सोमवार, 21 नवंबर 2016

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है.



देश के प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्रमोदीजी के देशहित में नोटबंधी  करने के कारण उनके दुश्मनों की  तादाद में भारी इज़ाफ़ा हो गया हैं. हमने देश के कई प्रधान मंत्रियों को खोया है जिनके रक्षक भक्षक हुए हैं पर अब हम दुबारा नहीं खोना चाहते.

इसलिए  ता.२०-११-२०१६ को  मोदीजी की दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की प्रार्थना करने मेरा और साथी अध्यापक श्री विनोदसर, श्री सुनीलसर, श्री जादवसर, श्री केतनसर गुजरात के पावागढ़ पर्वत पर विराजमान कालीमाँ के यहाँ जाना हुआ और माँ से प्रार्थना की कि मोदीजी इसी तरह आगे देशहित में कठोर निर्णय लेते रहें आप उनकी रक्षा करें.

ता.08-11-2016 की रात्रि से ५०० और  १००० हजार नोट बंदी की  उसके पश्चात उन्होंने खुद अपने वक्तव्य में ये तस्लीम किया कि मैंने किन लोगों से दुश्मनी मोल ले ली है मैंने जिनकी वर्षो के कालेधन की कमाई नष्ट कर दी है वे मुझे ज़िन्दा नहीं छोड़ेंगे. उनको जो करना हैं करें मैं देश और गरीबों के हित में जो करना है करूँगा. उन्होंने भावुक हो कर ये भी कहा मैंने देश के लिए घर कुटुंब छोड़ा है.

ये सच है कि उनके इस फैसले से आम लोगों को भारी तकलीफ़ हुई है और कईयों की बेंक में कतारों में खड़े रहने से जाने गयीं जिसका उल्लेख मैंने अपनी पूर्व पोस्टों में किया है.

पर ये भी सच है कि इससे कालेधन के कुबेरों, सीमापार और सीमा के अँदर के शत्रुओं की कमर टूट गयी है वे बौखलाये हुए हैं. वे किसी भी हद जक जायेंगे. इनमें नामी गिरामी पक्ष विपक्ष के सभी असुर जन शामिल हैं. वे आम लोगों को उकसा के कुछ भी करा सकते हैं. सर्वोच्च अदालत ने भी देश की सरकार को आगाह किया है.
ये सच है नोटबंदी की योजना के अमलीकरण में त्रुटियां हुई है ये जग ज़ाहिर है पर इसके इरादे में गरीब विरोधी खोट नज़र नहीं आती.

ता.०८-११-२०१६ की रात्रि के एक निर्णायक  फैसले ने सब आम खास को जमीन पर ला दिया.  अब लोगों में फिज़ूल खर्ची बंद हो गयी है. जो मां बाप बच्चों को देते थे उन्हें बच्चों से लेने के दिन आये. बैंकों की जगह बच्चों की गुल्लकों ने देश के घर चलाये. नौकरों ने अपने मालिकों को छूटे देकर फ़र्ज निभाया. बोस को सहयोगियों ने मदद की.

मुझे एक मेडीकल वाले मित्रने इकलौती 500 की नोट बदलकर लाइन में शहीद होने से बचा लिया. जो लाइन में लगकर मरें है वे देश के कर्तव्यनिष्ठ नागरिक थे उनके परिवार को  मुआवज़ा दिया जाना चाहिए.

मैंने और मेंरे साथी अध्यापक मित्रों ने मात्र पावागढ़वाली मां से देश के प्रधानमंत्री मोदीजी के लिए प्रा्रार्थना ही नहीं की आज का उनकी कुशलता के लिए अपने इष्टदेव का व्रत भी रखा है.

मेरी ता. 18-11-2016 को सादी की साल गिरह थी परिवार अहमदाबाद में और ता. २०-११-२०१६ रविवार छुट्टीका दिन होने के बावज़ूद मैं अहमदाबाद नहीं गया. पावागढ़ से रास्ते में लौटने पर  पत्नी का मैसेज मिला आपका मोबा. क्यों बंद है

मैंने उन्हें उसका कारण बताया कि मैं अपने देश के हित में निर्णय लेने वाले माननीय प्रधान मंत्री के कुशलता की पार्थना करने साथी अध्यापक मित्रों के साथ पावागढ़ गया था. इसके पहले वो मुझ पर शंका करें या कुछ कहें मैंने उन्हें कहा कि आपकी कसम. वो शान्त हो गयीं मोदीजी का जादू ही कुछ ऐसा है वो मुझे उनका विरोधी समझती हैं पर जिसका विरोध होता है उसका आकर्षण भी उतना भी गाढ़ होता है.

 मैंने उनसे ये भी कहा कि सोमवार को उपवास भी  रखूँगा आप भी रखना और बेटी को भी  औऱ बेटे को भी बताना. उन्होंने हँसकर कहा आप दल बदलू हो. आप उनकी बुराई भी करते हो और प्रार्थना भी करते हो. फिर उन्होंने सी.ए. बिटिया से वात करा दी और मैंने उससे देश के प्रधानमंत्री की नोटबंदी से उनकी जान को बढ़े ख़तरे से बचाने के लिए आज सोमवार को व्रत रखने को कहा तो उसने खुश होकर कहा हां मैं रखूँगी चार्टड एकाउन्ट होने के नाते अर्थव्यवस्था में व्याप्त धांधली का उसे पता है.
      
अंत में अपने चाहने वालों से अनुरोध करता हूँ कि मैं अपने जीवन काल में आदरणीय इन्दिरा गांधीजी के बाद एक शक्तिशाली प्रधानमंत्री को देख रहा हूँ. ऐसी हस्तियाँ हर रोज़ पैदा नहीं होतीं. डॉ.इक़बाल के शब्दों में कहूँ तो

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है.
बड़ी मुश्किल में होता है चमन में दीदावर पैदा.

हम भले किसी भी जाति और धर्म से तालुक्क रखते हों  हमें देश के प्रधानमंत्री की दीर्घायु के लिए अपने इष्टदेव से प्रार्थना करें व्रत- रोज़ा रखें जिससे देश के दुश्मन किसी तरह कामयाब न हों.
प्रार्थना के साथ साथ देश के किसी भी कोने में  देश विरोधी  एवं आपसी भाईचारे को बिगाड़ने के रचे जा रहे षडयंत्र से उस क्षेत्र के प्राधिकारी को अवगत करें. ये हम सभी भी दायित्व है मात्र राज्य या केन्द्र सरकार का ही नहीं.

मैंने प्रधानमंत्री मोदीजी के नोटबंदीपर किये सर्जीकल  स्ट्राइर पर आज एक दिन का उपवास  भी रखा है जिस दिन वे कालेधन के स्त्रोत प्रोपर्टी और सोने पर भी स्ट्राइक करेंगे तब पूरे 9  दिन का व्रत रखूंगा जैसा मैं मां दुर्गा के नवरात्रि पर हर साल रखता हूँ. लोग उनके इस स्ट्राइक का बेसब्री से इंतज़ार कर रहें हैं वे देरी न करें अभी आम लोग परेशान हुए हैं और नाराज़ है पर जैसे ही बिल्डर प्रोपर्टी जमीन माफियां पर टूटेंगे लोग शान्त हो जायेंगे और अपने  सब दुख भूल जायेंगे. 

प्रिंसीपल डॉ.सुभाष भदौरिया ता.२१-११-२०१६



शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

लगे लाइन में तब ये चांदनी हिस्से में आयी है.

ग़ज़ल
करें क्या सारी दुनियां की कमी हिस्से में आयी है.
         लगे लाइन में तब ये चांदनी हिस्से में आयी है.

बहुत रोये हैं रातों को हमें मत पूछिये साहब,
बड़ी मुश्किल से थोड़ी सी खुशी हिस्से में आयी है.

सुलाया माँ ने बच्चे को ये भूखा रात में कहकर,
सबर कर ये मुसीबत की घड़ी हिस्से में आयी है.

किनारों पर खड़े रहकर बहुत उपदेश देते हो,
उन्हें पूछो उफनती सी नदी हिस्से में आयी है.

अभी रोज़ों व उपवासों को रख तू साथ दे मेरा,
वो कहते हैं ये जादू की छड़ी हिस्से में आयी है.

डॉ. सुभाष भदौरिया  गुजरात ता.18-11-2016

तारीख 18-11-2016 कॉलेज से लौटा तो शाम 4 बजे साथी अध्यापक विनोदभाई  और वखतसिंह गोहिल ने मोब. पर  कहा सर आ जाओ ए.टी.एम.में लाइन कम है.

इससे बेहतरीन और क्या ख़बर हो सकती थी. आनन फानन हम जिस हाल में थे उसी में तुरंत  गाड़ी से से पहुँच लिये. रास्ता मात्र आधा किलोमीटर का ही था पर चलकर जाने में कई ख़तरे थे.
जैसे पैसा खतम घर जाओ सनम.

वैसे सनम का ता.08-11-2016 की रात्रि से ही बुरा हाल था. लाइन में खड़े रहने पर धूप में प्यास लगी तो कुछ बच्चे पानी के पाउच ले के नज़र आये.

हमने कहा पैसे नहीं हैं छूटे. वो बोले पैसे के- बिना पैसे के बिना. मैंने एक बच्चे के सर पर हाथ फेरते हुए कहा बेटा बहुत बड़े आदमी बनोगे.

बच्चे अपने पाकिट मनी से पानी के पाउच ए.टी.एम. की लाइन में खड़े सब को बांट रहे थे. मुसीबत की घड़ी में वे अपना योगदान दे रहे थे.

लाइन में मेरी तरह खड़े सब पानी के पाउच पीकर बच्चों को दुआ देने लगे.
 इसके बाद  हमारा नंबर आया तो 2000 (दो हजार की मर्यादा में) 100 के 20 नोट निकले तो हम तीनों की खुशी का ठिकाना न रहा.

सोचा इस ऐतिहासिक तस्वीर को ले लिया जाय.

क्या से क्या हो गये बेवफ़ा तेरे प्यार में वाला हाल था. कड़क चाय का हाईडोज़ ऐसा कि लोग लुगाइयों को दस्त लग गये.
पर खुले में जाने का ख़तरा ऐसा कि अब लोग रेल की पटरी के पास निपटने से डरने लगे कि साहब का भरोसा नहीं पटरी के पास बिजली का करंट छोड़ दिया तो कूदते फिरोगे सब. कहीं गया पानी कहीं गया लोटा वाला हाल होगा और बिना टिकिट पिक्चर दिखेगी सो अलग. लोगों को अब शौचालय बना लेने में ही भलाई है. अभी तो साहब ने खायेगा इंडिया की सप्लाई लाइन ही बंद की है.

मैंने  साथी मित्रो से कहा चलो इस एटीएम से 100 की 20 नोटों की प्राप्ति को सेलीब्रेट चाय पी कर किया जाय. आइस्क्रीम या होटलबाजी की  हिम्मत किसी में नहीं नहीं थी. खग समझे खग ही की भाषा.

शहेरा में हम तीनों को अभी अपने अपने मकान का किराया देना बाकी था जो दो हजार रुपये था.  ए.टी.एम. से दो हजार ही निकालने की मर्यादा थी पर दो हजार से क्या होगा. घर की  रसोई गैस भी हिचकोले ले रही है क्या पता कब उसके टें बोल जाये. दुकानदार सभी नकद लेते हैं कोई चैक नहीं लेगा.सब्जीवाला किराने वाला तो कतई नहीं.

इसी बीच ता.16-11-2016 को गांधीनगर सरकारी प्रिंसीपलों का स्नेह मिलन तय था मित्रों का निमंत्रण भी मिला था पर न जा सका. फोन आने पर बताया कि सर्जीकल स्ट्राइक के कारण जेब में 200 रूपये ही हैं पुरानी 500 या हजार की कोई नोट नहीं कि गाड़ी में पेट्रोल डला सकूँ.

अहमदाबाद  का परिवार तो अब अमेरिका हो गया. शेहेेरा से मात्र 200 कि.मीटर की दूरी सरकार सर्जित विपदा से कितनी बढ़ गयी.
क्या जमाना था हमारा जब कि इसके पहले आई टेन को हवाई जहाज बना के सटासट ढाई घंटे में अहमदाबाद पहुँच जाना और अब लुट गये तेरे प्यार में ऐसा क्या गुनाह किया जोर जोर से गाने को जी चाहता है पर दिल्ली तक कैसे सुनाई देगा ?
सारी उम्र ईमानदारी से निकाली नियमित टेक्स भरे ऊपर नीचे की कमाई से कभी वास्ता न रहा. न जमीन ना जायदाद और खुद के पास १ तोला सोना भी नहीं पत्नी के पास दो चार हो तो पता नहीं फिर भी ये सज़ा मिली. जिसकी कभी ख़ता की ही नहीं थी.

साहब ने काले धन के मगरमच्छो को पकड़ने में तालाब का सारी पानी उलीच दिया मगर मच्छ तो पानी से पहले ही बाहर थे उन्हें कुछ भी फर्क नहीं पड़ा  पर गरीब मछलियां तड़प तड़प के मर रही हैं. अब पानी के बिना मछलियां 50 दिन कैसे जियेंगी.

08-11-2016 की रात्रि मेरे पास जेब की इकलौती 500 की नोट मेडीकल स्टोर के बदलदेने से 7 दिन  उसी में खर्च चलाया आज उसमें भी २०० रुपये अभी शेष थे. हालांकि मैंने अपने खर्चों में कई कटौतियां कर दी थी. परिवार से दूर पोस्टिंग प्लेस पर रहने के कारण सुब्ह दूध की 20 रुपये में मिलने वाली थैली बंद कर दी. दूध पीता नहीं था चाय के लिये रखता था कभी कोई मित्र आ जाये. अब तो काली चाय के दिन आये फिर भी बागों में बहार है के गीत बज रहे हैं.  अब तो मात्र 5 रुपये ठेले पर चाय शुरू कर दी है.

गोधरा मात्र 20 किलो मीटर होने के बावज़ूद जाना बंद कर दिया इस डर से कि गाड़ी में पेट्रौल खतम हो गया तो रोज घर से कॉलेज तीन किलो मीटर की पैदल यात्रा होगी.  पुरानी नई कोई नोटें अब कहां.

वैसे खुद को तैयार कर लिया है कि अब कोलेज की पैदल यात्रा ही करनी है. आज से कॉलेज में २ बजे से ६०० से अधिक छात्रों की परीक्षायें शुरू होने जा रही हैं जब मेरा ये हाल है तो उनका क्या होगा क्योंकि वे ज़्यादातर खेतों में मज़दूरी करनेवाले हैं. 

वैसे इस सर्जीकल स्ट्राइक के कुछ आश्चर्यजनक परिणाम भी आये हैं.
जैसे लोगों ने खासकर पुरूषों ने बाहर खाना पीना बंद कर दिया है. इससे लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. लोग समोसे पकोड़े तो ठीक सब्जी भी नहीं खरीद रहे. मधुशालायें बंद पड़ी है. अब न रहे वो पीने वाले अब न रही वो मधुशाला .

चोरी चपाटी का धंधा भी बंद है चोर लुटेरे भी क्या चुरायें क्या लूटें. लोगों के पास अब बचा ही क्या है.
और एक बात लोग लुगाई कहीं भी यहां पे जायें वहां पे जायें जो मुँह उठाके चल देते थे अब घर में चुपचाप बैठे हैं. सड़कों पर वायु प्रदूषड़ कम हुआ है.मेरा देश बदल रहा है बजाओ ताली.

इस परेशानी के साथ साथ प्रोपर्टी और सोने पर भी सर्जीकल स्ट्राइक हो जाय तो मज़ा आ जाये.

उपरोक्त ग़ज़ल और तस्वीरें मौज़ूदा हालात के नाम हैं. किसी को पसन्द आ जायें तो अपनी मुहब्बत से नवाज़ना ना भूलें आमीन.
डॉ.सुभाष भदौरिया गुजरात ता.18-11-2016


शनिवार, 12 नवंबर 2016

बेदर्दी ने हाय राम बड़ा दुख दीना.

बेदर्दी ने हाय राम बड़ा दुख दीना.

मृत्युलोक के राजा यमराज के दरबार में एक बुढिया बिलख बिलख के रो रही थी. हाय मैंने खेत बेच कर लड़की की शादी के लिए 50 लाख लिए थे. 500 और 1000  के नोट बंद हो गये इस दुख ने मेरे प्राण ले लिये. हाय अब मेरी लड़की की शादी कैसे होगी. जो दूत बुढिया की आत्मा को पृथ्वीलोक से लाया था उससे यमराज ने पूछा ये क्या मामला है. दूतने बताया महाराज पृथ्वीलोक भारतवर्ष में हाहाकार मचा हुआ है. कालाधन पर सर्जीकल स्ट्राइक हुई है.
यमराज कुछ समझे नहीं तो चित्रगुप्त ने समझाया महाराज भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रमोदीजी ने ता.08-11-2016 की रात्रि से 500 और 1000 की नोटों को बंद करने का ऐलान किया उसके दूसरी ही दिन इस बुढिया ने आत्महत्या कर ली कि कि उसकी 50 लाख की नोटों का क्या होगा और ये दूत उसकी आत्मा को यहां ले आया.
यमराज मंद मंद मुस्कराये अच्छा तो प्रभुने लीला दिखाना शुरु कर दिया है. बुढिया बोली कौन प्रभु ? यमराज ने कहा प्रथ्वीवासी उन्हें नरेन्द्र मोदी के नाम से जानते हैं. वे भगवान विष्णुके अवतार हैं नित नई लीला रचा रहे हैं पहले झाड़ू लगवायी, फिर शौचालय बनवाये, लोगों के स्वास्थय की चिंताकर योग करवाया. वे सब को सुखी बनाने में लगे हुए हैं. चिंता मत करो अम्मा वे तुम्हारी बिटिया की शादी करवा देंगे.

बुढिया बोली मोदजी निर्मोही हैं वे शादी विवाह से दूर रहते हैं मेरी बिटिया की शादी कैसे करवायेंगे.

इतने में एक बूढा अँधा भिखारी घिघियाता हुआ दिखाई दिया.
हाय कोई मेरे 500 और 1000 के नोट बदल दे. भगवान उसका भला करें. वो दूधो नहाये पूतों फले. धर्मराज ने बूढ़े को समझाते हुए कहा ये सब प्रभु का ही किया धरा है इसमें उनकी योजना होगी तुम्हें भीख मांगते उनसे नहीं देखा गया.

अँधा भिखारी बीच में फिर से अपना राग आलापने लगा. हाय क्या करूं २० साल भीख मांगकर जो 5 लाख जोड़कर एक भले आदमी को दिये थे उसने कहां अब सब रद्दी हो गये. हाय मैंने एक एक रुपिया भीख मांग कर जोड़ा था. पर चिल्लर को संभालने के चक्कर में व्यापारियों से 500 और 1000 के नोट ले लिये. नोट न चलने के कारण मेरे प्राण पखेरु उड़कर यहां आ गये.

यमदूत ने झिड़कते हुए कहां बाबा इनकम टैक्स नहीं कटाये सो लुढक लिए अब यहां भीख मत मांगो यहां कोई बैंक नहीं कि हम तुम्हारे नोट बदल देगें.

इतने में एक और  छोटे शिशु को पकड़े दूत आता दिखाई दिया. बच्चा अजनबी जगह पर माँ के न दिखाई देने पर जोर जोर से रोने लगा यमराज ने कहा इसको क्या हुआ. दूत ने कहा महाराज इसकी मां दूसरों के घर में वर्तन मांजकर गुज़ारा करती है . वह 500 का नोट लेकर डॉक्टर के पास इलाज़ कराने गई डॉक्टर ने छूटे  रूपये मांगे वह बहुत रोई गिड़गिड़ाई पर डॉक्टर का दिल नहीं पसीजा.इतने में बच्चे के प्राण निकल गये मैं इसकी आत्मा को  यहां ले आया.

यमराज समझ गये कि मामला गंभीर है. काले धन पर सर्जीकल स्ट्राइक हुई है तो अभी तक कोई पक्ष- विपक्ष का नेता, मंत्री, बिल्डर, वकील, डॉक्टर, इंजीनियर सरकारी अधिकारी क्यों नहीं आये.  बड़े-बड़े  धनकुबेर कोई भी नहीं सबसे ज़्यादा कालाधन तो उन्हीं के पास है. पर वे देश में क्यों रखेंगे.

चित्रगुप्त ने धर्मराज को समझाया महाराज वे सब जुगाड़ी हैं. उन्होंने पहले से जुगाड़ कर लिया होगा. जो बच गये वे भी सेटिंग में लगे हुए हैं.मरना तो आम आदमी का है.

यमदूत ने कहां महाराज पृथ्वी की जन संख्या की तुलना में यहां दूतों की संख्या कम है. आपने जो भर्ती अभी की है वो भी फिक्स पगार पर है नये दूत समान काम समान वेतन की मांग कर रहे हैं.
500 और 1000 की नोटों के बंद होने से पृथ्वीलोक से  आवा जाही बढेगी. धर्म राज बोले तुम कहां फिक्स पगार की बात बीच में ले बैठे.

यमलोक का वज़ट वैसे ही कम है काम ज्यादा बढ़ गया है  तुम्हें तकलीफ हो तो  तुम स्वैच्छिक निवृत्ति ले लो. दूत नौकरी जाते देख घबराया. यमराज ने उससे कहो जाओ मेरे भैसे को तैयार करो उसे कुछ खिलापिला देना. पृथ्वीलोक की लंबी यात्रा करनी हैं.
चित्रगुप्त बीच में ही बोल पड़े महाराज आप अभी मत जाओ. पृथ्वीलोक में अभी अफरा तफरी मची हुई है आपके जाने से और लोग घबराकर प्राण त्याग देंगे.

इतने में नारायण, नारायण कहते नारदजी पधारे और यमराज से बोले कोई गंभीर विचार विमर्श हो रहा है. आपके यहां  स्वर्ग-नर्क की सीटों की समस्या हल हो गई क्या. यमराज बोले वो तो जस की तस है पर दूसरी बढ़ गई है.

नरेन्द्र प्रभुने पृथ्वीपर सर्जीकल स्ट्राइक कर दी है नारदजी ने भौंहे सिकोड़ी मैं समझा नहीं कुछ. धर्मराज ने विस्तार से कहा कि भारत के प्रधानमंत्री  मोदीजीने आक्समिक 500 और 1000 की नोटों को चलन बंद कर दिया है. बताया है कि उसका उद्देश्य कालाधन और टेरर फंडिंग,जाली नोटों का रोकना है.

मगर मच्छों को पकड़ने की चाह में  उन्होंने तालाब का सारा पानी उलेच दिया. बिचारी छोटी छोटी मछलियां तड़प तड़प  के मर रहीं हैं.
यमराज बोले नारदजी आप नो नारायण के बहुत करीब हो इस समस्या का निदान करो वर्ना पृथ्वी पर मरने वालों की संख्या बढ़ी तो यहां की व्यवस्था मुझे संभालने में दिक्कत होगी.

नारदजी ने कहा ठीक है मैं देखता हूँ पृथ्वीलोक में क्या हो रहा है. नारदजी जैसे वायुमार्ग से पृथ्वीलोक के नज़दीक आये तो देखा मानवों की लंबी कतारें किसी ख़ास इमारत के सामने लगी हुई हैं. और पास आने पर पता चला नर, नारी, युवा, वृद्ध सभी लाइन में लगे हैं. अपने यान को दूर रोक कर वहां पहुँचे जहां काफी शोर हो रहा था.

ये बैंक थी लोग अपनी 500 और 1000 की नोट जमा करने और घर खर्च की निश्चित रकम लेने आये थे जो 2000 रुपये के नोट के रूप में दी जा रही थी. पर वो भी किसी काम की नहीं एक झुनझुने की तरह थी

नारद जैसे ही बैंक के मुख्य दरवाजे की ओर नारायण नारायण कहते बढ़े लाइन में लगे लोग लुगाई चिल्लाने लगे महाराज बीच में मत घुसों हम यहां भूखे प्यासे सुब्ह 6 बजे से लाइन में लगे हैं और आप बीच में घुस रहे हैं.
इतने में एक तेज महिला ने पुलिस से कहा देखते क्या हो बीच में घुस रहे इस गेरुये बाबा को बाहर निकालो.
नारद बोले माई मैं न तो नोट बदलवाने आया हूँ न जमा करवाने मुझे अंदर जाकर हालचाल जानना है.

माई कहने पर महिला और भड़क गयी. वो बोली महाराज आपको मैं माई नज़र आती हूँ. फिर उसने अपने पर्स से एक छोटा सा आइना निकाल कर चेहरे को ठीक ठाक किया.
 लाइन में खड़े कुछ नौजवान माई कह कर हँस पड़े. महिला और बिफर गयी पुलिसवालों से बोली खड़े खड़े तब से मेरी शक्ल देख रहे हो निकालो इस बाबा को बीच में से.
पुलिसवाले नारद के पास गये और बोले महाराज लोग बहुत गुस्से में हैं कुछ भी हो सकता है आप लाइन में पीछे जाकर खडे हो जाओ. नारद ने वहां से निकलने में ही भलाई समझी वे लोगों के हाथों पिटते पिटते रह गये और मन में सोचे लीला प्रभु रचायें नोट वो बंद करायें और  मार हम खायें.

नारायण-नारयण कहते कुछ दूर गये तो एक पेड़ के नीचे कुछ औरतें बैठी बिलख बिलख के रो रहीं थी.
नारदजी पास गये तो एक ने कहा महाराज आगे जाओ हम वैसे ही सुब्ह से भूखी प्यासी परेशान हैं और आप आ गये. नारद ने  कहा देवी हमें कुछ नहीं चाहिए हम तो सिर्फ आप लोगों से ये जानना चाहते हैं ये रोना धोना क्यों मचा हुआ है.
 क्या किसी की मौत हो गयी है. एक महिला बोली महाराज 500 और 1000 की नोटों की मौत हो गई हैं हम उसके ग़म में रो रहे हैं. एक बोली हाय हमने पेट काटकर जैसे तैसे दस बीस हजार जोड़े थे कि हारी बीमारी में काम आयेंगे. अपने अपने पति से छिपाया उन्हें नहीं बताया.
अब अगर उन्हें  बतायें तो दस सवाल पूछेंगे कहां से लाई,किसने दिये. हाय हमारा मोदीजी तीन तलाक करा के ही मानेगे.
दूसरी महिला ने उसे चुप कराते हुए कहा कि दूर पेड़ के नीचे उदास बैठे पतिदेवों को पता चला तो घर में नहीं मुहल्ले भर में रायता फैलेगा.

एक बोली हाय हमने मोदीजी को इसी लिए बोट दिया था. हम गरीबों का गला रेत दिया कालाधन वाले तो मज़े कर रहे हैं मरना हमारा है. खुद तो जापान चले गये और गरीब लोग लाइन में लगे हुए हैं.

इतने में एक 10 साल का बच्चा अपनी टूटी गुल्लक ले के रोता हुआ आया और अपनी माँ लड़ने लगा मेरी गुल्लक क्यों तोड़ी मां बोली बेटा घर चलाने को और कोई दूसरा चारा नहीं था. बच्चा था कि समझ नहीं रहा था बस एक ही रट लगाये हुए था कि मेरी गुल्लक क्यों तोड़ी गुस्से में मां ने दो थप्पड़ जड़ दिये.

साले यहां लोग टूट गये हैं इसे अपनी गुल्लक की पड़ी है.

नारद को  गरीब औरतों को दुख देखा नहीं गया उनकी आँखों से अश्रु झरने लगे. मनुष्य होने में क्या दुख हैं उन्हें समझ में आया.
वे वहां से आगे बज़ार की ओर बढ़े तो देखा सब्जीवाले ,नाश्तेवाले, फलवाले, किराना की छोटी छोटी दुकानों पर सन्नाटा था उन पर कोई ग्राहक नज़र नहीं आ रहा था जैसे कर्फ्यु लगा हो. भीड़ सिर्फ बैंको और ए.टी.एम. केन्द्रों पर प्रतीक्षा करती नज़र आ रही थी.

अब तक पृथ्वी पर भ्रमण करते करते नारद काफी थक चुके थे.  वायुयान पर सवार हो के आगे चले तो उन्हें महानगरी मुंबई की बत्तियां जलती नज़र आयीं तो

वायु यान से नीचे उतर के देखा तो ये मुंबई का ख़ास इलाका था. सज़ी धज़ी स्त्रियां एवं युवतियां झरोखे से सड़क पर नज़र डाल रहीं थी पर रोज़ चहल पहल वाली सड़के आज सुनसान थीं. सर्जीकल स्ट्राइक का वहां भी  प्रभाव पड़ा.

कोई  छैला नज़र नहीं आ रहा था जिनको उनकी तलाश ही नहीं ज़रूरत भी थी. ये 500 और 1000 की नोटों के बंद होने का कमाल था जिसके कारण भोगी भी योगी बन किसी  गुफा में जा बैठे थे.
नारद थोड़े आगे बढ़े तो देखा एक अँधेरे में सजी धजी स्त्री को एक अधेड़ 500 की नोट बता रहा था युवती छूटे निकाल का रोना रो रही थी. अधेड़ उधार रखने को कह रहा था पर स्त्री कह रही थी उधार रखूँगी तो आज घर बच्चों को क्या खिलाऊँगी.
इसके  आगे  पृथ्वी का हाल देखने की नारद की की हिम्मत नहीं हुई वे बच्चों की तरह फूट फूट कर रोने लगे और झट से अपने यान पर सवार हो अन्तर्ध्यान हो गये. जब कि पृथ्वीलोक पर भक्त जन प्रभुलीला की आरती उतार रहे थे तो दूसरी तरफ गरीब लाचार लोगों की आत्मा चीत्कार कर रही है बेदर्दी ने हाय राम बड़ा दुख दीना.
प्रिंसीपल डॉ. सुभाष भदौरिया  गुजरात ता.१२-११-२०१६




गुरुवार, 10 नवंबर 2016

ता. 08-11-2016 की रात रंक हुए राजा और राजा हुए रंक.


ता. 08-11-2016 की रात रंक हुए राजा और राजा हुए रंक.

देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदीजी टी.वी. पर देश को संबोधन कर रहे थे. शुरूआत में लगा कि वे पड़ोसी देश से तंग आकर कोई सख़्त कदम के लिए देश को तैयार कर रहे हैं.
 फिर तुरंत ख़याल आया कि युद्ध जैसी क्रियाओं में गुप्तता होती है ये वे क्या कर रहे हैं.
पर जैसे ही उन्होंने 500 और 1000 रुपयों की नोटों को ता. 08-11-2016 की रात्रि से रद्द करने का एलान किया तुरंत अपने पोकिट को चेक किया उसमें 10 रुपये के 07 नोट,50 रुपये का 01 नोट, 05 रुपये का 01 नोट और 500 रुपये का 01 नोट हाज़िर थे.   
जिसमें125 रुपये जीवित थे और 500 रुपये के 01 नोट की सांसे अभी चल रहीं थी उसका मृत्युकाल रात 12 बजे के बाद का घोषित किया गया था.
तुरंत अहमदाबाद में पत्नीजो को फोन लगाया और उन्हें टी.वी. समाचार देखने को कहा साथ में उनसे 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट के बारें में पूछा तो उन्होंने कहा तुमने बहुत दे दिये हैं का रोनो रोया.
जब कि मैं हर मास अपनी सेलरी से उनके ऐकाउन्ट में अहमदाबाद घर चलाने के लिए ए.टी.एम. से 40,000 ट्रांसफर करता हूँ.

इसके बाद अपनी चार्टड एकाउन्ट बेटी से बात की तो उसने कहा ओफिस में हूँ अभी ऐसा कैसे हो सकता है. 500 और 1000 के नोट कैसे बंद हो सकते हैं.
इसके  अपने बेटे को फोन किया जो एस.बी.आई. बैंक भावनगर डिवीजन में स्पेशियल लीगल सेल में डिप्टी मेनेजर है उसने अटैन्ड नहीं किया थोड़ी देर के बाद उसका फोन आया तो मैंने उससे 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों के बंद होने की बात की  उसने भी यही कहा ऐसा कैसे हो सकता है मैंने  तुरंत टी.वी. पर प्रधान मंत्री मोदीजी के संबोधन को सुनने को कहा उसने कहा कि मैं आफिस में हूँ देखता हूँ फिर उसके बाद उसका फोन आ गया हाँ ऐसा हो गया है.
कहने का तात्पर्य यह है बैंक सेक्टर और फायनांस सेक्टर में कार्यरत लोगों को भी इस आर्थिक सर्जीकल स्ट्राइक की गंध तक नहीं थी.
अब मुझे चिन्ता अपनी पोकिट में मूर्छित 500 की नोट की थी जिसकी मृत्यु रात 12 बजे की बाद तय की गयी थी.
ये तो अच्छा हुआ एक दिन पहले गोधरा अपनी गाड़ी में पेट्रोल और गेस फुल करा लिये थे. साथ ही परिवार से दूर अपने पोस्टिंग प्लेस शहेरा में रहने के कारण साप्ताहिक खरीदी में कुछ फल एक 500 ग्राम शहद के साथ ही घर खुद खाना बनाने के लिए 01 किलो आटा और कुछ सब्जी खरीदी जा चुकी थी सो चिन्ता नहीं थी.
पर अपने जेब में  मैं इकलौती  500 रुपये तड़पती नोट को कैसे देख सकता था सो तुरंत शहेरा गांव के मेडीकल स्टोर पर जाकर  500 रुपये देकर 01 डिटोल साबु देने को कहा मेडीकल वाला मुस्कराया उसने कहा साहब 500 की नोट तो चल बसी. पर मैंने कहा उसकी मौत तो रात्रि १२ बजे के बाद तय की गयी है वो मुस्कराया.
मैंने कहा क्या करुं जेब मैं अब सिर्फ 125 रुपये जीवित हैं. उसने कहा साहब आप 500 रुपये मुझे दो और सौ सौ के पाँच अपने पास रखो मैं व्यापारी को दे दूँगा.
मैं समझ गया वो मेरी इज़्जत कर रहा है. दुकान पर हाज़िर एक मित्र ने कहा चलो सर शहेरा का हाल देखते हैं.
 एक नाश्ते की बड़ी  दुकान पर जाने पर उसने 1000 रुपये की नोट के छूटे मांगे तो काउन्टर बैठे शख़्स ने कहा कि छूटे नहीं हैं.
हम लोग समझ गये रात्रि १२ बजे से पहले ही ५०० और १००० रुपये की नोटों के प्राण निकल चुके है अब सिर्फ उनका क्रिया कर्म बाकी है.
मैं गुजरात राज्य का सरकारी कर्मचारी होने के नाते हर मास अपनी कुल 1,60,000 हजार तनखाह में से 40,000 हजार एडवान्स टेक्स भरता हूँ ૩૦,૦૦૦ हजार मकान की किश्त और जी.पी.एफ में 20,000 अहमदाबाद पत्नी को 40,000 बैंक से ट्रांसफर और पिछले 6 महीने से आपातकाल के लिए 20,000 रुपये बैंक में  बचत करता हूँ.
मेरे पास काला क्या सफेद धन भी नहीं है. बस बच्चों को बेहतरीन शिक्षा दी है.
मैं हर साल गुजरात सरकार को अपने दिये विवरण में ये भी बताता हूँ कि मेरे पास कोई चल अचल संपति नहीं हैं.

मैंने आज तक एक लाख रुपये कभी एक साथ नहीं देखे मेंरे एकाउन्ट में कभी भी २५ साल की सरकारी नौकरी में १ लाख रुपये नहीं हैं. मैंने अपने अध्ययन काल में साहित्य में कबीर को पढ़ा था साईं इतना दीजिए जामे कुटुंब समाय. मैं भी भूखा ना रहूँ साधु ना भूखा जाय. मैं इसको जीता हूँ.

हाँ फिर इस ईमानदारी का सिला मुझे ईश्वर से मिला मात्र २३ साल में सी.ए.पास. बेटी को एक बहुत बड़ी कंपनी में जोब मिली. बेटा पहले ट्राविन कोर एस.बी.आई. में केरला पोस्टिड था अब एस.बी.आई. में लीगल अफ्सर के रूप में गुजरात में कार्यरत है.
मैंने फिर एक बार पत्नी से जानने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि दो दिन पहले बैक से 15,000  निकाल के लाई थी 500 के नोट हैं क्या करूँ.
 घर पर काम करने वालों को क्या दूँ. दूध वाले के पैसे बाकी हैं. आज घर की गुल्लक तोड़ी सौ सौ के 11 नोट निकले हैं. उसमें अभी सब करना है. मैंने बेटी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उसके पास भी 100 डेड़ सौ से ज़्यादा नहीं पर वो अपना ट्रांजिक्शन नेट से करती है.
 मैंने कहा और बेटा तो उन्होंने कहा उसके पास भी इतने ही हैं. पर उसका एक टाइम खाना बेंक में ही होता है सो चिन्ता की बात नहीं.
पर सरकार के इस कदम से कालेधन की कुछ छो़टी छोटी मछलियां ही फंसी हैं मगर मच्छ तो संपति बनाये बैठे हैं. देश के प्रधान मंत्रीजी को उन लोगों पर भी स्ट्राइक करनी चाहिए जिन्होंने प्रोर्पटी बना रखी है जिनकी जमीने है मकान हैं और सोना चांदी है.

अगर हर सरकारी कर्मचारी को अपने हर साल चल अचल संपति का ब्यौरा देना आवश्यक है  और उस पर राज्य के एन्टीकरप्शन महकमें की नज़र होती है.

तो इस नियम को देश के हर नागरिक पर क्यों न लागु किया जाये. हर एक के पास सोना चांदी रखने की भी निश्चित मर्यादा तय करने के बाद बाकी को सरकार को अपने कब्जें में लेना चाहिए.फिर वे देश के धार्मिक स्थल ही क्यों न हों. लोग अपना कालाधन भगवान को भी तो गुप्त रूप से अर्पण कर आते हैं अब तो और ज़्यादा करेंगे इस पर लगाम लगनी चाहिए.

साथ ही इसकी शुरुआत सरकार को अपने घर से करनी चाहिए जिसमें नामी गिरामी अफ़्सर  मंत्री, नेता, हीरो ,जोकर सभी शामिल हैं.

पूरा देश अभी कोमा में है.पक्ष,विपक्ष, पंडित,,मौलवी, नर,नारी, सुर,असुर, बालक वृद्ध सब यही कह रहे हैं हाय मार डाला. मज़े की बात ये है कि सब ज़ाहेर तो कह रहे अच्छा कदम है पर अंदर से कई के जनाजे निकल चुके हैं. मैनें जब सब्जी वाले से कहा कि भाई अब उधार रख लेना छूटे पैसे नहीं है तो उसने कहा कि सच कहो सर निर्णय कैसा है मैने कहा अपने सब्जी वाले सेठ से पूछ मैं क्या कहूँ. छोटी छोटी मछलियां भी गिरफ्त में आ गयीं हैं.

मगर मच्छ अभी बाकी है. प्रोपर्टी और गोल्डन स्ट्राइक हो तब मज़ा आयेगा खेल का.

मैंने  पहले अपनी ग़ज़लों में अच्छे दिनों पर सवाल उठाये हैं जैसे अच्छे दिनों ने अपना क्या हाल कर दिया है. धोती को फाड़ उसने रूमाल कर दिया है.

पर अब पहली बार ऐसा लगा कि अच्छे दिनों की शुरूआत हुई है.

मैं इस पर गर्व लेता हूँ कि मेरे जैसे गुजरात राज्य के सरकारी अधिकारी के वर्ग २ प्राध्यापक से वर्ग १ प्रिंसीपल के प्रमोशन की फाइल पर तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी के दस्तख़त हैं. मैं इस पर भी गर्व महसूस करता हूँ कि गुजरात  

उच्च शिक्षा विभाग में राज्य की २ नंबर की पोस्ट जोइन डायरेक्टर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी के दस्तख़त हुए थे और मैंने खुद उस समय सी.एम.ओ. में जाकर उच्च अधिकारी से निवेदन किया था मुख्यमंत्री मोदीजी को बतायें कि मुझे जोइन डायरेक्टर से हटाकार प्रिंसीपल के रूप में शहेरा भेजा जाय. तत्कालीन मुख्य मंत्रीजी सचिव के साथ सहमत नहीं थे वो मुझे जोइन डायरेक्टर हायर एज्युकेशन के रूप में बदलने को तैयार नहीं जब कि गाँधीनगर सचिवालय के अन्य अधिकारी मुझे सही ढंग से काम करने नहीं दे रहे थे. छोटे अधिकारी शिक्षासचिव के कान मेरे खिलाफ भरते थे.
  
ईमानदारी से काम करने मे दिक्कतें बहुत होती हैं मुझसे ज़्यादा कौन जान सकता है. प्रधानमंत्री मोदी जी के इस कदम से उनके बाह्य दुश्मनों से ज़्यादा आंतिरक दुश्मन अब बढ़ गये है अभी और बढ़ेंगे पर वे अपना कार्य ज़ारी रक्खें बाह्य स्वच्छता के साथ आंतिरक स्वच्छता के इस यज्ञ में उन्हें कोई भी आहुति देनी पड़े तो दें देश के लोग तो तैयार हैं और मैं भी आमीन .

इब्तिदाये इश्क है रोता है क्या.
आगे आगे देखिये होता है क्या.

प्रिंसीपल डॉ. सुभाष भदौरिया ता.10-11-2016

सोमवार, 7 नवंबर 2016

आशिक़ी जान ले के छोड़े है,


ग़ज़ल
याद जब तेरी झिलमिलाये है.
फिर कलेजा ये मुँह को आये है.

शीश-ए-दिल की अब तो ख़ैर नहीं ,
देखो पत्थर से दिल लगाये है.

चैन अपना सँभालना तू भी,
चैन मेरा तो तू चुराये है.

आशिक़ी जान ले के छोड़े है,
जो भी सर पर इसे बिठाये है.

हम मुहब्बत में जान दे बैठे,
क्या पता था वो आज़माये है.

ज़िन्दगी अब कहां से लाऊं तुझे,
मौत पे आँसू  वो बहाये है.

डॉ. सुभाष भदौरिया गुजरात ता.07-11-2016


शनिवार, 5 नवंबर 2016

उस बेवफ़ा को फिर से अब याद किया जाये.


ग़ज़ल
उस बेवफ़ा को फिर से अब याद किया जाये.
अश्कों को इन आँखों से बर्बाद किया जाये

सूरत ही नहीं मिलती अब तेरी किसी से भी,
फिर दूजा कहो कैसे इर्शाद किया जाये .

उजड़े जो कहीं गुलशन आबाद करें उसको.
उजड़ा  हुआ ये दिल ना आबाद किया जाये.

हम चाहे जिस्म अपना फौलाद बना डालें,
पर मोंम सा दिल कैसे फौलाद किया जाये.

उसने तो बिछुड़ते हँसकर के कहा मुझसे,
कैदी तू उमर भर ना आज़ाद किया जाये.

डॉ. सुभाष भदौरिया गुजरात ता.05-11-2016