रकम मंजूर कर गुजरात आर्टस सायंस कोलेज के इंचार्ज प्रिंसीपल पीयूष पंड्या ने चुका दी. गुजरात आर्टस सायंस कॉलेज के दूसरे 18 अध्यापकों को अभी ग्रांट नहीं है कह कर चुप करा दिया गया. हमारा 98-99 में सी.आर. खराब है कहकर सिलेक्शन ग्रेड पांच साल देरी से मंजूर किया गया.
कारण हम ओडिट आफीसर एच.सी.पटेल और डॉ.आर.यु. पुरोहित की लीला अपने ब्लाग पर लिखते हैं. हमें अहमदाबाद से 150 किमी. दूर शहेरा नई कोलेज में ता.01-01-09 के रोज इंचार्ज प्रिंसीपाल का चार्ज देकर उच्च शिक्षा कमिश्नर जयन्ती रवी द्वारा फेंका गया. किसी भी राज्य में एन.सी.सी. चलाने वाले अध्यापक को एन.सी.सी बिना की कॉलेज में नहीं फेंका जाता. पर उन्होंने ऐसा किया. हमारा वेतन गुजरात आर्टस सायंस कॉलेज में महकम होने से मिलता है काम 150 किमी. दूर तनखाह लेने अहमदाबाद आना पड़ता है हमारी बेटी 12 में अहमदाबाद और बेटा गुजरात नेशनल लॉ युनिवर्सिटी गाँधीनगर पढ़ता है
उच्चशिक्षा कमिश्नरश्री ने हाल में हमारी जगह पर सरकारी आर्टस कॉलेज गाँधीनगर से हम से काफी जूनियर हिन्दी अध्यापिका गार्गी बहिन का ट्रांसफर किया. हमने जोइन डायरेक्टर एच.सी. पटेल को पूछा हमें हमारी एन.सी.सी की जगह पर अहमदाबाद रखो. हम एन.सी.सी के ट्रेन्ड अफसर है जिसके पीछे राज्य तैयार करने में लाखों का खर्च करता है. वे बोले गार्गी का रिकमन्ड शिक्षा सचिव अडियाजी ने किया है. तुम भी कोई दबाव लाओ. हम कहां से दबाव लायें एक तो वैसे ही कुदरत ने हमें नर के रूप में जन्म देकर अन्याय किया. सरकारी नौकरी में नर नारी दोनों को किसी भी जगह नौकरी करने भेजा जाता है पर हमारे गुजरात राज्यमें विशिष्ट नारियों को कई रियायते हैं और हमारी ऐसी तैसी हुई है कभी भुज तो कभी आहवा डांग अब कहीं और नंबर लगेगा.
गुजरात राज्य के शिक्षा सचिव अडियाजी किसी भी करप्सन ओडियो वीडियो सी.डी. देने से ही कार्यवाही करते हैं. हमने उपशिक्षा सचिव विक्टर मेकवान से रूबरू मिलकर पूछा कि गुजरात राज्य सेवा आयोग ने जो 25 सरकारी अध्यापकों की लिस्ट 45 दिन पहले मंजूर कर भेजी आप हमें कब प्रमोशन देने वाले हैं उन्होंने कहां 15 साल तक प्रमोशन नहीं दिया गया थोड़ा धीरज रखो. मैने कहा सर उन्होंने मेरी गुजरात कोलेज की एन.सी.सी. छीनकर दूर 150 किमी. इंचार्ज प्रिंसीपाल बनाकर भेजा आप रेग्युलर प्रिंसीपाल के प्रमोशन की कार्यवाही क्यों नहीं करते. इसे जान बूझकर अटकाया जा रहा है एक तरफ हमारा इंक्रीमेंट अटकाकर शोषण हो रहा मुझे मज़बूरन ट्रेप करनी होगी. वे बोले जल्दी करो. उपशिक्षा सचिव विक्टर मेकवान और शिक्षा सचिव अडियाजी बहुत ही सज्जन हैं वे बिना ओडियो वीडियो प्रमाण दिये कार्यवाही नहीं करते.
देश के नंबर वन मुख्यमंत्री नरेन्द्रमोदीजी के राज्य में उनके सचिवालय से 10 कदम की दूरी पर गरीब मास्टर मास्टरनिओं पर ज़ुल्म हो रहे हैं. राज्य के तमाम विभागों में छटा वेतनमान दिया जा चुका है. मात्र सरकारी कोलेज के अध्यापक वंचित हैं .
देश के नंबर वन मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्रमोदीजी राज्य के बाढ़ ग्रस्त इलाकों की तो हवाई यात्रा कर ज़ाइज़ा लेते हैं कभी उच्चशिक्षा विभाग की यात्रा करें तो पता चले कहां क्या हो रहा है. हम तो बस इतना ही कहेंगे कि वे सरकारी कॉलेजों में रेग्युलर प्रिंसीपल के ज़ल्द से ज़ल्द से 25 सरकारी अध्यापकों को प्रमोशन देकर इस भृष्टाचार को रोकें.
इंचार्ज प्रिंसीपल सरकारी आर्टस कॉलेज शहेरा जिल्ला. पंचमहाल गुजरात.ता. 09-08-09

रविवार, १९ जुलाई २००९

मेरे हाथों से अब तक महक ना गई उनकी ज़ुल्फ़ों को छेड़े ज़माने हुए.

ग़ज़ल
मेरे हाथों से अब तक, महक ना गई,
उनकी ज़ुल्फ़ों को छेड़े ज़माने हुए.
मेरी सांसों का जादू है अब तक ज़वां,
हमने माना कि रिश्ते पुराने हुए.

ये कसक,ये तड़प, ये जलन, ये धुआँ,
उस मुहब्बत की बख़्शी ये सौगात है,
साज़ो-आवाज़ ये, शेरो-शायरी,
उनसे मिलने के कितने बहाने हुए.

वो मिले भी कब, अब तुम्हीं देखलो,
मेंहदी हाथों की बालों में जब आ गई,
मेरी रातों को अब फिर से पर लग गये,
मेरे तपते हुए दिन सुहाने हुए.

हाथ में हाथ फिर ले लिया आपने,
पेड़ सूखा हरा कर दिया आपने,
ज़िन्दगी की सुलगती हुई धूप में,
तेरी चाहत के फिर शामियाने हुए.

तेरी ही आश ने मुझको ज़िन्दा रखा,
मौत आयी बुलाने मना कर दिया,
तीर जब भी चले दुश्मनों के यहाँ,
एक हम ही तो थे जो निशाने हुए.

रुखी सूखी में हमने गुज़ारा किया,
उनकी चौखट पे सर ना झुकाया कभी,
अब तो सौदागरों को अफ़सोस है,
उनके बेकार सारे खज़ाने हुए.

डॉ.सुभाष भदौरिया ता.19-07-9

शुक्रवार, ३ जुलाई २००९

ग़ज़ल
मेरी जानेमन, मेरी जानेजां, मेरी चश्मेनम, मेरी दिलरुबा.
तेरे इश्क में, तेरी चाह में, दिल हो गया, मेरा बावरा.

मेरे पात सारे हैं झर गये, मैं तो ठूंठ में हूँ बदल गया,
तू समन्दरों पे बरस गयी, तेरी राह मैं रहा ताकता.

मेरी आँख ये है भर आयी क्यों, मेरे दिल में क्यों उठे हूक सी,
मेरा चैन सारा है छिन गया, तुझे क्या ख़बर, तुझे क्या पता.

मेरे दिल तू कोई ग़म न कर, अभी आँधियां हैं मचल रहीं,
तू चराग फिर से जला कोई, भले दिल तेरा हो बुझा- बुझा.

अभी रूप का बड़ा शोर है, अभी झूट का बड़ा ज़ोर है,
अभी इल्म चुप है खड़ा उधर, अभी सच बहुत है डरा-डरा.

मेरे हाथ भी हैं कलम हुए, मेरी खींचली है ज़बां मगर,
अभी सर मेरा है तना हुआ, वो है कह रहा कि झुका-झुका.

अभी हूँ जो मैं, तो कदर नहीं, कभी खो गया जो मैं भीड़ में,
ये ज़माना इक दिन देखना, मुझे ग़ज़लों में फिरे ढूँढ़ता.

डॉ. सुभाष भदौरिया. ता.03-07-09